भारत की बेटी का दम!ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता सिल्वर, देश को दिलाया 5वां मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। इस बार भारत की स्टार वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किलोग्राम भार वर्ग में बेहतरीन खेल दिखाते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि से भारत की मेडल तालिका में एक और पदक जुड़ गया और देश को प्रतियोगिता का 5वां मेडल मिला। ज्ञानेश्वरी पूरे मुकाबले में आत्मविश्वास से भरी नजर आईं। उन्होंने हर प्रयास में शानदार प्रदर्शन किया और आखिर तक गोल्ड के लिए संघर्ष करती रहीं। हालांकि अंतिम मुकाबले में उन्हें नाइजीरिया की खिलाड़ी से पीछे रहना पड़ा, लेकिन उनका प्रदर्शन हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।
भारत की चौथी पदक विजेता वेटलिफ्टर बनीं
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में वेटलिफ्टिंग भारत के लिए सबसे सफल खेलों में से एक बनकर सामने आया है। ज्ञानेश्वरी यादव इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाली भारत की चौथी वेटलिफ्टर बन गई हैं। उनसे पहले मीराबाई चानू ने गोल्ड, जबकि ऋषिकांत सिंह और राजा मुथुपांडी ने सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था। अब ज्ञानेश्वरी के सिल्वर के साथ भारत की वेटलिफ्टिंग टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर देने की क्षमता रखते हैं।
199 किलोग्राम वजन उठाकर जीता सिल्वर
ज्ञानेश्वरी यादव ने प्रतियोगिता में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा में नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला डिडिह ने कुल 206 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता। वहीं कनाडा की रेबेका ग्रौलक्स ने 178 किलोग्राम वजन उठाकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। हालांकि ज्ञानेश्वरी गोल्ड से थोड़ा पीछे रह गईं, लेकिन उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में बेहद दमदार रहा।
स्नैच राउंड में दिखाई शानदार ताकत
प्रतियोगिता की शुरुआत स्नैच राउंड से हुई। ज्ञानेश्वरी ने अपने पहले प्रयास में 82 किलोग्राम वजन आसानी से उठा लिया। इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में 85 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 88 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इस तरह स्नैच राउंड में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 88 किलोग्राम रहा। हालांकि इस राउंड के बाद वह दूसरे स्थान पर थीं, क्योंकि नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला डिडिह ने 93 किलोग्राम वजन उठाकर बढ़त बना ली थी।
क्लीन एंड जर्क में किया शानदार कमबैक
स्नैच राउंड के बाद ज्ञानेश्वरी ने क्लीन एंड जर्क में शानदार वापसी की। उन्होंने अपने पहले प्रयास में 103 किलोग्राम वजन उठाया और कुछ समय के लिए प्रतियोगिता में पहले स्थान पर पहुंच गईं। लेकिन नाइजीरिया की डिडिह ने अपनी पहली ही कोशिश में 105 किलोग्राम वजन उठाकर फिर बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद ज्ञानेश्वरी ने दूसरे प्रयास में 107 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बावजूद वह पहले स्थान तक नहीं पहुंच सकीं और दूसरे स्थान पर बनी रहीं।
गोल्ड के लिए आखिरी तक चला मुकाबला
क्लीन एंड जर्क के अंतिम दौर में नाइजीरिया की खिलाड़ी ने 110 किलोग्राम वजन उठाकर अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। इस सफल प्रयास के साथ उन्होंने गोल्ड मेडल लगभग पक्का कर लिया। दूसरी ओर, ज्ञानेश्वरी ने भी हार नहीं मानी और अपने अंतिम प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए 111 किलोग्राम वजन उठाया। इसके साथ उनका कुल वजन 199 किलोग्राम हो गया और उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया।
छत्तीसगढ़ की बेटी ने बढ़ाया देश का गौरव
ज्ञानेश्वरी यादव का सफर संघर्ष और मेहनत से भरा रहा है। छत्तीसगढ़ की रहने वाली ज्ञानेश्वरी ने कम उम्र में ही वेटलिफ्टिंग शुरू कर दी थी। लगातार अभ्यास और मेहनत के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। जूनियर और सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में लगातार अच्छे नतीजों के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली।
पटियाला में ले रही हैं विशेष प्रशिक्षण
ज्ञानेश्वरी फिलहाल पटियाला स्थित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (NS NIS) में प्रशिक्षण ले रही हैं। यह भारत का प्रमुख खेल प्रशिक्षण केंद्र है, जहां देश के कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयारी करते हैं। राष्ट्रीय कोचों की देखरेख में लगातार अभ्यास करने का फायदा उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स में भी मिला। उनकी मेहनत और अनुशासन का ही परिणाम है कि आज वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन कर रही हैं।
भारत की मेडल उम्मीदें और बढ़ीं
ज्ञानेश्वरी यादव के सिल्वर मेडल के बाद भारत की मेडल तालिका और मजबूत हुई है। वेटलिफ्टिंग में लगातार मिल रही सफलता यह दिखाती है कि भारतीय खिलाड़ी अब दुनिया के बड़े मंचों पर किसी से कम नहीं हैं। ज्ञानेश्वरी का यह पदक आने वाले खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। उनके प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।











