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FIFA World Cup 2026 :फीफा के जुनून में डूबा मप्र का ‘मिनी ब्राजील’ विचारपुर

फुटबॉल वर्ल्ड कप में दुनिया के कई देश जोश से भरपूर हैं। दुनिया में फुटबॉल के कितने ही दीवाने हों, लेकिन मप्र में मिनी ब्राजील के नाम से प्रसिद्ध विचारपुर में फीफा को लेकर अलग ही दीवानगी है। यहां युवाओं के अलावा बच्चे, पुरुष महिलाएं सब फुटबॉल वर्ल्ड कप के मैच देखते हैं।
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फीफा के जुनून में डूबा मप्र का ‘मिनी ब्राजील’ विचारपुर

जबलपुर। फीफा विश्व कप का खुमार इन दिनों पूरी दुनिया पर छाया हुआ है। भारत में फुटबॉल प्रेम की बात होती है तो सबसे पहले पश्चिम बंगाल का नाम सामने आता है, लेकिन मप्र के शहडोल जिले का छोटा सा आदिवासी गांव विचारपुर भी किसी फुटबॉल राजधानी से कम नहीं है। ‘मिनी ब्राजील’ के नाम से मशहूर यह गांव इन दिनों फीफा विश्व कप के रंग में पूरी तरह रंगा हुआ है। यहां महिला, पुरुष और बच्चे एक साथ बैठकर मैच देखते हैं और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खेल का आनंद लेते हैं।

बच्चों से बुजुर्ग तक सबकी जुबान पर फुटबॉल की चर्चा

गांव की खासियत यह है कि यहां मैच देखने वाले अधिकांश लोग खुद भी फुटबॉल खिलाड़ी हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी की जुबान पर फुटबॉल की चर्चा है। विश्व कप के हर मुकाबले पर नजर रहती है और पसंदीदा टीमों के लिए उत्साह देखते ही बनता है।

मैच देखने का सामूहिक उत्सव

फीफा विश्व कप के दौरान विचारपुर में सामूहिक रूप से मैच देखने की परंपरा है। गांव के लोग टीवी और प्रोजेक्टर के सामने जुटते हैं। महिला खिलाड़ी, पुरुष खिलाड़ी और बच्चे एक साथ बैठकर मैच देखते हैं और खेल की बारीकियों को समझते हैं। किसी टीम का शानदार गोल हो या बेहतरीन पासिंग, हर मूवमेंट पर चर्चा होती है।

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ब्राजील के लिए धड़कता है दिल

‘मिनी ब्राजील’ की पहचान ही ब्राजील के प्रति उसके लगाव से बनी है। गांव के अधिकांश खिलाड़ी ब्राजील की फुटबॉल शैली के प्रशंसक हैं। उनके घरों और मैदानों में ब्राजील के झंडे और जर्सियां दिखाई देती हैं। विश्व कप में भी यहां के लोग ब्राजील को सबसे मजबूत दावेदार मानते हैं।

खिलाड़ियों के लिए सीखने का मौका

जर्मनी में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी महिला फुटबॉल खिलाड़ी सानिया कुंडे कहती हैं कि हम सभी खिलाड़ी एक साथ बैठकर मैच देखते हैं। दुनिया के बड़े खिलाड़ियों की तकनीक, पोजिशनिंग और खेल की समझ से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। फीफा विश्व कप हमारे लिए एक तरह का लाइव क्लासरूम है। महिला फुटबॉल टीम की कोच लक्ष्मी सहीश बताती हैं कि विश्व कप देखने से बच्चों को पासिंग, मूवमेंट, डिफेंस और अटैक की रणनीतियां समझने का मौका मिलता है। यही कारण है कि युवाओं को फुटबॉल के प्रति गहरी रुचि है।

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भारत को फीफा तक पहुंचाने का सपना

यहां के खिलाड़ियों का मानना है कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है। बेहतर सुविधाएं और निरंतर प्रशिक्षण मिले तो भारत भी बड़े देशों को चुनौती दे सकता है। आज वे विश्व कप देख रहे हैं, लेकिन उनका सपना है कि भारत भी इस महाकुंभ में खेलता नजर आए।

नेमार से विनीसियस तक, ब्राजील के सितारों के दीवाने

विचारपुर के बच्चे और खिलाड़ी नेमार जूनियर, विनीसियस जूनियर, राफिन्हा और एलिसन बेकर जैसे खिलाड़ियों के खेल को बेहद पसंद करते हैं। उनका कहना है कि नेमार की ड्रिब्लिंग, विनीसियस की रफ्तार, राफिन्हा की आक्रामक शैली पसंद है और एलिसन की गोलकीपिंग उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती है। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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