भीषण हादसे में इंदौर के मेजर मृत:दो लेफ्टिनेंट घायल, घर में पसरा मातम

इंदौर। इंदौर के धनवंतरी नगर निवासी भारतीय सेना के मेजर हमजा आरिफ का राजस्थान के जैसलमेर में एक दर्दनाक सड़क हादसे में निधन हो गया। महज एक महीने पहले शादी के बंधन में बंधे मेजर हमजा अब तिरंगे में लिपटकर अपने घर लौटेंगे। इस हादसे में सेना के दो लेफ्टिनेंट भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका सेना के अस्पताल में उपचार चल रहा है। घटना की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया, जबकि शहरभर में शोक की लहर दौड़ गई।
जानकारी के अनुसार गुरुवार देर रात करीब 12:30 बजे जैसलमेर शहर से लगभग 18 किलोमीटर दूर आर्मी क्षेत्र में सेना की टाटा सफारी अचानक सड़क पर आए एक ऊंट से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन चार से पांच बार पलट गया। हादसे के समय वाहन मेजर हमजा आरिफ चला रहे थे। दुर्घटना में वे गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उनके साथ मौजूद लेफ्टिनेंट आयुष्मान और लेफ्टिनेंट अभिनव राठौर भी घायल हो गए। तीनों को तत्काल सेना के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मेजर हमजा को मृत घोषित कर दिया। दोनों घायल अधिकारियों का उपचार जारी है।
इंदौर से शुरू हुआ था सेना तक का सफर
मेजर हमजा आरिफ मूल रूप से इंदौर के धनवंतरी नगर के निवासी थे। उन्होंने वर्ष 2016 में इंदौर के चमेली देवी कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने भारतीय सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य तय किया और वर्ष 2017 में परीक्षा उत्तीर्ण कर सेना में कमीशन प्राप्त किया। अपनी मेहनत, अनुशासन और उत्कृष्ट सेवा के दम पर उन्होंने महज नौ वर्षों में तीन पदोन्नतियां हासिल कीं और मेजर के पद तक पहुंचे। वर्तमान में वे राजस्थान के जैसलमेर में पदस्थ थे।
एक महीने पहले हुई थी शादी
मेजर हमजा की असामयिक मौत ने इसलिए भी सभी को झकझोर दिया, क्योंकि उनकी शादी महज एक महीने पहले ही हुई थी। उनकी जीवनसंगिनी भी इंजीनियर हैं। परिवार ने दिसंबर में उनके इंदौर आने पर भव्य रिसेप्शन की तैयारियां शुरू कर दी थीं, लेकिन उससे पहले ही यह दुखद हादसा हो गया। खुशियों से भरा घर देखते ही देखते मातम में बदल गया।
दोस्तों ने याद किया मिलनसार स्वभाव
हादसे की खबर मिलते ही मेजर हमजा के मित्र और परिचित उनके घर पहुंचने लगे। दोस्तों ने उन्हें बेहद मिलनसार, मेहनती और देशसेवा के प्रति समर्पित अधिकारी बताया। उनका कहना था कि हमजा बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखते थे और उन्होंने अपनी मेहनत से उसे पूरा किया।












