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Myanmar Politics:बाहर आईं आंग सान सू , सजा में बदलाव, जेल से हटाया, अब हाउस अरेस्ट में काटेंगी सजा

म्यांमार की पूर्व नेता आंग सान सू की को जेल से निकालकर अब हाउस अरेस्ट में रखा गया है। सैन्य सरकार ने यह फैसला उनकी सजा के बाकी हिस्से को नजरबंदी में पूरा करने के लिए लिया है।
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बाहर आईं आंग सान सू , सजा में बदलाव, जेल से हटाया, अब हाउस अरेस्ट में काटेंगी सजा
Aung San Suu Kyi

म्यांमार। पूर्व नेता आंग सान सू की को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। देश की सैन्य सरकार ने उन्हें जेल से निकालकर अब हाउस अरेस्ट में रखने का फैसला किया है। यह कदम सरकारी मीडिया के जरिए सामने आया है और इसे देश की राजनीतिक स्थिति में एक अहम बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सू की पिछले कई वर्षों से जेल में बंद थीं और अब उनकी सजा का बाकी हिस्सा घर में नजरबंदी के रूप में पूरा होगा।

जेल से हाउस अरेस्ट में शिफ्ट

आंग सान सू की को 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद गिरफ्तार किया गया था, जब उनकी चुनी हुई सरकार को हटा दिया गया था। इसके बाद से वह लगातार हिरासत में थीं और अलग-अलग मामलों में उन्हें लंबी सजा भी सुनाई गई थी। अब सैन्य सरकार ने फैसला लिया है कि उन्हें जेल में रखने की बजाय हाउस अरेस्ट में रखा जाएगा। हालांकि यह साफ नहीं किया गया है कि उन्हें किस स्थान पर रखा गया है लेकिन उनकी नई तस्वीर जारी की गई है जिसमें वह एक साधारण माहौल में बैठी नजर आ रही हैं।

उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए फैसला

सू की की उम्र अब करीब 80 साल हो चुकी है और उनकी सेहत को देखते हुए पहले भी उनकी सजा में कुछ राहत दी गई थी। अलग अलग मामलों में उन्हें कुल 33 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में घटाकर करीब 18 साल कर दिया गया। अब बाकी सजा उन्हें जेल की बजाय हाउस अरेस्ट में पूरी करनी होगी। इससे साफ है कि सैन्य सरकार उनके मामले में धीरे धीरे नरमी दिखा रही है लेकिन उन्हें पूरी तरह आजादी नहीं दी गई है।

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म्यांमार में राजनीतिक संकट

2021 के तख्तापलट के बाद म्यांमार में हालात लगातार अस्थिर बने हुए हैं। देश में कई जगहों पर संघर्ष की स्थिति है और राजनीतिक तनाव भी बना हुआ है। आंग सान सू की लंबे समय से लोकतंत्र की प्रतीक मानी जाती रही हैं, लेकिन सैन्य शासन के बाद उनकी भूमिका सीमित कर दी गई है। उनके समर्थक लगातार उनकी रिहाई की मांग करते रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाया जाता रहा है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव और मानवीय पहलू

सू की को हाउस अरेस्ट में भेजे जाने के फैसले को अंतरराष्ट्रीय दबाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। कई मानवाधिकार संगठन और संयुक्त राष्ट्र लगातार म्यांमार से राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे थे। इस कदम को कुछ हद तक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है लेकिन अब भी पूर्ण रिहाई और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली की मांग जारी है।

सू का संघर्ष

आंग सान सू की म्यांमार के स्वतंत्रता आंदोलन के नेता आंग सान की बेटी हैं। उन्होंने लंबे समय तक लोकतंत्र की लड़ाई लड़ी और कई बार जेल और नजरबंदी का सामना किया। 1988 के बाद वह सक्रिय राजनीति में आईं और देश की प्रमुख नेता बनीं। सैन्य शासन के कारण उनका राजनीतिक सफर बार-बार बाधित होता रहा। उनकी कहानी म्यांमार के राजनीतिक संघर्ष का अहम हिस्सा रही है।

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Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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