
मणिपुर के उखरूल जिले में एक बार फिर हिंसा का रूप दिखा दिया। नागा और कुकी आदिवासी समुदाय आमने-सामने आ गए। शुक्रवार सुबह हुई अलग-अलग फायरिंग की घटनाओं में लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं।
सुबह करीब 5:30 बजे मुल्लम गांव के पास अचानक गोलियों की आवाजें गूंजने लगीं। यह इलाका तांगखुल नागा समुदाय का गढ़ माना जाता है और नागालैंड व म्यांमार की सीमा के करीब होने के कारण पहले से ही संवेदनशील रहा है।
मुल्लम गांव में हुई इस हिंसक झड़प के दौरान न सिर्फ गोलियां चलीं, बल्कि कई घरों में आग भी लगा दी गई। गांव के बाहरी हिस्से में खड़े घरों को निशाना बनाया गया, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
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सुरक्षा बलों ने मौके से दो शव बरामद किए। मृतकों की पहचान एल. सिटलहोउ और पी. हाओलाई के रूप में हुई है। दोनों के शरीर पर गोलियों के निशान मिले और वे कैमोफ्लाज वर्दी में थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे किसी आम्ड समूह से जुड़े हो सकते हैं।
कुकी वुमन ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। संगठन का आरोप है कि मुल्लम और शोंगफल गांवों में कुकी बस्तियों पर तांगखुल नागा समूह ने सोचा समझा हमला किया। संगठन के मुताबिक, हमलावरों ने सो रहे निहत्थे लोगों को निशाना बनाया। इस हमले में दो कुकी स्वयंसेवकों की हत्या कर दी गई और महिलाओं व बच्चों समेत कई लोग घायल हो गए। साथ ही, आरोप है कि हमलावरों ने गांव के दो घरों को आग के हवाले कर दिया, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
कुकी संगठन का कहना है कि गांव वालों ने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए लाइसेंस प्राप्त हथियारों से जवाब दिया। इस दौरान एक हमलावर को मार गिराया गया। संगठन ने यह भी कहा कि यह कोई एक घटना नहीं है, बल्कि तांगखुल समूहों द्वारा कुकी-जो समुदाय के खिलाफ लगातार हो रहे हमलों की एक कड़ी है। उन्होंने इसे शांति और सुरक्षित जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन बताया।
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दूसरी तरफ, तांगखुल नागा लॉन्ग और नागा विलेज गार्ड ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मुल्लम गांव पर किसी भी तरह का हमला नागा स्वयंसेवकों ने नहीं किया।
नागा संगठनों के मुताबिक, उनके जवान सिर्फ गश्त पर थे। यह गश्त सिनाकैथी और सिराराखोंग गांवों के बीच की जा रही थी, क्योंकि इस इलाके में पहले भी हमले और संदिग्ध गतिविधियां देखी गई थीं।
उनका कहना है कि यह गश्त कुकी सशस्त्र समूहों की गतिविधियों के इनपुट के बाद शुरू की गई थी, जो ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन’ समझौते के तहत काम कर रहे हैं।
इसी दिन एक और दर्दनाक घटना सामने आई। उखरूल जिले के सिनाकेइथेई गांव के पास सशस्त्र उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला किया। इस हमले में कामजोंग जिले के चत्रिक खुल्लेन गांव के रहने वाले 29 वर्षीय एच. जमंग की मौके पर ही मौत हो गई। वह नागा विलेज गार्ड से जुड़े थे। हमले में चार अन्य स्वयंसेवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
तांगखुल नागा समुदाय की शीर्ष संस्था तांगखुल नागा लॉन्ग ने एच. जमंग की मौत पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने इस हमले के लिए कुकी उग्रवादियों को जिम्मेदार ठहराया।
वहीं, कुकी संगठनों ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है और कहा है कि उनका इस हमले से कोई लेना-देना नहीं है। दोनों समुदाय एक-दूसरे पर हमले का आरोप लगा रहे हैं, जिससे हालात और जटिल होते जा रहे हैं। स्थानीय संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तुरंत FIR दर्ज की जाए और जांच कर दोषियों को सजा दी जाए।