नमाज के बीच मंदिर बंद!कल्याण में दुर्गाडी किले पर बकरीद के दिन बवाल, भड़की शिवसेना-BJP ने किया हनुमान चालीसा का पाठ

ठाणे। महाराष्ट्र के कल्याण क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक दुर्गाडी किले में बकरीद के दिन धार्मिक माहौल के बीच तनाव की स्थिति बन गई। यहां किले के परिसर में मौजूद दुर्गा देवी मंदिर और ईदगाह को लेकर लंबे समय से संवेदनशील स्थिति बनी हुई है। इस बार नमाज के दौरान सुरक्षा कारणों से मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते को करीब 30 मिनट के लिए बंद किया गया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। हिंदू संगठनों ने इस फैसले का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने भारी सुरक्षा बल तैनात किया।
ऐतिहासिक दुर्गाडी किला और धार्मिक संवेदनशीलता
दुर्गाडी किला एक ऐसा स्थान है जो ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस किले के परिसर में दुर्गा देवी का मंदिर स्थित है और साथ ही ईदगाह भी मौजूद है। यही कारण है कि यह स्थान हर साल धार्मिक आयोजनों के समय चर्चा में रहता है। बकरीद के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करने के लिए एकत्र होता है जबकि हिंदू श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने आते हैं।
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नमाज के दौरान 30 मिनट की रोक
इस साल बकरीद के मौके पर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों को देखते हुए मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर लगभग 30 मिनट के लिए अस्थायी रोक लगाई थी। इस दौरान केवल नमाज की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए यह कदम उठाया गया था। लेकिन जैसे ही मंदिर में प्रवेश रोका गया, कुछ हिंदू संगठनों ने इसे गलत मानते हुए विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि यह रोक धार्मिक स्वतंत्रता पर असर डालती है। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ इकट्ठा होने लगी।
हिंदू संगठनों का विरोध और हनुमान चालीसा पाठ
विवाद बढ़ने के बाद कई हिंदू संगठन, साथ ही राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। इनमें शिवसेना (शिंदे गुट), शिवसेना (उद्धव गुट) और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने मंदिर में प्रवेश की मांग की और जोरदार नारेबाजी की। इसी दौरान सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया और परिसर में धार्मिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। लोगों का कहना था कि मंदिर में प्रवेश पर रोक अस्वीकार्य है और इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए।
पुलिस की सख्ती और सुरक्षा व्यवस्था
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तुरंत अतिरिक्त बल तैनात किया और पूरे इलाके को घेर लिया। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह अस्थायी रोक केवल सुरक्षा कारणों से लगाई गई थी ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुछ नेताओं को हिरासत में भी लिया गया।
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पुराना विवाद और कोर्ट का फैसला
यह विवाद नया नहीं है। पिछले कई वर्षों से बकरीद के दौरान यहां इसी तरह की स्थिति बनती रही है। दिसंबर 2024 में कोर्ट ने दुर्गाडी किले को महाराष्ट्र सरकार की संपत्ति बताया था और इससे जुड़े दावों को खारिज कर दिया था। इसके बावजूद धार्मिक गतिविधियों को लेकर तनाव कम नहीं हुआ है। प्रशासन का कहना है कि हर साल शांति बनाए रखने के लिए अस्थायी व्यवस्था की जाती है लेकिन भावनात्मक मुद्दों के कारण विवाद खड़ा हो जाता है।











