8 घंटे 34 मिनट की पहाड़ी जंग!भोपाल की निकिता ने सबसे कठिन ट्रेल रेस में रचा इतिहास, हासिल किया तीसरा स्थान

भोपाल। शहर की धावक निकिता मंडलोई ने देश की सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रेल रनिंग प्रतियोगिताओं में शामिल सिंहगढ़ एपिक ट्रेल 2026 में शानदार सफलता हासिल की है। पश्चिमी घाट रनिंग फेडरेशन की इस मानसून ट्रेल रेस में निकिता ने 42 किलोमीटर कैटेगरी में तीसरा स्थान प्राप्त किया। उन्होंने तय समय 11 घंटे के कटऑफ से पहले ही 8 घंटे 34 मिनट में रेस पूरी कर सभी को प्रभावित किया। कठिन पहाड़ी रास्तों, फिसलन भरे ट्रैक और खराब मौसम के बीच निकिता का प्रदर्शन उनकी कड़ी मेहनत और मजबूत तैयारी का नतीजा रहा।
पहाड़ों पर किया अभ्यास
निकिता मंडलोई ने बताया कि सिंहगढ़ एपिक ट्रेल जैसी कठिन प्रतियोगिता के लिए उन्होंने करीब दो महीने तक लगातार तैयारी की। भोपाल में पहाड़ी ट्रैक और एलिवेशन ट्रेनिंग की सुविधा सीमित होने के कारण उन्होंने अभ्यास के लिए कई जगहों का रुख किया। उन्होंने पचमढ़ी, इंदौर के रालामंडल और उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब की पहाड़ियों में दौड़ लगाकर खुद को तैयार किया। इन जगहों के जंगलों, ऊंचे रास्तों और कठिन ट्रेल्स ने उन्हें प्रतियोगिता के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया।
सामान्य दौड़ से अलग होती है ट्रेल रनिंग
ट्रेल रनिंग को सिर्फ तेज दौड़ने की प्रतियोगिता नहीं माना जाता बल्कि इसमें शरीर की ताकत, संतुलन और धैर्य की भी परीक्षा होती है। इस रेस में धावकों को पहाड़ों, जंगलों, पत्थरीले रास्तों और ऊबड़-खाबड़ ट्रैक से गुजरना पड़ता है। निकिता ने बताया कि कई स्थानों पर चढ़ाई इतनी खड़ी थी कि आगे बढ़ने के लिए रस्सियों का सहारा लेना पड़ा।
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पहले भी कई लंबी रेस कर चुकी हैं पूरी
निकिता मंडलोई इससे पहले 100 किलोमीटर ट्रेल रेस के अलावा कई फुल और हाफ Marathon पूरी कर चुकी हैं। ट्रेल रनिंग प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए धावकों को पहले क्वालिफाई करना पड़ता है और उनके अनुभव को भी देखा जाता है। अपनी लगातार मेहनत और अनुभव के दम पर निकिता ने इस चुनौतीपूर्ण रेस में जगह बनाई और शानदार प्रदर्शन करते हुए भोपाल का नाम रोशन किया।
ऐतिहासिक पहाड़ियों पर दौड़ने का मिला खास अनुभव
सिंहगढ़ एपिक ट्रेल का आयोजन सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला के ऐतिहासिक इलाके ‘लायंस डेन’ में किया जाता है। यह वही क्षेत्र है जहां छत्रपति शिवाजी महाराज के वीर योद्धाओं तानाजी मालुसरे, कान्होजी जेधे और नवजी बलकवड़े ने युद्ध लड़े थे। निकिता ने बताया कि इन ऐतिहासिक पहाड़ियों और घाटियों में दौड़ना उनके लिए केवल एक प्रतियोगिता नहीं थी बल्कि प्रकृति और इतिहास को महसूस करने का अनोखा अनुभव भी था। रेस पूरी करने के बाद उन्हें पारंपरिक मराठी फेटा पहनाकर ट्रॉफी से सम्मानित किया गया।
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भोपाल की नेहा ने भी दिखाया दम
इस प्रतियोगिता में भोपाल की नेहा मूलचंदानी ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने 30 किलोमीटर कैटेगरी में दौड़ लगाई। निकिता और नेहा साथ में अभ्यास करती हैं और लगातार ट्रेल रनिंग प्रतियोगिताओं में शहर का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। निकिता का मानना है कि रोड मैराथन में जहां गति सबसे अहम होती है, वहीं ट्रेल रनिंग में हर कदम पर नई चुनौती सामने आती है। उन्होंने कहा कि भारत में एंड्योरेंस ट्रेल रेसिंग की लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ रही है और आने वाले समय में ज्यादा युवा इससे जुड़ेंगे।











