Mangala Gauri Vrat 2026:सावन का चौथा मंगला गौरी व्रत कब है? जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

सावन माह के हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस दिन माता गौरी के साथ भगवान शिव और श्रीगणेश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है। इस साल सावन का चौथा मंगला गौरी व्रत 25 अगस्त 2026 को पड़ रहा है।
चौथा मंगला गौरी व्रत कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, चौथा मंगला गौरी व्रत 25 अगस्त 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन सावन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि रहेगी, जो सुबह 06 बजकर 20 मिनट तक रहेगी।
शुक्ल द्वादशी
आरम्भ: 04:18 ए एम, अगस्त 24
अन्त: 06:20 ए एम, अगस्त 25
जानें शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : 04:27 ए एम से 05:11 ए एम
प्रातः सन्ध्या : 04:49 ए एम से 05:55 ए एम
अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:49 पी एम
विजय मुहूर्त : 02:32 पी एम से 03:24 पी एम
गोधूलि मुहूर्त : 06:51 पी एम से 07:13 पी एम
सायाह्न सन्ध्या : 06:51 पी एम से 07:57 पी एम
अमृत काल : 03:49 पी एम से 05:34 पी एम
निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, अगस्त 26 से 12:45 ए एम, अगस्त 26
विशेष योग
त्रिपुष्कर योग : 05:55 ए एम से 06:20 ए एम
रवि योग : 10:51 पी एम से 05:56 ए एम, अगस्त 26
नवविवाहित महिलाओं के लिए विशेष नियम
जिन महिलाओं का इस साल विवाह हुआ है और यह उनका पहला सावन है, उन्हें मंगला गौरी का व्रत अपने मायके में करना चाहिए। इसके बाद अगले चार वर्षों तक यह व्रत ससुराल में करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विवाह के बाद लगातार पांच साल तक मंगला गौरी व्रत करना शुभ माना जाता है।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इससे पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन सुखमय बना रहता है। वहीं, जिन युवतियों का विवाह नहीं हुआ है या शादी में बाधाएं आ रही हैं, वे भी यह व्रत रखती हैं। माना जाता है कि मंगला गौरी व्रत से जल्द विवाह के योग बनते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।











