Women Reservation Bill:महिला आरक्षण के बाद भी बढ़ेंगे पुरुष सांसद! समझिए पूरा गणित

सरकार ने महिला आरक्षण के साथ-साथ लोकसभा सीटों को बढ़ाने और परिसीमन लागू करने की तैयारी की है। ऐसे में कुल सीटें बढ़ने से महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा, लेकिन पुरुष सांसदों की कुल संख्या भी पहले से ज्यादा हो सकती है।
संसद में सीटें बढ़ेंगी, बदलेगा पूरा समीकरण
सरकार लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर करीब 850 करने की योजना पर काम कर रही है। यह बदलाव जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा। सीटें बढ़ने का मतलब है कि संसद का आकार बड़ा होगा और अधिक प्रतिनिधि चुने जाएंगे। ऐसे में केवल आरक्षण के आधार पर गणित समझना अधूरा होगा। कुल सीटों की वृद्धि ही असली गेम चेंजर है। यही वजह है कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें बढ़ने के बावजूद पुरुष सांसदों की संख्या भी बढ़ सकती है।
ये भी पढ़ें: MP News : अब निकिता को लग सकेगी बहन की किडनी, क्राउड फंडिंग से लेकर पीएम राहत कोष तक से मदद
33% आरक्षण का मतलब क्या है ?
महिला आरक्षण के तहत लोकसभा और विधानसभा की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए तय होंगी। इन सीटों पर केवल महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगी। इससे संसद में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ेगी। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि बाकी सीटों पर पुरुषों की जगह कम हो जाएगी। लगभग 67% सीटें अभी भी सामान्य रहेंगी, जहां सभी उम्मीदवार चुनाव लड़ सकते हैं। इसी संतुलन के कारण पुरुषों की मौजूदगी बनी रहेगी। बताया जा रहा है कि इसका असर 2029 के चुनाव में दिखेगा, बता दें कि यह आरक्षण तुरंत लागू नहीं होगा, बल्कि 2027 की जनगणना और परिसीमन के बाद 2029 के लोकसभा चुनाव में लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि मौजूदा राजनीतिक ढांचा कुछ साल और वैसा ही रहेगा। नए नियम लागू होने के बाद सीटों का पुनर्विन्यास होगा। तब जाकर महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण होगा। इसी प्रक्रिया के बाद संसद का नया स्वरूप सामने आएगा।
पुरुष सांसदों की बढ़ सकती है संख्या
अभी लोकसभा में कुल 540 सांसद हैं, जिनमें 74 महिलाएं और 466 पुरुष शामिल हैं। प्रतिशत के हिसाब से महिलाओं की भागीदारी करीब 13.6% है। आरक्षण लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर लगभग 283 तक पहुंच सकती है। वहीं कुल सीटें बढ़ने के कारण सामान्य सीटों की संख्या भी करीब 567 होगी। इन सीटों पर पुरुष उम्मीदवारों की संख्या अधिक रहने की संभावना है। ऐसे में पुरुष सांसदों की कुल संख्या भी बढ़ सकती है।
ये भी पढ़ें: वेदांता प्लांट ब्लास्ट : कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 10 लोगों पर FIR, सुरक्षा की अनदेखी ने ली 20 जिंदगियां
क्यों नहीं घटेगी पुरुषों की संख्या ?
अभी महिलाएं सामान्य सीटों पर चुनाव लड़ती हैं, जिससे पुरुषों की सीटें कम हो जाती हैं। लेकिन आरक्षण लागू होने के बाद महिलाएं मुख्य रूप से आरक्षित सीटों पर ही चुनाव लड़ेंगी। इससे सामान्य सीटों पर पुरुष उम्मीदवारों का दबदबा बना रहेगा। राजनीतिक पार्टियां भी महिलाओं को आरक्षित सीटों पर ही ज्यादा टिकट देंगी। यही वजह है कि पुरुष सांसदों की संख्या घटने के बजाय बढ़ने की संभावना है। यह पूरा मॉडल एक तरह से संतुलित प्रतिनिधित्व की दिशा में कदम है। महिला आरक्षण को लेकर जो भ्रम बना हुआ है, वह पूरी तस्वीर देखने पर दूर हो जाता है। यह केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का कानून नहीं है, बल्कि संसद के ढांचे को भी बड़ा करने की योजना है। ऐसे में यह व्यवस्था महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।












