बाबड़िया भाऊ में निकली डोल यात्रा, सुसज्जित विमान में भगवान श्रीकृष्ण ने किया पूरे गांव का भ्रमण

सिवनी मालवा। तहसील के ग्राम बाबड़िया भाऊ में सोमवार को डोल ग्यारस के अवसर पर डोल यात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को सुसज्जित विमान में विराजमान कर पूरे गांव का भ्रमण कराया गया। शाम करीब 5 बजे शुरू हुई यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भजन-कीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गांव का माहौल भक्तिमय हो गया। डोल यात्रा के दौरान गांव की गलियों और चौक-चौराहों पर श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आई। बच्चे, युवा और बुजुर्ग भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में झूमते दिखाई दिए। श्रद्धालु लगातार भजन-कीर्तन करते हुए यात्रा के साथ चलते रहे और जगह-जगह भगवान के जयकारे लगाए गए।
जगह-जगह हुआ भगवान श्रीकृष्ण का स्वागत
भगवान श्रीकृष्ण के सुसज्जित विमान के गांव में पहुंचने पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। लोगों ने पुष्प वर्षा कर भगवान के दर्शन किए। महिलाएं अपने घरों से दीपक और पूजा की थाल लेकर बाहर आईं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। गांव के प्रमुख चौक पर महिलाओं ने भगवान श्रीकृष्ण की आरती उतारी। इस दौरान पूरा वातावरण भक्ति और उत्साह से भर गया। डोल यात्रा में शामिल ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से भगवान की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की।
डोल ग्यारस से जुड़ी है धार्मिक मान्यता
डोल ग्यारस को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन माता यशोदा ने बालक श्रीकृष्ण को नए वस्त्र पहनाकर सूर्यदेव के दर्शन कराए थे। इसी धार्मिक परंपरा से डोल यात्रा की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, बाबड़िया भाऊ में डोल यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामूहिक श्रद्धा और सामाजिक एकता का अवसर भी है। इस दौरान गांव के अलग-अलग परिवार और वर्ग के लोग एक साथ शामिल होते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को स्थानीय धार्मिक परंपराओं और संस्कृति से जोड़ने का अवसर भी मिलता है।
भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश
पंडित ध्रुव शर्मा ने बताया कि डोल ग्यारस भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। डोल यात्रा के माध्यम से ग्रामीण भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन ग्रामीणों को एक साथ जोड़ने का काम करते हैं। इससे आपसी भाईचारा, सामाजिक एकता और धार्मिक परंपराओं के प्रति जुड़ाव मजबूत होता है। बाबड़िया भाऊ में आयोजित डोल यात्रा में भी ग्रामीणों ने उत्साह के साथ भाग लेकर सामूहिक श्रद्धा और धार्मिक आस्था का परिचय दिया।




















