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भोपाल :कभी टूटी हॉकी स्टिक से मैदान पर खेलने वाली नौशीन का दुनिया जीतने का सफर शुरू

मप्र खेल एवं युवा कल्याण द्वारा ग्वालियर में संचालित महिला हॉकी अकादमी में 95 लड़कियों को प्रशिक्षण दे रही एकेडमी की मुख्य कोच वंदना ने बताया कि नौशीन वर्ष 2023 से मप्र महिला हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण ले रहीं है।
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कभी टूटी हॉकी स्टिक से मैदान पर खेलने वाली नौशीन का दुनिया जीतने का सफर शुरू
जितेन्द्र सक्सेना, भोपाल। 'जो तूफानों में पलते जा रहे हैं,  वही दुनिया बदलते जा रहे हैं' किसी शायर की लिखी यह लाइने सिवनी की तंग गलियों और बिना छत वाले मकान से टूटी हॉकी स्टिक लेकर भारतीय हॉकी टीम में जगह बनाकर कुछ कर दिखाने का सपना लेकर हॉकी खेल में अपने जौहर दिखा रही प्रदेश की बेटी नौशीन खान के ऊपर बिल्कुल फिट बैठती हैं।
दरअसल मध्यप्रदेश महिला हॉकी अकादमी ग्वालियर में एकेडमी की मुख्य प्रशिक्षक वंदना उइके से हॉकी खेल का प्रशिक्षण ले रहीं नौशीन का अंडर-18 के भारतीय हॉकी प्रशिक्षण शिविर में चयन किया गया है, अब वह भोपाल के गौरेगांव स्थित साई सेंटर में 19 अप्रैल से संचालित शिविर में आने वाली आस्ट्रेलिया सीरीज और 29 मई से जापान में होने वाले अंडर-18 एशिया कप की तैयारियों को लेकर अपने खेल को धार दे रहीं हैं। इस कैंप में 24 खिलाड़ियों को चयनित किया गया है, जिसमें कक्षा दसवीं की छात्रा नौशीन शामिल है। इन्हीं 24 खिलाड़ियों में से 18 बालिकाओं को चयनित करते हुए भारतीय अंडर-18 टीम घोषित की जाएगी।

नौशीन गोल करने में माहिर, यही उसमें सबसे खास: कोच वंदना उइके

मप्र खेल एवं युवा कल्याण द्वारा ग्वालियर में संचालित महिला हॉकी अकादमी में 95 लड़कियों को प्रशिक्षण दे रही एकेडमी की मुख्य कोच वंदना ने बताया कि नौशीन वर्ष 2023 से मप्र महिला हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण ले रहीं है। उन्होंने बताया कि मप्र हॉकी एकेडमी में चयन के लिए प्रदेशभर में टैलेंट सर्च आयोजित किए जाते है, मैने पहली बार उसे सिवनी में टैलेंट सर्च के दौरान खेलते हुए  देखा कि नौशीन की रनिंग अच्छी है और उसमें खेलते समय दवाब के क्षणों में भी खुलकर खेलने की कला है, जो की हर एक खिलाड़ी में नही होती। तब वह मात्र 12 वर्ष की थी।
इसके बाद मैने उसे धीरे-धीरे खेल की बरीकियां सिखार्इं और आज वह एक ऐसी खिलाड़ी बन गई जो कि मैच में गोल करके अपनी स्थिति दर्ज करवाती है। उसके अंदर सबसे अच्छी बात है की वह मैच के दौरान दवाब में नही आती, अच्छी स्ट्राकर है साथ ही उसे खेल की समझ है और वह डी के अंदर ऐसी पोजीशन से गेंद पर अटैक करती है कि गेंद सीधी गोल पोस्ट में जाए और यही वह चीज है जो किसी खिलाड़ी को खास बनाती है। हॉकी खेल में गोल करने वाला खिलाड़ी हमेशा आगे ही जाता है, क्योंकि जीत के लिए गोल ही  चाहिए। इसीलिए वह जूनियर विश्वकप में सबसे अधिक गोल करने वाली खिलाड़ी रही। नौ गोल करने वाली नौशीन टूर्नामेंट के फाइनल मेें बेस्ट स्कोर रहीं थी। कोच वंदना ने बताया कि अकादमी में खिलाड़ियों विश्व स्तरीय खेल प्रशिक्षण के साथ रहने खाने की सुविधा और उनकी अध्ययन की व्यवस्था भी की जाती है। इसीलिए आज मप्र खेलों में आगे बढ़ रहा है।

लोग ताने देते थे लड़की को नेकर में खिला रहे हो: एहफाज

नौशीन आज भले ही अपने शहर की पहचान बन गर्इं हैं। लेकिन नौशीन के पिता एहफाज खान बताते है कि पहले मैंने लोगों के बहुत ताने सुने हैं। मैं दिनभर पुस्टे (कार्टून)खरीदकर शाम को बेंच देता हूं, मेरे सात बच्चे हैं जिनमें पांच लड़कियां है और नौशीन चौथे नंबर की है। नौशीन को बचपन से ही हॉकी खेलने का शौक था लेकिन मेरी हैसियत उसे महंगी हॉकी स्टिक और उसकी ड्रेस दिलाने की नही थी, फिर में मुझे टूटी हुई पुरानी हॉकी स्टिक मिली। तो मैने उसे पास में एक लौहार भाई से उसमें कील ठुकवाकर दुरुस्त करवाई और उसे खेलने लायक बनाकर नौशीन को दे दी।
जब वह मैदान पर जाती थी तो कोई उसे पहने के लिए टी-शर्ट कोई जूते और नेकर दे देता था। मैंने दुनिया के ताने भी सहे लोग कहते थे लड़की को मैदान पर नेकर (चढ्ढे) में खिला रहे हो शर्म आनी चाहिए, पर मैं चुपचाप उनकी बात सुनता और सोचता की जवाब ऊपर वाला बेटी की कामयाबी से देगा जो कि आज हुआ और वही लोग घर आकर नौशीन के साथ फोटो खिंचवा रहे है। सब्र का फल मिला है। एहफाज और मां नफीसा बी की दूसरी बेटी तवारिक नाज भी मप्र हॉकी अकादमी में खेलकर उनके नाम को रोशन करने की तैयारी में जुटी है।
Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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