PU Special :राज्यसभा में ‘एंट्री’ के लिए बाहरी नेताओं की पसंद बना मध्यप्रदेश, विकास में योगदान का हिसाब नहीं

मध्यप्रदेश के कोटे से दूसरे राज्यों के कई नेताओं को राज्यसभा भेजा गया लेकिन प्रदेश में उनके विकास कार्यों और सांसद निधि के उपयोग का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं है।
राज्यसभा में ‘एंट्री’ के लिए बाहरी नेताओं की पसंद बना मध्यप्रदेश, विकास में योगदान का हिसाब नहीं
बाहरी नेताओं की पसंद बना मध्यप्रदेश

राजीव सोनी, भोपाल। मध्यप्रदेश दूसरे राज्यों के नेताओं के लिए राज्यसभा में प्रवेश का अहम राजनीतिक ठिकाना बन गया है। खासकर पिछले तीन दशकों में राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे कई भाजपा नेताओं को मध्यप्रदेश के कोटे से उच्च सदन में भेजा गया। इनमें ऐसे नेता भी शामिल रहे, जिन्हें राज्यसभा सदस्य बनने के साथ केंद्र सरकार में मंत्री पद मिला। लेकिन सवाल यह है कि प्रदेश से राज्यसभा पहुंचने वाले इन नेताओं ने मध्यप्रदेश के विकास में कितना योगदान दिया? सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) के तहत उन्होंने कहां और कितनी राशि खर्च करने की अनुशंसा की, इसका पूरा ब्योरा फिलहाल पार्टी संगठन के पास उपलब्ध नहीं बताया जा रहा है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट पर भाजपा नेतृत्व ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार घोषित किया है। पुरी का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा था। मंत्री पद पर उन्हें बनाए रखने के लिए मध्यप्रदेश के कोटे से उच्च सदन भेजने का फैसला किया गया। मध्यप्रदेश से राज्यसभा जाने वाले एक बाहरी नेता से जब पूछा गया कि वे राज्य के बारे में क्या सोचते हैं और इसके विकास के लिए क्या करेंगे, तो उनका जवाब था कि विकास की योजनाएं बनाने के लिए मुख्यमंत्री हैं। इस जवाब ने राज्यसभा सदस्यों की प्रदेश के प्रति जिम्मेदारी और उनके योगदान पर सवाल खड़े किए हैं।

चार महीने पहले तरुण चुग को भी मिला था मौका

भाजपा ने करीब चार महीने पहले पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और पंजाब की राजनीति से जुड़े तरुण चुग को भी मध्यप्रदेश के कोटे से राज्यसभा भेजा था। पार्टी के इस फैसले को पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। दूसरे राज्यों के नेताओं को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजने की परंपरा नई नहीं है। अलग-अलग समय पर भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नेताओं को प्रदेश के कोटे से उच्च सदन में जगह दिलाई है। हालांकि, इन नेताओं की राजनीतिक भूमिका के मुकाबले मध्यप्रदेश में उनके विकास कार्यों का हिसाब कितना स्पष्ट है, यह बहस का विषय बना हुआ है।

सांसद निधि से कहां हुए विकास कार्य, रिकॉर्ड पर सवाल

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी एमपीलैड्स के तहत लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य हर साल पांच करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों की अनुशंसा कर सकते हैं। मध्यप्रदेश के कोटे से राज्यसभा पहुंचे दूसरे राज्यों के नेताओं ने इस निधि से प्रदेश में कहां और कितनी राशि के विकास कार्यों की अनुशंसा की, इसका पूरा रिकॉर्ड फिलहाल पार्टी संगठन के पास उपलब्ध नहीं बताया जा रहा है। इस वजह से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इन नेताओं ने मध्यप्रदेश के किन क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए राशि की अनुशंसा की और प्रदेश को उससे कितना लाभ मिला। हालांकि सांसद निधि के उपयोग और उससे हुए कार्यों का आधिकारिक हिसाब संबंधित सरकारी तंत्र में भी हो सकता है। संगठन के पास ब्योरा उपलब्ध नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि विकास कार्य हुए ही नहीं।

सांसद निधि के नियम क्या कहते हैं?

