
पीपुल्स टीम,भोपाल। सरकार सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लोग भी इनका भरपूर उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा कई सरकारी संस्थान भी इसी राह पर चलकर करोड़ों की बिजली बचा रहे हैं। नगर निगम ने पिछले करीब 10 सालों में सोलर एनर्जी को लेकर लगातार काम किया है और अब इसके सकारात्मक परिणाम धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं।
सबसे बड़ा प्रोजेक्ट नीमच में स्थापित सोलर प्लांट है, जिसे करीब 90 करोड़ रुपए की लागत से 20 मेगावाट क्षमता के साथ तैयार किया गया है। इस प्लांट से जलापूर्ति व्यवस्था को ऊर्जा देने की दिशा में काम किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में बिजली खर्च में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) इसी सोलर एनर्जी की बदौलत हर माह तीन लाख की बचत कर रहा है। इसके अलावा भोपाल शहर में सबसे ज्यादा बचत भोपाल एम्स कर रहा है। यहा 1410 किलोवाट से अधिक क्षमता के सोलर पैनल संचालित हैं, जिनसे हर महीने करीब 15 लाख रुपए की बिजली बचत हो रही है। अगर यह आंकड़ा सालाना में देखा जाए तो करीब 1.80 करोड़ की बिजली प्रबंधन बचा रहा है। वहीं कुछ संस्थान ऐेसे हैं जो सभी सुविधाएं होने के बाद लापरवाही कर रहे हैं। उनको ये तक नहीं पता कि उनके यहां कितनी बिजली बन रही है।
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जहां शहर के अन्य सरकारी अस्पताल सौर ऊर्जा के उपयोग में पिछड़ रहे हैं, वहीं एम्स भोपाल इस क्षेत्र में मिसाल बनकर उभरा है। यहां कुल मिलाकर 1410 किलोवाट से अधिक क्षमता के सोलर पैनल संचालित हैं, जिनसे हर महीने करीब 15 लाख रुपए की बिजली बचत हो रही है। एम्स ने रेस्को मॉडल के तहत 600 किलोवाट का प्लांट स्थापित किया है, जबकि 100 किलोवाट का प्लांट संस्थान स्वयं संचालित कर रहा है। हाल ही में 710 किलोवाट क्षमता के दो नए सोलर प्लांट भी जोड़े गए हैं। 176 सोलर लाइट और 5 सोलर हाईमास्ट भी चल रहे हैं। इससे संस्थान को सालाना 1.80 करोड़ रुपए तक की बिजली बचत हो रही है।
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार विस्तार किया जा रहा है। भविष्य में अस्पताल का बड़ा हिस्सा सोलर ऊर्जा पर संचालित करने की योजना है।
डॉ. विकास गुप्ता, अधीक्षक एम्स अस्पताल

जेपी अस्पताल में करीब 10 पहले अस्पताल की ही महिला चिकित्सक द्वारा अपने दिवंगत पति की स्मृति में 25 किलो वाट का सोलर प्लांट लगाया गया था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन इसकी सुरक्षा और रखरखाव में पूरी तरह विफल रहा है। बीते तीन वर्षों में यहां आधा दर्जन से अधिक बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। चोर पैनल के एल्युमीनियम फ्रेम और कॉपर वायर निकालकर ले गए। सुरक्षा की कमी और निगरानी तंत्र की कमजोरी के कारण यह प्लांट अपनी पूरी क्षमता से कभी काम नहीं कर पाया। यहां लगभग सालभर में 3 लाख रुपए की बिजली बन रही है।
जेपी में सिस्टम तो लगा है, लेकिन काम कर रहा है कि नहीं इसकी जानकारी नहीं है। चोरी के मामले भी सामने आए थे। इसकी शिकायत भी पुलिस थाने में की गई है। कितनी बिजली बन रही है, इसकी जानकारी पता करके बताता हूं।
डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ
बीयू में करीब तीन साल पहले 470 किलोवाट के सोलर पैनल लगाए गए थे। प्रबंधन का कहना है कि बीयू को हर माह करीब तीन लाख रुपए की बचत होती है। बीयू के कुलपति सुरेश कुमार जैन ने बताया कि विवि में सोलर पैनल लगने से न केवल बिजली के उत्पादन बल्कि अनेक प्रकार से लाभ मिलता है। प्रत्येक यूनिट का रेट कम होता है, सरचार्ज नहीं लगता और छुट्टियों में होने वाली बिजली की बचत का भी फायदा होता है। 2018 में 200 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल लगवाया था। इसमें प्रतिदिन करीब 600 से 800 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है।
नगर निगम शहर के भीतर अपने दफ्तरों को सोलर एनर्जी से जोड़ रहा है। करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से 1 मेगावाट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। इसके तहत निगम मुख्यालय, जोन और वार्ड कार्यालयों की 2 लाख वर्गफीट छत पर सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। इससे हर साल करीब 70 लाख रुपए की बचत होने का अनुमान है। निगम मुख्यालय हर्षवर्धन कॉम्पलेक्स और आईएसबीटी में 35-35 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं। वीआईपी रोड पर 120 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम लगाया गया है। सोलर प्लांट से प्रतिदिन करीब 2000 यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है, जिसका उपयोग करबला जलशोधन संयंत्र और वीआईपी रोड की स्ट्रीट लाइट में किया जा रहा है।

हमीदिया अस्पताल के नए भवन के निर्माण के दौरान करीब 100 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया गया था,जिसे बाद में बढ़ाकर 750 किलो वॉट कर दिया गया। पीडब्ल्यूडी द्वारा स्थापित इस प्रोजेक्ट को लेकर अधिकारियों का कहना है कि प्लांट अब अस्पताल की जिम्मेदारी है, वहीं अस्पताल प्रबंधन के पास न तो बिजली उत्पादन का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध है और न ही इससे होने वाली बचत का कोई आंकलन किया गया है। हां वह बताते हैं कि प्लांट से बनने वाली बिजली ग्रिड में जाती है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन को ये तक नहीं पता कि इससे कितनी बिजली बन रही है।
सोलर पैनल पीडब्ल्यूडी द्वारा तैयार किए गए थे। दोनों भवनों पर पैनल लगे हैं। हमारे यहां सभी पैनल कार्यशील हैं।
डॉ. सुनीत टंडन, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल
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