मिडिल ईस्ट में चल रहा अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस संघर्ष को शुरू हुए 17 दिन से ज्यादा हो चुके हैं और मंगलवार को जंग 18वें दिन में प्रवेश कर गई। युद्ध थमने के बजाय और तेज होता नजर आ रहा है। एक ओर ईरान लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है, वहीं अमेरिका और इजरायल ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। इस संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया पर दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की कीमतों को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ रही है, जबकि लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं।
इसी बीच इराक की राजधानी बगदाद से बड़ी खबर सामने आई है। यहां स्थित अमेरिकी दूतावास के पास ड्रोन हमला हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विस्फोटक से भरा ड्रोन दूतावास के पास गिरा, जिसके बाद इलाके में धमाके और धुआं उठता देखा गया।
हालांकि, एयर डिफेंस सिस्टम ने इस हमले को काफी हद तक नाकाम कर दिया। बताया जा रहा है कि हमले से कुछ घंटे पहले ही दूतावास ने इराक में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षा चेतावनी जारी की थी।
बगदाद के जबारिया इलाके में भी दो हवाई हमले किए गए। यह इलाका पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज के मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल होने वाले भवन के आसपास बताया जा रहा है। इन हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इराक भी इस संघर्ष के प्रभाव में आता दिख रहा है।
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ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने पहली बार अपनी अत्याधुनिक सेज्जिल बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है। इस मिसाइल की रेंज लगभग 2000 से 2500 किलोमीटर तक बताई जाती है और यह हाई एल्टीट्यूड पर दिशा बदलकर डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि, इन मिसाइलों को इजरायल के सैन्य ठिकानों की ओर दागा गया।
दूसरी ओर अमेरिका और इजरायल ने भी ईरान पर हमले तेज कर दिए हैं। इजरायली सेना ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित हमदान, इस्फहान और पश्चिमी इलाकों में कई एयरस्ट्राइक किए हैं। इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, इंडस्ट्रियल जोन और ड्रोन-मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि, अमेरिका ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता का बड़ा हिस्सा खत्म कर दिया है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका ने हजारों सैन्य लक्ष्यों को नष्ट किया है और ईरान की नौसेना को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका की निगरानी है और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह रास्ता बेहद अहम है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए जब अमेरिका ने सहयोगी देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की, तो कई देशों ने इससे इनकार कर दिया। इस पर ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कई पश्चिमी सहयोगी देश अमेरिका के दशकों पुराने समर्थन को भूल गए हैं।
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मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच सबसे ज्यादा चर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर हो रही है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर यहां स्थिति और बिगड़ती है तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत भी अपनी ऊर्जा सप्लाई को लेकर सतर्क हो गया है। भारत के दो बड़े जहाज हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरात के कांडला और मुंद्रा पोर्ट पहुंचने वाले हैं। ‘नंदा देवी’ नाम का जहाज करीब 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर कांडला पोर्ट पहुंच रहा है, जबकि ‘जग लाडकी’ नाम का जहाज करीब 81 हजार टन कच्चा तेल लेकर मुंद्रा पोर्ट पहुंचने वाला है। इसके अलावा भारतीय जहाज ‘शिवालिक’ पहले ही मुंद्रा पोर्ट पर LPG लेकर पहुंच चुका है।
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत ने होर्मुज स्ट्रेट के पास अपने दो युद्धपोत तैनात किए हैं। इनका उद्देश्य तेल और गैस लेकर भारत आने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करना है। जरूरत पड़ने पर भारतीय नौसेना इन जहाजों को हर तरह की सहायता भी उपलब्ध कराएगी।
ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। दुबई के पास भी ड्रोन हमला हुआ, जिससे एक फ्यूल टैंक में आग लग गई। सुरक्षा कारणों से दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए उड़ानें रोक दी गईं और एयरपोर्ट के आसपास के रास्ते भी बंद कर दिए गए।
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ईरान के हमलों के बीच संयुक्त अरब अमीरात ने एहतियात के तौर पर अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। हालांकि बाद में हालात सामान्य होने पर एयरस्पेस फिर से खोल दिया गया। यूएई का कहना है कि यह कदम यात्रियों और विमान कर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया था।
बहरीन की सेना ने दावा किया है कि, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने 350 मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया है। इनमें 129 मिसाइलें और 221 ड्रोन शामिल हैं। यह आंकड़ा मिडिल ईस्ट में जारी हमलों की गंभीरता को दर्शाता है।
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कुवैत के गृह मंत्रालय ने बताया कि उसने हिजबुल्लाह से जुड़े 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 14 कुवैती और 2 लेबनानी नागरिक शामिल हैं। इन लोगों पर देश में तोड़फोड़ की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।
कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन के नेताओं ने लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह से हथियार डालने की अपील की है। इन देशों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में शांति तभी संभव है जब सभी पक्ष हिंसा को रोकें।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि, ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि, उनका देश दबाव में आकर झुकेगा नहीं।
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इस संघर्ष में मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर आम नागरिक हैं। इजरायल में भी 25 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि अमेरिका के करीब 20 सैनिक मारे गए हैं। इस युद्ध के कारण करीब 40 लाख लोग बेघर हो चुके हैं और कई इलाकों में खाद्य संकट गहराता जा रहा है।
इस संघर्ष का असर लेबनान और गाजा तक पहुंच गया है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में कई लोग घायल हो गए हैं। वहीं गाजा में भी हमलों के कारण नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।