सागर :एमपी में बसों की अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी, 7 अगस्त से थम सकते हैं पहिए

सागर। मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर बड़ा संकट मंडरा सकता है। प्रदेशभर के बस संचालकों ने राज्य सरकार द्वारा बसों के राष्ट्रीयकरण संबंधी जारी अधिसूचना के विरोध में 7 अगस्त की रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। इस संबंध में मोतीनगर स्थित आदर्श गार्डन में मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन के बैनर तले प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित हुई। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से 500 से अधिक बस संचालकों ने भाग लिया। करीब पांच घंटे तक चली बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 6 जुलाई को जारी टेंडर और 7 जुलाई 2026 को राजपत्र में प्रकाशित राष्ट्रीयकरण संबंधी अधिसूचना तत्काल वापस ली जाए, अन्यथा पूरे प्रदेश में बसों का संचालन बंद कर दिया जाएगा।
राष्ट्रीयकरण से आजीविका पर संकट की आशंका
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था से वर्षों से परिवहन व्यवसाय से जुड़े निजी बस संचालकों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। उनका आरोप है कि राष्ट्रीयकरण और टेंडर आधारित व्यवस्था के जरिए निजी संचालकों को धीरे-धीरे परिवहन व्यवस्था से बाहर करने की तैयारी की जा रही है। इससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी और परिवहन व्यवसाय से जुड़ी नई पीढ़ी के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो जाएगा। बस संचालकों ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
टेंडर रद्द करने और किराया बढ़ाने की मांग
बस संचालकों ने आरोप लगाया कि सरकार टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से रॉयल्टी वसूली की तैयारी कर रही है, जिससे परिवहन व्यवसाय पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने 6 जुलाई को जारी टेंडर को तत्काल निरस्त करने की मांग की। बैठक में बस किराया बढ़ाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। संचालकों ने बताया कि वर्ष 2021 में डीजल की कीमत करीब 69 रुपए प्रति लीटर थी, जो अब 100 रुपए प्रति लीटर से अधिक हो चुकी है। इसके बावजूद लंबे समय से किराए में प्रभावी वृद्धि नहीं हुई है, जबकि पड़ोसी राज्यों में कई बार किराया बढ़ाया जा चुका है।
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परिवहन विभाग पर लगाए शोषण के आरोप
बैठक में बस मालिकों ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि परिवहन सचिव के निर्देशों के बावजूद कई अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते और बस संचालकों के काम अनावश्यक रूप से लंबित रखे जाते हैं। इससे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी होती है। संचालकों ने विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण करने की मांग की।
पंजीयन, परमिट और 15 वर्ष की सीमा खत्म करने की मांग
बस संचालकों ने पहले से पंजीकृत वाहनों को वैध मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की मांग की। साथ ही प्रदेश में पंजीयन की प्रतीक्षा कर रही करीब 1200 नई बसों का जल्द पंजीयन कराने की मांग उठाई। उन्होंने मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा 110(3) के तहत राज्य सरकार से समयबद्ध छूट देने, पहले से संचालित बसों के लिए 15 वर्ष की आयु सीमा समाप्त करने तथा परमिट की वैधता को फिटनेस प्रमाणपत्र की अवधि तक बनाए रखने की मांग भी रखी। अंतरराज्यीय बस परमिट प्रक्रिया को सरल बनाने की भी मांग की गई।
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हड़ताल हुई तो यात्रियों की बढ़ेंगी परेशानियां
बस संचालकों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार और संगठन के बीच जल्द सहमति नहीं बनती है तो 7 अगस्त से पूरे प्रदेश में यात्री बसों का संचालन ठप हो सकता है। इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर बड़े शहरों तक लाखों यात्रियों पर पड़ेगा। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र साहू, महामंत्री जय कुमार जैन, अतुल दुबे, सुनील पाण्डेय, अरविंद तिवारी सहित बड़ी संख्या में बस ऑपरेटर मौजूद रहे।












