सीहोर: पुलिस की बैंक अधिकारियों के साथ बैठक, बैंक स्टाफ साइबर फ्रॉड से रहे सतर्क

सीहोर। बैठक पुलिस अधीक्षक सीहोर सोनाक्षी सक्सेना के नेतृत्व में और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे के समन्वय से आयोजित की गई। इसमें लीड बैंक मैनेजर जयदीप भट्टाचार्य सहित जिले के 26 शासकीय और निजी बैंकों के मैनेजर और प्रतिनिधि तथा पुलिस विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने साइबर अपराधों की रोकथाम में बैंकिंग संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए आपसी समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया। बैठक में साइबर ठगी की रकम को तत्काल होल्ड कराने, संदिग्ध खातों की पहचान, म्यूल अकाउंट पर कार्रवाई और पुलिस-बैंक के बीच रियल टाइम डाटा शेयरिंग को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
म्यूल अकाउंट पर रहेगी विशेष नजर
बैठक में साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले फर्जी और संदिग्ध बैंक खातों को लेकर विशेष चर्चा हुई। पुलिस अधिकारियों ने बैंक प्रतिनिधियों से ऐसे खातों की पहचान कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने और संबंधित जानकारी साइबर पुलिस के साथ साझा करने के निर्देश दिए। ऐसे खातों पर निगरानी बढ़ाने का उद्देश्य साइबर ठगी की रकम के लेनदेन को समय रहते रोकना और अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस को मदद देना है।
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NCRP समेत तकनीकी सिस्टम के इस्तेमाल पर जोर
बैठक में National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP), MRM और GRM सहित साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न तकनीकी सिस्टम और प्रक्रियाओं के प्रभावी उपयोग पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस और बैंक के बीच तेजी से सूचना का आदान-प्रदान होने पर संदिग्ध लेनदेन और खातों पर समय रहते कार्रवाई की जा सकती है।
पीड़ित की रकम होल्ड कराने पर फोकस
साइबर फ्रॉड के मामलों में पीड़ित की राशि को तत्काल होल्ड या फ्रीज कराने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। पुलिस और बैंक प्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल से धोखाधड़ी के बाद धनराशि के आगे ट्रांसफर होने की संभावना को कम करने और उपलब्ध बैंकिंग जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलने की बात कही गई।
रियल टाइम डाटा शेयरिंग से तेज होगी कार्रवाई
बैठक में पुलिस और बैंकों के बीच आवश्यक सूचनाओं की रियल टाइम शेयरिंग को महत्वपूर्ण बताया गया। संदिग्ध खातों, साइबर फ्रॉड से जुड़े लेनदेन और पीड़ितों की शिकायतों से संबंधित जानकारी तेजी से साझा होने पर कार्रवाई की प्रक्रिया को गति देने पर चर्चा हुई। बैंक अधिकारियों को साइबर अपराध से संबंधित पुलिस कार्रवाई में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
बैंक परिसरों के आसपास CCTV निगरानी बढ़ाने का प्रस्ताव
साइबर अपराध के साथ बैंकिंग गतिविधियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बैंक परिसर और उसके आसपास CCTV निगरानी बढ़ाने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। पुलिस की ओर से सभी बैंकों से इस दिशा में सहयोग की अपेक्षा की गई। बैठक में मौजूद बैंक अधिकारियों ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन दिया।
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साइबर सुरक्षा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी
बैठक के अंत में बैंक प्रतिनिधियों से साइबर सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने और साइबर अपराधों की रोकथाम में पुलिस का सहयोग करने को कहा गया। पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय, संदिग्ध खातों पर तुरंत कार्रवाई और तकनीकी सूचनाओं के तेज आदान-प्रदान को साइबर ठगी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।




















