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मल्हारगंज थाने में आखिरी बार फहरा तिरंगा:मेट्रो की राह में जल्द ढह जाएगी 76 साल पुरानी इमारत

1950 में पतरों के कच्चे भवन से शुरू हुआ था थाना, बाद में बनी पक्की इमारत; परिसर के शिव मंदिर से भी जुड़ी हैं रहवासियों की आस्था और यादें
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मेट्रो की राह में जल्द ढह जाएगी 76 साल पुरानी इमारत

इंदौर। पुराने इंदौर की पहचान सिर्फ उसकी गलियों, बाजारों और हवेलियों से नहीं, बल्कि उन पुरानी इमारतों से भी है, जिनके साथ शहर की कई पीढ़ियों की यादें जुड़ी हुई हैं। इन्हीं में से एक है मल्हारगंज पुलिस थाना, जो करीब 76 साल से क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहा है। अब मेट्रो प्रोजेक्ट के चलते इस पुराने थाने की इमारत जल्द ही इतिहास का हिस्सा बनने जा रही है। थाना परिसर को जिंसी क्षेत्र में शिफ्ट किया जाएगा। इसके पहले स्वतंत्रता दिवस पर यहां अंतिम बार ध्वजारोहण हुआ तो पुराने थाने से जुड़ी यादें एक बार फिर ताजा हो गईं। 

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मल्हारगंज थाने की खासियत सिर्फ इसकी पुरानी इमारत ही नहीं है। थाना परिसर के भीतर शिव मंदिर भी बना हुआ है, जहां आसपास के रहवासी वर्षों से दर्शन करने आते रहे हैं। पुलिसकर्मियों के साथ क्षेत्र के लोगों का भी इस मंदिर से भावनात्मक जुड़ाव रहा है। अब थाना शिफ्ट होने के साथ परिसर का यह स्वरूप भी बदल जाएगा।

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1950 में पतरों के कच्चे भवन से हुई थी शुरुआत

क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों के अनुसार मल्हारगंज थाना वर्ष 1950 में स्थापित हुआ था। शुरुआत में यहां पतरों से बना कच्चा भवन हुआ करता था। समय के साथ इसका पक्का भवन तैयार हुआ और धीरे-धीरे यह क्षेत्र की पहचान बन गया। बुजुर्ग बताते हैं कि उस दौर में खजूरी बाजार से ही मल्हारगंज थाने की इमारत स्पष्ट दिखाई देती थी। रात के समय थाने में जलने वाला धीमी रोशनी का एक बल्ब भी दूर से नजर आता था। आज जहां आसपास घनी आबादी और बड़ी-बड़ी इमारतें हैं, वहीं उस समय यह इलाका काफी अलग स्वरूप में था।

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15 अगस्त और 26 जनवरी पर जुटते रहे रहवासी

थाना बनने के बाद से ही 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर परिसर में ध्वजारोहण की परंपरा रही है। इन आयोजनों में पुलिसकर्मियों के साथ क्षेत्र के रहवासी भी शामिल होते रहे हैं। कई लोगों के लिए थाना परिसर में होने वाला ध्वजारोहण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि मोहल्ले की सामूहिक परंपरा का हिस्सा रहा है।इस बार स्वतंत्रता दिवस पर जब थाने में तिरंगा फहराया गया तो माहौल कुछ अलग था। लोगों को पता था कि संभवत: यह इस परिसर में होने वाला आखिरी स्वतंत्रता दिवस समारोह है। रहवासी एक-दूसरे से कहते नजर आए कि अगले स्वतंत्रता दिवस तक थाना यहां से जिंसी शिफ्ट हो चुका होगा और इस जगह का स्वरूप बदल चुका होगा।

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थाने की छत पर लगा सायरन भी था पहचान

वरिष्ठ रहवासियों ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि मल्हारगंज थाने की इमारत के ऊपर सायरन भी लगा हुआ था। राष्ट्रीय पर्वों और विशेष अवसरों पर यह सायरन बजाया जाता था। उस दौर में थाने का सायरन आसपास के लोगों के लिए भी परिचित आवाज हुआ करता था। समय के साथ शहर बदला, यातायात बढ़ा, आसपास नई इमारतें खड़ी हुईं और तकनीक ने पुलिस व्यवस्था का स्वरूप बदल दिया, लेकिन मल्हारगंज थाना अपनी पुरानी पहचान के साथ यहां मौजूद रहा।

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मेट्रो बदलेगी थाने की तस्वीर

अब मेट्रो परियोजना के कारण मल्हारगंज थाने को यहां से हटाकर जिंसी में शिफ्ट करने की तैयारी है। यानी जिस परिसर में कई दशकों से पुलिस की गतिविधियां चलती रहीं, जहां राष्ट्रीय पर्वों पर तिरंगा फहराया गया और जहां शिव मंदिर में रहवासियों की आस्था जुड़ी रही, वह स्थान जल्द ही नए रूप में नजर आएगा।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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