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पेट्रोल महंगा, स्कूल बंद…मिडिल ईस्ट जंग से पाकिस्तान में संकट, सरकार ने लागू किए सख्त नियम

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट का असर अब पाकिस्तान पर साफ दिख रहा है। तेल की कीमतें 100 डॉलर पार होने से देश में फ्यूल संकट गहरा गया है। पाकिस्तान सरकार ने स्कूल बंद, दफ्तर चार दिन, वर्क फ्रॉम होम और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी जैसे कई सख्त फैसले लागू किए हैं।
मिडिल ईस्ट जंग से पाकिस्तान में संकट, सरकार ने लागू किए सख्त नियम
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इस्लामाबाद। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल का असर अब दक्षिण एशिया तक पहुंच गया है। खासकर पाकिस्तान इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल हो गया है। खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे पाकिस्तान में फ्यूल संकट गहराता जा रहा है।

    तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। इन फैसलों का असर शिक्षा, सरकारी दफ्तरों और सरकारी खर्चों पर भी साफ दिखाई देगा।

    पाकिस्तान में क्यों बढ़ा फ्यूल संकट?

    पाकिस्तान में बढ़ते तेल संकट की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में आई बाधाएं हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है।

    अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण इस मार्ग से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है। इसलिए सप्लाई प्रभावित होते ही देश में फ्यूल संकट गहराने लगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान अपनी तेल और गैस की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर पाकिस्तान की घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

    पाकिस्तान सरकार के बड़े फैसले

    ऊर्जा संकट को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं। इनका उद्देश्य ईंधन की खपत कम करना और सरकारी खर्चों को नियंत्रित करना है।

    सरकार के प्रमुख फैसले

    • देशभर में स्कूल दो हफ्तों के लिए बंद कर दिए गए हैं।
    • कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई ऑनलाइन मोड में कर दी जाएगी।
    • सरकारी दफ्तर सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही खुलेंगे।
    • सरकारी विभागों के 50% कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे।
    • अगले दो महीनों तक सरकारी विभागों को मिलने वाले फ्यूल में 50% कटौती की जाएगी।

    सरकार का मानना है कि, इन फैसलों से ट्रांसपोर्ट और सरकारी वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की खपत कम होगी।

    यह भी पढ़ें: होर्मुज पर घमासान! ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी- तेल की सप्लाई रुकी तो तबाही तय, 20 गुना बड़ा अटैक करेंगे

    सरकारी खर्चों में भी कटौती

    फ्यूल संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार ने सिर्फ ईंधन खपत कम करने के ही फैसले नहीं लिए हैं, बल्कि सरकारी खर्चों में भी बड़ी कटौती की घोषणा की है। सरकार ने मंत्रियों और अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर रोक लगा दी है। इसके अलावा कई अन्य फैसले भी किए गए हैं।

    खर्च कम करने के लिए उठाए गए कदम

    • मंत्रियों और सलाहकारों के विदेश दौरे रोक दिए गए।
    • सांसदों की सैलरी में 25% कटौती।
    • सरकारी विभागों को 20% खर्च कम करने का आदेश।
    • नए उपकरणों की खरीद पर अस्थायी रोक।
    • सरकारी गाड़ियों के ईंधन भत्ते में 50% कटौती।
    • 60% सरकारी वाहन नहीं चलेंगे।

    प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि, ये फैसले आसान नहीं थे, लेकिन मौजूदा हालात में जरूरी हैं।

    पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी

    ऊर्जा संकट के बीच पाकिस्तान सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी करनी पड़ी है। सरकार ने पेट्रोल की कीमत में करीब 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। यह देश के इतिहास में सबसे बड़ी बढ़ोतरी बताई जा रही है।

    पाकिस्तान में नई कीमतें

    ईंधन

    पुरानी कीमत

    नई कीमत

    पेट्रोल

    लगभग 280 रुपए/लीटर

    335.86 रुपए/लीटर

    हाई स्पीड डीजल

    लगभग 280 रुपए/लीटर

    321.17 रुपए/लीटर

    कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है।

    पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी लाइनें

    कीमतों में बढ़ोतरी की खबर सामने आते ही पाकिस्तान के कई बड़े शहरों में पेट्रोल पंपों पर भीड़ उमड़ पड़ी। लाहौर, कराची और इस्लामाबाद जैसे शहरों में लोग घंटों लाइन में खड़े दिखाई दिए। कई लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में तेल की कमी और ज्यादा बढ़ सकती है, इसलिए वे पहले से ही ज्यादा ईंधन जमा करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार ने लोगों से घबराकर तेल जमा न करने की अपील भी की है।

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    प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बयान

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि, ऊर्जा संकट तेजी से बढ़ रहा है और इससे निपटने के लिए कड़े फैसले लेना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि, सरकार आगे कीमतों में और बढ़ोतरी से बचना चाहती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण कुछ फैसले लेना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि, पाकिस्तान सरकार क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास कर रही है।

    बांग्लादेश में भी लागू हुई ईंधन राशनिंग

    मिडिल ईस्ट में जारी संकट का असर सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि दूसरे दक्षिण एशियाई देशों पर भी पड़ रहा है। बांग्लादेश सरकार को भी ईंधन की बिक्री पर सीमाएं लागू करनी पड़ी हैं।

    बांग्लादेश में नई लिमिट

    • बाइक के लिए दिन में सिर्फ 2 लीटर पेट्रोल।
    • निजी कारों के लिए 10 लीटर तक की सीमा।
    • बस और ट्रकों के लिए 70 से 220 लीटर।

    सरकार ने हर पेट्रोल पंप पर रसीद अनिवार्य कर दी है ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके।

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    भारत पर क्या होगा असर?

    मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर नहीं जाती, तब तक भारत में ईंधन कीमतें स्थिर रह सकती हैं। वर्तमान अनुमान के मुताबिक कच्चा तेल करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रह सकता है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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