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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा लाखों का पुल!कुछ ही दिनों में बीच से टूटकर बिखरा, ग्रामीणों ने लगाए घटिया निर्माण के आरोप

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में लाखों रुपए की लागत से बना सरकारी पुल कुछ ही समय में बीच से भरभराकर ढह गया। हैरानी की बात यह है कि इस पुल पर अभी तक कोई भारी वाहन भी नहीं चला था, फिर भी वह सामान्य आवाजाही तक नहीं झेल पाया।
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कुछ ही दिनों में बीच से टूटकर बिखरा, ग्रामीणों ने लगाए घटिया निर्माण के आरोप
सिंगरौली जिले में लाखों रुपए की लागत से बना सरकारी पुल कुछ ही समय में टूट गया।

सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। जिले के देवसर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कठदहा के अधियरिया गांव में लाखों रुपए की लागत से बनाया गया पुल कुछ ही समय में बीच से टूटकर गिर गया। हैरानी की बात यह है कि इस पुल पर अभी तक कोई भारी वाहन भी नहीं चला था। इसके बावजूद पुल भरभराकर ढह गया। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और वे पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे हैं।

पांचवें राज्य वित्त आयोग की राशि से हुआ था निर्माण

ग्रामीणों के अनुसार इस पुल का निर्माण पांचवें राज्य वित्त आयोग से मिली राशि से कराया गया था। पुल बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि गांव की आवाजाही आसान हो जाएगी, लेकिन निर्माण पूरा होने के कुछ समय बाद ही पुल टूट गया। अब ग्रामीणों का कहना है कि जिस पुल पर अभी तक कोई ट्रक, बस या अन्य भारी वाहन नहीं चला।

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बीच से टूटा पुल, बाहर दिखने लगी लोहे की सरिया

पुल टूटने के बाद उसकी असली तस्वीर सामने आ गई। कंक्रीट पूरी तरह उखड़ गई और अंदर लगी लोहे की सरिया साफ दिखाई देने लगी। पुल का बीच वाला हिस्सा पूरी तरह धंस गया है।ग्रामीणों का कहना है कि अगर निर्माण सही तरीके से किया गया होता तो इतनी जल्दी पुल नहीं टूटता। उनका आरोप है कि निर्माण के दौरान घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और गुणवत्ता के नियमों का पालन नहीं किया गया।

ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

गांव के लोगों का कहना है कि पुल निर्माण में शुरू से ही लापरवाही बरती गई। सीमेंट, गिट्टी और कंक्रीट का सही अनुपात नहीं रखा गया। इसी वजह से पुल कमजोर बन गया और कुछ ही समय में ढह गया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य केवल कागजों में मजबूत दिखाया गया, जबकि जमीन पर उसकी गुणवत्ता बेहद खराब थी। उनका कहना है कि सरकारी पैसे का सही उपयोग नहीं किया गया।

बड़ा हादसा हो सकता था

गांव के लोगों का कहना है कि यह राहत की बात है कि पुल टूटने के समय उस पर कोई वाहन या व्यक्ति मौजूद नहीं था। अगर उस समय कोई वाहन गुजर रहा होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। ग्रामीणों का कहना है कि लोगों की जान खतरे में डालकर विकास कार्य करना बेहद गंभीर मामला है। इसलिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

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पहले भी सामने आ चुका है अनियमितताओं का मामला

यह पहली बार नहीं है जब इस ग्राम पंचायत में निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी इसी पंचायत में चेक डैम निर्माण में अनियमितताओं की शिकायत सामने आई थी।
अब पुल गिरने की घटना के बाद लोगों का कहना है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता की ठीक से जांच नहीं की जा रही है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने जनपद पंचायत देवसर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

अधिकारी बोले- मुझे जानकारी नहीं

जब इस मामले में जनपद पंचायत देवसर के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सूरज मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है।उन्होंने यह भी पूछा कि पुल का निर्माण कब हुआ था। अधिकारी का यह जवाब सुनकर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी को ही अपने क्षेत्र के सरकारी निर्माण की जानकारी नहीं है तो निगरानी कैसे हो रही होगी।

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जांच और कार्रवाई की मांग

घटना के बाद गांव के लोगों में काफी गुस्सा है। उनका कहना है कि जनता के टैक्स के पैसे से बने विकास कार्य अगर उपयोग से पहले ही टूटने लगें तो यह सीधे-सीधे सरकारी धन की बर्बादी है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में यदि लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

ग्रामीण बोले- ‘विकास नहीं, भ्रष्टाचार हुआ है’

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विकास के नाम पर केवल सरकारी धन खर्च किया जा रहा है। अगर लाखों रुपये की लागत से बना पुल बिना इस्तेमाल के ही गिर जाए तो इसे विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार कहा जाएगा। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों को सजा मिले, पुल का दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए और भविष्य में ऐसे मामलों की नियमित निगरानी की जाए, ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग हो सके और लोगों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

सरपंच से लेकर इंजीनियर तक पर कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले में संबंधित सब-इंजीनियर, ठेकेदार, सरपंच, सचिव और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि निर्माण कार्य में कितनी राशि खर्च हुई और गुणवत्ता के मानकों का पालन किया गया या नहीं। यदि वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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