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CG NEWS: महानदी जल विवाद निर्णायक मोड़ पर: 11 जुलाई तक समझौता करें, नहीं तो शुरू होगी नियमित सुनवाई।

ट्रिब्यूनल का अंतिम अल्टीमेटम, छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच वर्षों पुराने जल विवाद पर 11 जुलाई होगी निर्णायक तारीख महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बेला त्रिवेदी ने स्पष्ट कर दिया है कि दोनों राज्यों के पास अब केवल 11 जुलाई तक का समय है। इसके बाद यदि सहमति नहीं बनती है तो ट्रिब्यूनल कानूनी प्रक्रिया के तहत नियमित सुनवाई शुरू करेगा।
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महानदी जल विवाद निर्णायक मोड़ पर: 11 जुलाई तक समझौता करें, नहीं तो शुरू होगी नियमित सुनवाई।

RAIPUR NEWS। महानदी के जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच वर्षों से चला आ रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों को 11 जुलाई तक आपसी सहमति से समाधान निकालने का अंतिम अवसर दिया है। यदि तय समय तक समझौता नहीं होता, तो ट्रिब्यूनल इस बहुचर्चित मामले की नियमित न्यायिक सुनवाई शुरू करेगा।

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महानदी जल विवाद पर ट्रिब्यूनल का अंतिम मौका

महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बेला त्रिवेदी ने स्पष्ट कर दिया है कि दोनों राज्यों के पास अब केवल 11 जुलाई तक का समय है। इसके बाद यदि सहमति नहीं बनती है तो ट्रिब्यूनल कानूनी प्रक्रिया के तहत नियमित सुनवाई शुरू करेगा।

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24 बैठकों के बाद भी नहीं निकला समाधान

केंद्र सरकार द्वारा गठित ट्रिब्यूनल की निगरानी में दोनों राज्यों की तकनीकी समितियों के बीच अब तक 24 दौर की बैठकें हो चुकी हैं। अप्रैल महीने में ट्रिब्यूनल की टीम ने महानदी बेसिन का संयुक्त निरीक्षण भी किया, लेकिन जल बंटवारे के मुद्दे पर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।

बिजली उत्पादन और पानी की मांग बनी विवाद की बड़ी वजह

सूत्रों के अनुसार ओडिशा सरकार गर्मी के मौसम में 300 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए अतिरिक्त पानी की मांग कर रही है। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि गर्मियों में महानदी बेसिन में पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं रहता। इसके विकल्प के रूप में छत्तीसगढ़ ने ओडिशा को 300 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी दिया है।

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डेल्टा क्षेत्र के बेहतर उपयोग पर भी मतभेद

विशेषज्ञों का मानना है कि महानदी डेल्टा का बड़ी मात्रा में पानी बिना उपयोग के समुद्र में चला जाता है। छत्तीसगढ़ ने डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार का सुझाव दिया है, लेकिन इस मुद्दे पर भी दोनों राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई है।

महानदी दोनों राज्यों की जीवनरेखा

करीब 900 किलोमीटर लंबी महानदी का 357 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़ और 494 किलोमीटर हिस्सा ओडिशा में बहता है। शिवनाथ, हसदेव, मांड, तेल, जोंक, इब और ओंग जैसी प्रमुख सहायक नदियों वाला यह बेसिन सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन और औद्योगिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

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11 जुलाई की सुनवाई पर टिकी निगाहें

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के बीच इस विषय पर चर्चा हो चुकी है। ओडिशा सरकार ने सर्वदलीय समिति भी गठित की है। अब 11 जुलाई की सुनवाई यह तय करेगी कि विवाद बातचीत से सुलझेगा या फिर ट्रिब्यूनल अपना अंतिम फैसला सुनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

Prem Nirmalkar
By Prem Nirmalkar
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