नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
इस स्थिति का असर भारत में कुकिंग गैस यानी LPG सप्लाई पर भी पड़ने लगा है। कई राज्यों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे भोजनालयों को मिलने वाले 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति सीमित कर दी गई है।
सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पहले घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के सिलेंडर की सप्लाई सुनिश्चित करने का फैसला लिया है। हालांकि इससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और कई उद्योगों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
भारत के कई राज्यों में कमर्शियल LPG सिलेंडरों की सप्लाई अस्थायी रूप से रोक दी गई है। इससे होटल-रेस्टोरेंट उद्योग और छोटे व्यवसायों पर सीधा असर पड़ा है।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा असर
इन राज्यों में डिस्ट्रीब्यूटर्स को निर्देश दिए गए हैं कि, कमर्शियल गैस सिलेंडर केवल अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को ही उपलब्ध कराए जाएं। होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन और अन्य व्यवसायिक संस्थानों को फिलहाल सिलेंडर नहीं दिया जा रहा है।
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देश के कई बड़े शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कमी देखी जा रही है। खासकर-
इन शहरों में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने गैस की कमी को लेकर चिंता जताई है। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो हजारों रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत आ सकती है।
इंडिया होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय शेट्टी ने कहा कि गैस की कमी तेजी से फैल रही है और अगर स्थिति नहीं सुधरी तो कुछ ही दिनों में कई शहरों में रेस्टोरेंट बंद करने पड़ सकते हैं।
सरकार ने रिफाइनरी और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिया है कि फिलहाल घरेलू गैस उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाए।
सरकार ने गैस की संभावित कमी को देखते हुए घरेलू LPG सिलेंडर बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया है। पहले एक सिलेंडर डिलीवरी के बाद दूसरा सिलेंडर 21 दिन में बुक किया जा सकता था। अब इसे बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।
इसका उद्देश्य है-
साथ ही सिलेंडर डिलीवरी के समय OTP और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी अनिवार्य कर दिया गया है।
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शहर |
नए दाम |
पुराने दाम |
अंतर |
|
दिल्ली |
₹1883 |
₹1768.50 |
₹114.50 |
|
कोलकाता |
₹1990 |
₹1875.50 |
₹114.50 |
|
मुंबई |
₹1835 |
₹1720.50 |
₹114.50 |
|
चेन्नई |
₹2043.50 |
₹1929 |
₹114.50 |
|
भोपाल |
₹1910.50 |
₹1796 |
₹114.50 |
|
जयपुर |
₹1990 |
₹1875.50 |
₹114.50 |
|
पटना |
₹2150 |
₹2035.50 |
₹114.50 |
|
रायपुर |
₹2109.50 |
₹1995 |
₹114.50 |
सरकार ने हाल ही में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ा दिए हैं।
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शहर |
नया दाम |
पुराना दाम |
अंतर |
|
दिल्ली |
₹913 |
₹853 |
₹60 |
|
कोलकाता |
₹939 |
₹879 |
₹60 |
|
मुंबई |
₹912.50 |
₹852.50 |
₹60 |
|
चेन्नई |
₹928.50 |
₹868.50 |
₹60 |
|
भोपाल |
₹918.50 |
₹858.50 |
₹60 |
|
जयपुर |
₹916.50 |
₹856.50 |
₹60 |
|
पटना |
₹1011 |
₹951 |
₹60 |
|
रायपुर |
₹984 |
₹824 |
₹60 |
नई कीमतें 7 मार्च से लागू हो चुकी हैं।
भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है।
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आंकड़ा |
विवरण |
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कुल सालाना खपत |
33.15 मिलियन मीट्रिक टन |
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आयात |
लगभग 67% |
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कुल उपभोक्ता |
33.2 करोड़ |
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मिडिल ईस्ट से आयात |
85-90% |
यानी भारत की LPG सप्लाई का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट पर निर्भर है। इसी वजह से वहां के तनाव का असर सीधे भारत पर पड़ता है।
1. होर्मुज स्ट्रेट संकट
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है।
लंबाई: लगभग 167 किमी
दुनिया के कुल तेल का 20% यहीं से गुजरता है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण कई जहाज इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं। इससे सप्लाई प्रभावित हुई है।
भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से मंगाता है।
2. कतर के LNG प्लांट पर असर
ईरान के ड्रोन हमलों के बाद कतर ने अपने कुछ LNG प्लांट का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है। भारत अपनी LNG जरूरत का लगभग 40% कतर से आयात करता है। इससे गैस सप्लाई में और कमी आ गई है।
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गैस संकट का असर केवल होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर तक सीमित नहीं है। गुजरात के मोरबी में टाइल और सिरेमिक उद्योग भी गैस की कमी से प्रभावित हो रहे हैं। यह क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा सिरेमिक हब माना जाता है और हजारों फैक्ट्रियां गैस पर निर्भर हैं।
स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीनों ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के अधिकारियों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है। इस कमेटी का काम है-
सरकार ने संभावित गैस संकट को देखते हुए नए सप्लायर्स की तलाश शुरू कर दी है।
संभावित देश-
इन देशों से गैस आयात बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
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सरकार ने रिफाइनरी कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे LPG उत्पादन बढ़ाएं। इसके लिए प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग घरेलू सिलेंडरों के लिए ज्यादा किया जाएगा। कमर्शियल गैस उत्पादन अस्थायी रूप से घटाया जाएगा।
इंडियन ऑयल के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और वैकल्पिक सप्लाई के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो भारत में गैस की कीमतों और सप्लाई दोनों पर दबाव बना रह सकता है।