BILASPUR:ED का बड़ा एक्शन, सर्राफा कारोबारी विकास अग्रवाल के ठिकाने पर छापा, हीरे नकदी बरामद

छत्तीसगढ़। बिलासपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शराब घोटाले की जांच के तहत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सर्राफा कारोबारी और फरार आरोपी विकास अग्रवाल से जुड़े ठिकानों पर की गई इस छापेमारी में जांच एजेंसी को भारी मात्रा में अवैध संपत्ति मिली है। टीम ने विवेक अग्रवाल के घर पर दबिश देकर करीब 17 किलो सोना, हीरों के कीमती हार और बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की है। इस कार्रवाई के बाद मामले में कई नए खुलासों की संभावना बढ़ गई है। ED अब इस जब्त संपत्ति के स्रोत और घोटाले से उसके संबंधों की गहराई से जांच कर रही है, जबकि मुख्य आरोपी विकास अग्रवाल की तलाश लगातार जारी है।
विवेक अग्रवाल के ठिकानों पर छापा
ED ने सुबह कारोबारी विवेक अग्रवाल से जुड़े ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की। टीम सबसे पहले उनके रायपुर स्थित मैग्नेटो मॉल के पास मौजूद आवास पर पहुंची, जहां अचानक हुई छापेमारी से इलाके में हलचल मच गई। सुरक्षा के लिहाज से परिसर को पूरी तरह घेर लिया गया और CRPF जवानों को तैनात किया गया ताकि जांच बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।
घर और दुकान दोनों जगह एक साथ जांच
ED की टीम ने सिर्फ घर ही नहीं बल्कि विवेक अग्रवाल के सदर बाजार स्थित ज्वेलरी शोरूम श्रीराम ज्वेलर्स पर भी एक साथ दबिश दी। यहां अधिकारियों ने दुकान के स्टॉक रजिस्टर, लेन देन के रिकॉर्ड और पिछले कई वर्षों के निवेश से जुड़े कागजातों की बारीकी से जांच की। घर के अंदर भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, मोबाइल फोन और दस्तावेजों को खंगाला गया, जिससे घोटाले से जुड़े वित्तीय लेन देन की कड़ियां जोड़ी जा सकें।
जांच में नए लिंक सामने आए
जांच एजेंसियों के मुताबिक यह मामला सिर्फ एक कारोबारी तक सीमित नहीं है। आरोप है कि शराब घोटाले का पूरा नेटवर्क एक बड़े सिंडिकेट के रूप में काम कर रहा था, जिसमें अनवर ढेबर जैसे नाम प्रमुख भूमिका में थे। बताया जा रहा है कि अनवर ढेबर ने अपने करीबी विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू को इस नेटवर्क में शामिल किया था, जो शराब दुकानों से कमीशन वसूली जैसे काम देखता था। इसी नेटवर्क के जरिए पैसों का लेन देन किया जाता था और कई माध्यमों से रकम को आगे बढ़ाया जाता था। जांच एजेंसियों को शक है कि इसी सिस्टम में विवेक अग्रवाल की भूमिका भी कहीं न कहीं जुड़ी हुई है, जिसकी अब गहन जांच की जा रही है।
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फरार आरोपी विकास अग्रवाल पर भी शिकंजा
इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी विकास अग्रवाल माने जा रहे हैं, जो पिछले करीब चार सालों से फरार हैं। बताया जा रहा है कि विकास अग्रवाल को कोर्ट ने वांटेड घोषित किया हुआ है और वह जांच शुरू होने के बाद से ही देश से बाहर दुबई में रह रहा है। ED लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई है और उसके नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। एजेंसी को संदेह है कि घोटाले से जुड़े कई वित्तीय लेन देन और निवेश के दस्तावेज विकास अग्रवाल और विवेक अग्रवाल के कारोबार के जरिए छिपाए गए हो सकते हैं। इसी वजह से अब उनके व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भी फोकस बढ़ाया गया है।
बेनामी संपत्ति और निवेश की जांच तेज
ED अब उन सभी संपत्तियों की जांच कर रही है जो पिछले कुछ सालों में अचानक बढ़ी हैं। इसमें सोना, हीरे और नकद लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन निवेशों का सीधा संबंध शराब घोटाले से जुड़ी कमाई से है। सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और कीमती सामान मिलने की बात सामने आई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसमें हजारों करोड़ रुपये के गड़बड़ी की जांच चल रही है। ED का दावा है कि तत्कालीन सरकार के दौरान एक संगठित सिंडिकेट के जरिए शराब कारोबार में भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया। जांच में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी और कारोबारी अनवर ढेबर जैसे नाम सामने आए हैं। इन सभी पर मिलकर एक ऐसा नेटवर्क चलाने का आरोप है, जिसने सरकारी सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का अवैध लाभ कमाया।
जांच जारी, आगे और खुलासों की उम्मीद
फिलहाल ED की जांच जारी है और एजेंसी हर कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है। विवेक अग्रवाल के ठिकानों से मिले दस्तावेज और डिजिटल डाटा को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं, जिससे यह घोटाला और गहराता नजर आ रहा है।
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