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Mother's Day Special :सलाखों के साये में पले मासूम ने क्लास में पाया प्रथम स्थान, मां की आंखों में जगा सपना

ग्वालियर की सेंट्रल जेल में बंद एक महिला बंदी के आंखों में उस समय चमक दौड़ गई जब उसे पता चला कि नर्सरी की परीक्षा में उसका बेटा फर्स्ट आया है। मां ने जेल की चारदीवारी में ही बच्चे को शिक्षा के लिए तैयार किया।
सलाखों के साये में पले मासूम ने क्लास में पाया प्रथम स्थान, मां की आंखों में जगा सपना
प्रतीकात्मक चित्र

शुशांत पांडे, ग्वालियर। मां की ममता हर हाल में अपने बच्चे के लिए दुनिया को बेहतर बनाने की कोशिश करती है। फिर चाहे वह खुद कितनी ही मुश्किलों में क्यों न हो। ग्वालियर केंद्रीय जेल में ऐसी ही एक हकीकत रोजाना जेल की चारदीवारी से शिक्षा प्राप्त करने बाहर कदम रखती है और मां की गोद में पल रहे सपने को सच करने में प्रयासरत है। जिसने शिक्षा की पहली सीढ़ी में प्रथम स्थान पाया तो मां की आंखों में उसके उज्ज्वल भविष्य का सपना जाग उठा।

जेल से ही स्कूल जाता है बच्चा

बता दें कि कुछ साल पहले जाग्रति (परिवर्तित नाम) नाम की महिला को हत्या का आरोपी मानते हुए जेल भेजा गया था। इस दौरान उसने कैद के दौरान मासूम बच्चे को जन्म दिया। आज वहीं मासूम जेल ऊंची दीवारों के बीच पल-बढ़ रहा है और यहीं से स्कूल जाता है। खास बात यह है कि उसने शिक्षा की पहली सीढ़ी में प्रथम स्थान प्राप्त किया तो मां भले ही सलाखों के पीछे हों, लेकिन उसकी ममता अब बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के साथ जीने की सबसे बड़ी वजह बन गई है। ऐसे में जेल प्रशासन भी बच्चे की पढ़ाई और देखभाल का विशेष ध्यान रख रहा है। अधिकारियों के मुताबिक पीड़िता बताती है कि शासन की इस रियायत से उसके बच्चे का भविष्य तो संवर ही रहा है, साथ में कुछ सपने भी सच होते दिखाई देते हैं, जो शिक्षा और अच्छे आचरण के बीच उज्ज्वल भविष्य की राह दिखाते हैं।

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हत्या में बंद हुई थी मां, कस्टडी में दिया बेटे को जन्म

बता दें कि जेल की दीवारों के भीतर रहकर भी अपने बच्चे का भविष्य संवारने में जुटी मां जागृति के ऊपर हत्या का प्रकरण दर्ज है। उस दौरान महिला ने शिवपुरी जेल में कस्टडी के दौरान मासूम बच्चे को जन्म दिया, बाद में वह केन्द्रीय जेल ग्वालियर में शिफ्ट हुई। अब इसी जेल की चारदीवारी से बाहर निकलकर मासूम ने शिक्षा की पहली सीढ़ी नर्सरी में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

अधिकारियों के सहयोग से हुआ संभव

वैसे तो जेल का नाम तक खराब है, लेकिन जेल अधिकारियों की सकारात्मक मंशा और एक निजी स्कूल के संचालक की मदद से जेल में मां के साथ रहने वाले ऐसे मासूम बच्चों को शिक्षा प्राप्त हो रही है। सूत्र बताते हैं कि स्कूल संचालक द्वारा बच्चों के लिए निजी वैन तो अधिकारियों द्वारा स्वयं के वहन से उन्हें शैक्षणिक सामग्री प्रदान कराई जाती है। जिससे बच्चों का उज्ज्वल भविष्य तैयार हो रहा है।

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बच्चों का मानसिक विकास हो रहा

शासन से प्राप्त रियायतों के बीच महिला कैदी के बच्चे बाहर शिक्षा प्राप्त करने जाते हैं, जिससे उनका आम वातावरण के बीच शिक्षा और मानसिक विकास होता है।

विदित सिरवैया, जेल अधीक्षक

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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