इस्लामाबाद। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल का असर अब दक्षिण एशिया तक पहुंच गया है। खासकर पाकिस्तान इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल हो गया है। खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे पाकिस्तान में फ्यूल संकट गहराता जा रहा है।
तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। इन फैसलों का असर शिक्षा, सरकारी दफ्तरों और सरकारी खर्चों पर भी साफ दिखाई देगा।
पाकिस्तान में बढ़ते तेल संकट की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में आई बाधाएं हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण इस मार्ग से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है। इसलिए सप्लाई प्रभावित होते ही देश में फ्यूल संकट गहराने लगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान अपनी तेल और गैस की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर पाकिस्तान की घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
ऊर्जा संकट को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं। इनका उद्देश्य ईंधन की खपत कम करना और सरकारी खर्चों को नियंत्रित करना है।
सरकार के प्रमुख फैसले
सरकार का मानना है कि, इन फैसलों से ट्रांसपोर्ट और सरकारी वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की खपत कम होगी।
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फ्यूल संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार ने सिर्फ ईंधन खपत कम करने के ही फैसले नहीं लिए हैं, बल्कि सरकारी खर्चों में भी बड़ी कटौती की घोषणा की है। सरकार ने मंत्रियों और अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर रोक लगा दी है। इसके अलावा कई अन्य फैसले भी किए गए हैं।
खर्च कम करने के लिए उठाए गए कदम
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि, ये फैसले आसान नहीं थे, लेकिन मौजूदा हालात में जरूरी हैं।
ऊर्जा संकट के बीच पाकिस्तान सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी करनी पड़ी है। सरकार ने पेट्रोल की कीमत में करीब 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। यह देश के इतिहास में सबसे बड़ी बढ़ोतरी बताई जा रही है।
पाकिस्तान में नई कीमतें
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ईंधन |
पुरानी कीमत |
नई कीमत |
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पेट्रोल |
लगभग 280 रुपए/लीटर |
335.86 रुपए/लीटर |
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हाई स्पीड डीजल |
लगभग 280 रुपए/लीटर |
321.17 रुपए/लीटर |
कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है।
कीमतों में बढ़ोतरी की खबर सामने आते ही पाकिस्तान के कई बड़े शहरों में पेट्रोल पंपों पर भीड़ उमड़ पड़ी। लाहौर, कराची और इस्लामाबाद जैसे शहरों में लोग घंटों लाइन में खड़े दिखाई दिए। कई लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में तेल की कमी और ज्यादा बढ़ सकती है, इसलिए वे पहले से ही ज्यादा ईंधन जमा करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार ने लोगों से घबराकर तेल जमा न करने की अपील भी की है।
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि, ऊर्जा संकट तेजी से बढ़ रहा है और इससे निपटने के लिए कड़े फैसले लेना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि, सरकार आगे कीमतों में और बढ़ोतरी से बचना चाहती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण कुछ फैसले लेना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि, पाकिस्तान सरकार क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास कर रही है।
मिडिल ईस्ट में जारी संकट का असर सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि दूसरे दक्षिण एशियाई देशों पर भी पड़ रहा है। बांग्लादेश सरकार को भी ईंधन की बिक्री पर सीमाएं लागू करनी पड़ी हैं।
बांग्लादेश में नई लिमिट
सरकार ने हर पेट्रोल पंप पर रसीद अनिवार्य कर दी है ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके।
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मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर नहीं जाती, तब तक भारत में ईंधन कीमतें स्थिर रह सकती हैं। वर्तमान अनुमान के मुताबिक कच्चा तेल करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रह सकता है।