बाइक-टैक्सी नियमों के दायरे में आएंगे Zomato, Zepto और Swiggy, हर डिलीवरी का 2% ड्राइवर वेलफेयर फंड में जाएगा

महाराष्ट्र सरकार Swiggy, Zomato और Zepto जैसी फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स कंपनियों को बाइक-टैक्सी नियमों के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए राज्य के परिवहन विभाग ने एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे समीक्षा के लिए विधि एवं न्याय विभाग के पास भेजा गया है। प्रस्ताव लागू होने के बाद डिलीवरी कंपनियों पर डिलीवरी पार्टनर्स की सामाजिक सुरक्षा और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को लेकर नई जिम्मेदारियां आ सकती हैं।
हर राइड या ऑर्डर का 2% ड्राइवर वेलफेयर फंड में होगा जमा
प्रस्तावित नियमों के तहत डिलीवरी कंपनियों को हर राइड या ऑर्डर के किराये का 2% हिस्सा ड्राइवर वेलफेयर फंड में जमा करना होगा। इस फंड का इस्तेमाल डिलीवरी पार्टनर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने में किया जाएगा। प्रस्ताव के मुताबिक इस राशि का इस्तेमाल आगे चलकर डिलीवरी पार्टनर्स की पेंशन, दुर्घटना बीमा और उनके बच्चों की पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। इसका उद्देश्य डिलीवरी का काम करने वाले लोगों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देना है।
15 किलोमीटर तक की डिलीवरी में इलेक्ट्रिक वाहन जरूरी
नए प्रस्ताव में प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत 15 किलोमीटर से कम दूरी की डिलीवरी के लिए कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इससे फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स कंपनियों के डिलीवरी नेटवर्क में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। सरकार का उद्देश्य डिलीवरी से जुड़े वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करना है।
डिजिटल पोर्टल से जुड़े होंगे वाहन और ड्राइवर
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रस्ताव में सभी डिलीवरी वाहनों और ड्राइवरों को राज्य परिवहन आयुक्त के एक समर्पित डिजिटल पोर्टल से जोड़ने की बात कही गई है। इसके जरिए वाहनों और ड्राइवरों की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जा सकेगी। इससे डिलीवरी सेवाओं से जुड़े वाहनों की निगरानी और पहचान करना आसान होगा।
ड्राइवरों के लिए डोमिसाइल और पुलिस वेरिफिकेशन की शर्त
बाइक-टैक्सी नियमों के दायरे में आने के बाद डिलीवरी पार्टनर्स के लिए कुछ अतिरिक्त शर्तें भी लागू हो सकती हैं। इनमें महाराष्ट्र का डोमिसाइल और पुलिस वेरिफिकेशन जैसी शर्तें शामिल हैं। बताया गया है कि राज्य में Ola और Uber जैसी बाइक-टैक्सी सेवाओं के लिए इस तरह की शर्तें पहले से लागू हैं। हालांकि डिलीवरी कंपनियों पर इन नियमों का अंतिम स्वरूप प्रस्ताव की समीक्षा और मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
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कंपनियों की बढ़ सकती है परिचालन लागत
अगर महाराष्ट्र सरकार का यह प्रस्ताव लागू होता है, तो Swiggy, Zomato और Zepto जैसी कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ सकती है। इसकी बड़ी वजह Driver Welfare Fund में 2% योगदान, इलेक्ट्रिक वाहनों की अनिवार्यता और ड्राइवरों की निगरानी से जुड़ी अतिरिक्त व्यवस्था होगी। इन कंपनियों का बिजनेस मॉडल Ola और Uber से अलग है। पैसेंजर कैब सेवाओं में किराया यात्री से लिया जाता है, जबकि फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स कंपनियां ऑर्डर और दूरी के आधार पर डिलीवरी पार्टनर्स को भुगतान करती हैं। ऐसे में नए नियमों का असर कंपनियों के खर्च और उनके डिलीवरी मॉडल पर पड़ सकता है।
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महाराष्ट्र बन सकता है पहला राज्य
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो महाराष्ट्र देश का पहला ऐसा राज्य बन सकता है, जहां फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को राज्य के बाइक-टैक्सी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत लाया जाएगा। फिलहाल यह प्रस्ताव समीक्षा के लिए विधि एवं न्याय विभाग के पास भेजा गया है। इसलिए 2% वेलफेयर फंड, इलेक्ट्रिक वाहन और डोमिसाइल-पुलिस वेरिफिकेशन जैसी व्यवस्थाएं अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं, अंतिम नियम लागू होने के बाद ही इनकी स्पष्ट स्थिति सामने आएगी।












