Dhar Bhojshala :भोजशाला को मंदिर मानने के पीछे ASI रिपोर्ट में छिपे थे बड़े राज! जानें क्या-क्या मिला

धार की भोजशाला को लेकर कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को मां वाग्देवी मंदिर के रूप में मान्यता दी है। ASI की 2100 पन्नों की रिपोर्ट में मूर्तियां, शिलालेख, स्तंभ और 'ॐ सरस्वत्यै नमः' जैसे प्रमाण मिलने का दावा किया गया। फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
भोजशाला को मंदिर मानने के पीछे ASI रिपोर्ट में छिपे थे बड़े राज! जानें क्या-क्या मिला

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने परिसर को मां वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर के रूप में मान्यता दी है। फैसले के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रशासन हाई अलर्ट पर है। फैसले के बाद धार जिले में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह सतर्क हैं। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। इससे पहले इस मामले में कई याचिकाओं पर लंबी सुनवाई हुई थी।

ASI की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने कोर्ट में लगभग 2100 पन्नों की रिपोर्ट पेश की थी। यह सर्वे करीब 98 दिनों तक चला था। कोर्ट ने रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों को महत्वपूर्ण माना। हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने इस रिपोर्ट को गलत बताया था।

खुदाई में मिले ऐतिहासिक अवशेष

रिपोर्ट के अनुसार सर्वे के दौरान कई महत्वपूर्ण चीजें मिलीं, जिनमें शामिल हैं-

  • मूर्तियां
  • प्राचीन सिक्के
  • विभिन्न ऐतिहासिक अवशेष

इनसे यह संकेत मिला कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से काफी समृद्ध रहा है।

मंदिर जैसी संरचना के संकेत

रिपोर्ट में कहा गया कि परमारकालीन भवन की नींव के ऊपर बाद में निर्माण किया गया। सर्वे में मिले स्तंभों और वास्तुकला से यह संकेत मिला कि ये पहले किसी मंदिर का हिस्सा रहे होंगे। बाद में इन्हें मस्जिद निर्माण में उपयोग किया गया हो सकता है।

Bhojshala Case

स्तंभ और मूर्तियों से जुड़े तथ्य

सर्वे में कुल 188 स्तंभ मिले-

  • 106 खड़े स्तंभ
  • 82 आड़े स्तंभ

इनकी बनावट मंदिर शैली से मेल खाती बताई गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ स्तंभों पर बनी देवी-देवताओं की आकृतियों को नुकसान पहुंचाया गया था। इसके अलावा गणेश, नृसिंह, भैरव और अन्य देवी-देवताओं की आकृतियां भी पाई गईं।

‘ॐ सरस्वत्यै नमः’ और शिलालेख

दो स्तंभों पर ‘ॐ सरस्वत्यै नमः’ अंकित मिला। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई शिलालेख संस्कृत और प्राकृत भाषा में पाए गए।

कुछ शिलालेखों में-

  • पारिजातमंजरी-नाटिका
  • अवनिकूर्मशतम
  • नागबंध

जैसे ग्रंथों का उल्लेख मिलता है।

पहले भी हो चुका है सर्वे

रिपोर्ट में बताया गया कि अंग्रेजी शासनकाल में भी इस स्थल का सर्वे हुआ था। 1987 में ASI की खुदाई में भी 32 मूर्तियां मिली थीं, जिन्हें हिंदू धर्म से जुड़ा बताया गया था।

रिपोर्ट का निष्कर्ष

ASI रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि वर्तमान ढांचे में पुराने मंदिर के हिस्सों का उपयोग किया गया हो सकता है। संरचना में परमारकालीन काल के प्रमाण मिलते हैं। यह स्थान प्राचीन शिक्षा और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा हो सकता है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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