कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए 23 पदों से इस्तीफा दे दिया है। मंगलवार देर शाम लिए गए इस फैसले के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। ममता ने राज्य स्वास्थ्य मिशन, वाइल्डलाइफ बोर्ड, इको-टूरिज्म एडवाइजरी बोर्ड सहित कई अहम सरकारी विभागों और निकायों में अपनी जिम्मेदारियां छोड़ दी हैं।
इसके अलावा उन्होंने इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों से भी खुद को अलग कर लिया है। राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि मुख्यमंत्री के इस्तीफों को स्वीकार करने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू की जाए। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह फैसला प्रशासनिक स्तर पर सुनियोजित तरीके से लिया गया है।
जारी पत्र में कहा गया है कि विभाग न केवल तुरंत कार्रवाई करें, बल्कि बुधवार शाम 4 बजे तक अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करें। इससे साफ है कि सरकार इस प्रक्रिया को तेज गति से पूरा करना चाहती है। मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे अपने पत्र में ममता बनर्जी ने यह भी अनुरोध किया है कि सूची में शामिल पदों के अलावा अन्य सभी पदों से भी उनके इस्तीफे स्वीकार करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
अधिकारियों के मुताबिक, इस फैसले के बाद सभी विभागों में तुरंत प्रशासनिक फॉलो-अप की जरूरत है, ताकि जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण समय रहते किया जा सके। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब राज्य में चुनावी गतिविधियां अपने चरम पर हैं।
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बता दें कि ममता बनर्जी इस बार दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं। उनके सामने प्रमुख चुनौती विपक्ष के नेता सुवेंधु अधिकारी हैं, जो इस सीट से मुकाबले में हैं।पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को होगा, जबकि चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में ममता बनर्जी का यह फैसला चुनावी रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे वे प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त होकर पूरी तरह चुनाव प्रचार पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।
असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की हाई-प्रोफाइल सीट जालुकबारी से कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग का नामांकन पत्र जांच के दौरान खारिज कर दिया गया।
इस फैसले ने चुनावी मुकाबले से पहले ही कांग्रेस की रणनीति को बड़ा झटका दिया है, खासकर उस सीट पर जहां मुख्यमंत्री खुद चुनाव मैदान में हैं।