बंगाल में चुनावी जंग तेज:'झालमुड़ी और मछली' पर सियासी संग्राम, ममता और बीजेपी आमने-सामने

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच अब सियासत ने नया रंग पकड़ लिया है। इस बार मुद्दा विकास या कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि खान-पान बन गया है। झालमुड़ी और मछली जैसे आम खाने अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुके हैं, जिससे चुनावी माहौल और ज्यादा गरमा गया है।
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'झालमुड़ी और मछली' पर सियासी संग्राम, ममता और बीजेपी आमने-सामने

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के झालमुड़ी खाने को नाटक करार दिया, वहीं बीजेपी ने इसे आम जनता से जुड़ाव बताया। मछली और अंडे पर संभावित पाबंदी को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जिससे चुनावी माहौल में नया मोड़ आ गया है।

झालमुड़ी पर सियासत

झारग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा सड़क किनारे झालमुड़ी खाने की घटना ने सियासी विवाद को जन्म दे दिया है। ममता बनर्जी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चुनावी स्टंट बताया और कहा कि यह जनता को प्रभावित करने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो झालमुड़ी दिखाई गई, वह असली दुकानदार ने नहीं बनाई थी, बल्कि सुरक्षा कर्मियों द्वारा तैयार की गई थी। ममता ने इसे ड्रामा बताते हुए कहा कि इस तरह के कदम केवल वोट हासिल करने के लिए उठाए जाते हैं। वहीं बीजेपी ने इस आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का यह कदम छोटे व्यापारियों और आम लोगों से जुड़ाव का प्रतीक है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को बेवजह तूल दे रहा है।

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मछली-अंडे पर बवाल

टीएमसी ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि अगर राज्य में उसकी सरकार बनी, तो मछली, मांस और अंडे जैसे खाद्य पदार्थों पर पाबंदी लगाई जा सकती है। ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को जनता के बीच जोर-शोर से उठाते हुए कहा कि बंगाल की पहचान उसके खान-पान से है और इस पर रोक लगाने की कोई भी कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर प्रधानमंत्री मछली खाना चाहें, तो वह खुद उनके लिए मछली पकाने को तैयार हैं। इस बयान ने सियासी माहौल को और भी गर्म कर दिया। जवाब में बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने साफ कहा कि पार्टी किसी के खान-पान में दखल नहीं देगी और टीएमसी केवल डर फैलाने की राजनीति कर रही है।

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आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी 

खान-पान के मुद्दे के साथ-साथ अब चुनावी वादों को लेकर भी दोनों दल आमने-सामने हैं। ममता बनर्जी ने अपनी 'लक्ष्मी भंडार' योजना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं को दी जाने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि देशभर की महिलाओं के लिए ऐसी योजनाएं क्यों नहीं लागू की गईं। ममता ने बीजेपी की 'मातृ शक्ति' योजना के तहत 3 हजार रुपये देने के वादे को अविश्वसनीय बताया और इसे चुनावी जुमला करार दिया। इस पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि उनकी योजनाएं वास्तविक हैं और सत्ता में आने के बाद उन्हें लागू किया जाएगा। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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