MP कांग्रेस के विधायक स्पेशल फ्लाइट से बेंगलुरु जाएंगे :सिंघार का दावा-हमें 62 से ज्यादा वोट मिल सकते हैं

भोपाल। मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के कब्जे वाली सीट पर भाजपा द्वारा उम्मीदवार उतारने के बाद मुकाबला दिलचस्प हो गया है। इसी बीच कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को कर्नाटक भेजने का फैसला किया है, ताकि चुनाव से पहले पार्टी एकजुटता बनाए रख सके।
कांग्रेस का क्रॉस वोटिंग का डर
सोमवार को कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन और भाजपा की ओर से महेश केवट ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। भाजपा के मैदान में उतरने के बाद कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की आशंका सताने लगी है। पार्टी नेतृत्व को डर है कि मतदान के दौरान कुछ विधायक पार्टी लाइन से अलग रुख अपना सकते हैं।
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पार्टी के सभी विधायक उमंग सिंघार के घर पहुंचे
मंगलवार को कांग्रेस के सभी विधायक नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के भोपाल स्थित आवास पर पहुंचे। यहां पार्टी नेताओं के साथ बैठक के बाद विधायक एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए। कांग्रेस का प्रयास है कि मतदान तक सभी विधायक एक साथ रहें और किसी तरह की राजनीतिक सेंधमारी की संभावना न रहे।
कांग्रेस ने बेंगलुरु के लिए बुक किया खास विमान
कांग्रेस ने विधायकों को बेंगलुरु ले जाने के लिए स्टार एयरलाइंस का 72 सीटों वाला विशेष विमान बुक किया है। यह विमान मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे भोपाल एयरपोर्ट पहुंचेगा। सभी विधायक इसी विशेष उड़ान से कर्नाटक जाएंगे। कांग्रेस शासित राज्य में विधायकों को ठहराया जाएगा और मतदान तक वहीं रखा जा सकता है। पार्टी नेताओं का दावा है कि उनके पास पर्याप्त समर्थन है और राज्यसभा सीट पर जीत को लेकर वे पूरी तरह आश्वस्त हैं।
भाजपा लगातार विधायकों को तोड़ने में लगी- सिंघार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस के सभी 62 विधायकों पर पार्टी को पूरा भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार तोड़-फोड़ की राजनीति करती रही है, इसलिए एहतियात के तौर पर विधायकों को कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक भेजा जा रहा है। सिंघार ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को अपने विधायकों की चिंता करनी चाहिए।
महेश केवट के उतरने के बद मुकाबला तेज
राज्यसभा की तीसरी सीट पर मुकाबला तब रोचक हो गया, जब भाजपा ने मध्य प्रदेश मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को उम्मीदवार बना दिया। इससे पहले भाजपा के दो उम्मीदवार पहले ही मैदान में थे। पार्टी ने केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा और कई दौर के मंथन के बाद केवट के नाम पर मुहर लगाई। दूसरी ओर कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है।
2020 के राजनीतिक संकट से कांग्रेस अलर्ट
कांग्रेस इस चुनाव को लेकर खास सतर्कता बरत रही है। पार्टी को 2020 का राजनीतिक संकट याद है, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कई विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार गिर गई थी। इसी अनुभव को देखते हुए कांग्रेस कोई जोखिम नहीं लेना चाहती और अपने विधायकों को एक साथ रख रही है।
भाजपा को अब भी 58 सीटों की जरूरत
विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार, भाजपा को तीसरी सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत है। पार्टी के पास अभी भी आवश्यक आंकड़े तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त वोटों की कमी बताई जा रही है। निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक कमलेश डोडियार का समर्थन मिलने के बाद भी भाजपा को कुछ और वोटों की जरूरत पड़ सकती है।
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उज्जैन विधायक बोले- भाजपा इश बार भी मुंह की खाएगी
कांग्रेस विधायक महेश परमार ने दावा किया कि भाजपा की रणनीति सफल नहीं होगी और पार्टी को इस चुनाव में मुंह की खानी पड़ेगी। वहीं प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल और सज्जन सिंह वर्मा समेत कई वरिष्ठ नेता एयरपोर्ट पहुंचे और विधायकों की रवानगी की निगरानी करते नजर आए। कांग्रेस का दावा है कि उसके पास पर्याप्त समर्थन है और मीनाक्षी नटराजन की जीत सुनिश्चित है।
MP में भाजपा- कांग्रेस की अहम परीक्षा...
राज्यसभा की यह सीट सिर्फ एक संसदीय चुनाव नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की सियासत में कांग्रेस और भाजपा की ताकत की परीक्षा बन गई है। यदि क्रॉस वोटिंग होती है या राजनीतिक समीकरण बदलते हैं, तो इसका असर राज्य की भविष्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है। इसलिए दोनों दल इस मुकाबले को प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं।











