Peoples Update Special :परमिशन नहीं मिलने से मप्र के 6 जिलों को पांच साल से ‘हर घर जल’ का इंतजार

प्रदेश के 6 जिलों में हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन तो डाली गईं पर उनमें अब तक पानी नहीं पहुंच पाया। इस वजह से लोगों को स्वच्छ जल नहीं मिल पा रहा है। कई गांवों के रहवासी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।
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परमिशन नहीं मिलने से मप्र के 6 जिलों को पांच साल से ‘हर घर जल’ का इंतजार

अशोक गौतम, भोपाल। सिंगरौली जिले के बंधावा और बागदरा गांव के ग्रामीण आज भी गर्मी के दिनों में पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीण कमलू सिंह और अंतर कोल बताते हैं कि गांव में दो साल पहले पाइप लाइन डाल दी गई थी, लेकिन अब तक पानी सप्लाई शुरू नहीं हुई। हर साल अधिकारियों से सिर्फ आश्वासन मिलता है कि अगले वर्ष नलों में पानी आएगा। ऐसी स्थिति सिर्फ सिंगरौली में नहीं है बल्कि सतना, छतरपुर, मऊगंज समेत 6 जिलों में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत 40 फीसदी काम पांच साल से अधूरे हैं। प्रदेश में अब तक सिर्फ 60 फीसदी घरों तक ही नियमित पेयजल आपूर्ति हो पाई है। विभाग का दावा 75 फीसदी घरों में नल कनेक्शन देने का है।

समय पर काम पूरा नहीं होने के प्रमुख कारण

वन, पर्यावरण, वाइल्ड लाइफ, राजस्व, रोड ट्रांसपोर्ट, नेशनल हाईवे और जल संसाधन विभागों से समय पर अनुमति नहीं मिलना।

जेजेएम 2.0 में जुड़ेंगे छूटे गांव

वर्ष 2018-19 के सर्वे में जो गांव और मजरे-टोले छूट गए थे, उन्हें अब जल जीवन मिशन 2.0 (जेजेएम) में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों तक वर्ष 2028 तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

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दो जिलों ने हासिल किया 100 फीसदी लक्ष्य 

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अब तक केवल निवाड़ी और बुरहानपुर जिलों में सौ फीसदी घरों तक पानी पहुंचाने का दावा कर रहा है। इन जिलों में एकल नल जल योजनाओं के माध्यम से काम किया गया, जिससे परियोजनाएं तेजी से पूरी हो सकीं। इसके विपरीत समूह जल योजना वाले जिलों में कार्य जटिल और धीमा है। इंदौर और भोपाल जैसे बड़े जिले भी अभी तक लक्ष्य हासिल नहीं कर सके हैं। भोपाल जिले में करीब 97 हजार घरों में से 80 हजार घरों तक ही नल से जल पहुंच पाया है। विभाग का अनुमान है कि शेष 51 जिलों में परियोजनाएं पूरी करने में अभी करीब तीन वर्ष और लग सकते हैं।

चार साल पहले पाइप लाइन डाली

गांव में चार साल पहले पाइप लाइन डाल दी गई थी, लेकिन अब तक पानी की टंकी नहीं बनी और घरों में कनेक्शन अधूरे पड़े हैं। ग्रामीणों को अब भी हैंडपंप और कुओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

अश्वनी सिंह, निवासी ग्राम कोठार, जिला मऊगंज

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अनुमतियों में देर के कारण काम प्रभावित

प्रदेश में करीब 80 फीसदी घरों तक पानी पहुंच चुका है। वन, वाइल्ड लाइफ और हाईवे से संबंधित अनुमतियों में देरी के कारण कुछ जिलों में काम प्रभावित हुआ। लेकिन अब स्वीकृति मिलने की प्रक्रिया तेज हुई है। मार्च 2027 तक सभी घरों तक पाइप लाइन पहुंचाने का लक्ष्य है।

बीएस चौधरी, कोलसानी एमडी, मप्र जल जीवन मिशन मर्यादित

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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