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बुरहानपुर में 50 बेड की अनुमति, भर्ती मिले 100 से ज्यादा मरीज; अस्पताल सील, 4 करोड़ के आयुष्मान इलाज की जांच की मांग

बुरहानपुर के गुड हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान 50 बेड की अनुमति के बावजूद 100 से ज्यादा मरीज भर्ती मिलने के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया।
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बुरहानपुर में 50 बेड की अनुमति, भर्ती मिले 100 से ज्यादा मरीज; अस्पताल सील, 4 करोड़ के आयुष्मान इलाज की जांच की मांग
गुड हॉस्पिटल में 50 बेड की अनुमति, 100 से ज्यादा मरीज भर्ती

बुरहानपुर। शहर में एक रेस्टोरेंट की बिल्डिंग में संचालित गुड हॉस्पिटल को स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर अनियमितताओं के चलते सील कर दिया है। अस्पताल को 50 बेड की अनुमति मिली थी, लेकिन जांच के दौरान यहां 100 से ज्यादा मरीज भर्ती मिले। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया। अब अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत हुए करीब 4 करोड़ रुपये के इलाज की भी जांच की मांग उठ रही है। आरोप है कि अस्पताल में मरीजों के इलाज और आयुष्मान कार्ड से जुड़े भुगतान में नियमों का उल्लंघन किया गया। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर आवाज उठने लगी है।

50 बेड की अनुमति, 100 से ज्यादा मरीज भर्ती

स्वास्थ्य विभाग की जांच में अस्पताल की क्षमता और वहां भर्ती मरीजों की संख्या को लेकर बड़ा अंतर सामने आया। अस्पताल के पास 50 बेड की अनुमति थी, जबकि जांच के दौरान 100 से ज्यादा मरीज भर्ती पाए गए। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के भर्ती होने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और नियमों के पालन पर सवाल खड़े हुए। जांच में अन्य गंभीर अनियमितताएं भी सामने आने की बात कही गई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया।

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4 करोड़ के इलाज की जांच की मांग

अस्पताल पर कार्रवाई के बाद अब आयुष्मान योजना के तहत हुए इलाज की जांच की मांग तेज हो गई है। जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) के बुरहानपुर जिला अध्यक्ष नंदकिशोर धांडे ने आरोप लगाया कि अस्पताल में आयुष्मान कार्ड के जरिए बड़ी राशि के भुगतान का मामला सामने आया है। धांडे का कहना है कि करीब चार करोड़  के आयुष्मान योजना के उपचार की जांच होनी चाहिए। उन्होंने मरीजों के आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड के इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की मांग की है।

आदिवासी मरीजों को गाड़ियों से लाने का आरोप

नंदकिशोर धांडे ने आरोप लगाया कि ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों से लोगों को गाड़ियों में भरकर बुरहानपुर लाया जाता था। उनके मुताबिक, मरीजों को बीमारी के नाम पर अस्पताल लाने के बाद उनके इलाज से जुड़े दस्तावेज और आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में मरीज की वास्तविक बीमारी और किए गए उपचार के बीच अंतर की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

जयस जिला अध्यक्ष नंदकिशोर धांडे ने कहा कि अगर स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की सही तरीके से जांच नहीं करता है तो संगठन आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी मरीजों के इलाज और आयुष्मान योजना के तहत निकाली गई राशि का रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। धांडे ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को विधानसभा तक उठाया जाएगा। उनका कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि मरीजों और सरकारी योजना से जुड़े हर पहलू की सच्चाई सामने आ सके।

नामी डॉक्टरों के पोस्टर दिखाकर मरीज लाने का आरोप

स्वास्थ्य विभाग की जांच में अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर बातें सामने आने की जानकारी दी गई है। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन द्वारा नामी डॉक्टरों के नाम और पोस्टर दिखाकर दूर-दराज के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से लोगों को इलाज के लिए लाया जाता था। यह भी आरोप लगाया गया कि सामान्य या छोटी बीमारियों को गंभीर बताकर आयुष्मान योजना के तहत इलाज किया जाता था। अस्पताल में अनट्रेंड स्टाफ रखे जाने के भी आरोप हैं।

बेसमेंट और किचन में भी लगाए गए थे बेड

अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर एक और गंभीर जानकारी सामने आई है। जांच के दौरान अस्पताल में निर्धारित क्षमता से अधिक मरीज मिलने के साथ-साथ बेसमेंट और किचन जैसी जगहों पर भी बेड लगाए जाने की बात सामने आई है। इससे अस्पताल की फायर सेफ्टी, मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी नियमों को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब इन सभी बिंदुओं की जांच किए जाने की मांग की जा रही है।

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कांग्रेस नेता ने भी उठाए सवाल

मामले में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अजय सिंह रघुवंशी ने भी स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना प्रशासनिक सांठगांठ के इस तरह की अनियमितताएं लंबे समय तक जारी रहना संभव नहीं है। रघुवंशी ने अस्पताल को केवल सील करने की कार्रवाई को पर्याप्त नहीं बताया। उन्होंने मांग की कि मामले की विस्तृत जांच हो, अस्पताल को स्थायी रूप से बंद किया जाए और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई की जाए।

स्वास्थ्य विभाग ने क्या कहा?

मामले को लेकर बुरहानपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेंद्र वर्मा ने कहा कि अस्पताल में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत और जानकारी के बाद जांच की गई। जांच में अनियमितताएं सही पाए जाने के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया है।

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By Banwari Metkar

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