एमपीलैड्स के प्रावधानों के तहत लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य हर साल पांच करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों की अनुशंसा कर सकते हैं। वर्ष 2024 में किए गए संशोधन के अनुसार, राज्यसभा सदस्य इस राशि में से 50 लाख रुपये तक के विकास कार्यों की अनुशंसा अपने राज्य से बाहर भी कर सकते हैं। गंभीर प्राकृतिक आपदा की स्थिति में देश के किसी भी राज्य के लिए एक करोड़ रुपये तक की राशि मंजूर की जा सकती है। सांसद निधि के तहत अनुशंसित कार्यों को पूरा कराने की जिम्मेदारी संबंधित जिला प्रशासन की होती है। वित्त वर्ष के दौरान राशि का उपयोग नहीं होने पर वह लैप्स नहीं होती, बल्कि अगले वर्ष की सांसद निधि में जुड़ जाती है। ऐसे में सांसद निधि का आकलन करते समय केवल राशि की अनुशंसा ही नहीं बल्कि स्वीकृत कार्यों, जारी धन और वास्तविक खर्च का विवरण भी महत्वपूर्ण होता है।

भाजपा के कोटे से राज्यसभा पहुंचे कई बड़े नाम

मध्यप्रदेश के कोटे से भाजपा ने अलग-अलग समय पर दूसरे राज्यों के कई नेताओं को राज्यसभा भेजा। इनमें राष्ट्रीय राजनीति के बड़े नाम शामिल रहे हैं।

  • एम. वेंकैया नायडू (आंध्र प्रदेश): दो कार्यकाल, 2004 से 2016 तक।
  • चंदन मित्रा (पश्चिम बंगाल): दो कार्यकाल, 2003 से 2009 और 2010 से 2016 तक।
  • प्रकाश जावड़ेकर (महाराष्ट्र): 2014 से 2018 तक।
  • एम. जे. अकबर (पश्चिम बंगाल): 2016 से 2018 तक।
  • धर्मेंद्र प्रधान (ओडिशा): 2018 से 2024 तक।
  • एल. मुरुगन (तमिलनाडु): अप्रैल 2024 से अक्टूबर 2026 तक; इस्तीफा देने के बाद सीट खाली हुई।
  • जॉर्ज कुरियन (केरल): 2024 से 2026 तक।
  • तरुण चुग (दिल्ली/पंजाब): जून 2026 से वर्तमान तक, जैसा उपलब्ध विवरण में उल्लेख है।

इस सूची के अलावा भैरों सिंह शेखावत, लालकृष्ण आडवाणी, सुब्बारामन थिरुनावुक्कारासर, सुषमा स्वराज, ओ. राजगोपाल, सिकंदर बख्त, एल. गणेशन और नजमा हेपतुल्ला जैसे नेता भी मध्यप्रदेश से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

कांग्रेस ने भी दूसरे राज्यों के नेताओं को दिए अवसर

दूसरे राज्यों के नेताओं को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजने की परंपरा केवल भाजपा तक सीमित नहीं रही। कांग्रेस ने भी अलग-अलग समय पर बाहरी नेताओं को प्रदेश के कोटे से उच्च सदन में भेजा। इनमें हंसराज भारद्वाज, कैप्टन सतीश शर्मा, केशव प्रसाद शुक्ल, माबेल रेबेलो और ओबैदुल्ला खान आजमी जैसे नाम प्रमुख हैं। इससे स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय दलों ने राज्यसभा की सीटों के आवंटन में कई बार प्रदेश के स्थानीय नेतृत्व से अलग राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को प्राथमिकता दी है। ऐसे फैसलों के पीछे पार्टी की राजनीतिक रणनीति और राष्ट्रीय समीकरण भी भूमिका निभाते हैं।

पहले संगठन के पास रहता था विकास कार्यों का ब्योरा

वरिष्ठ भाजपा नेता और राज्यसभा सदस्य रघुनंदन शर्मा के मुताबिक, राज्यपाल या राज्यसभा के लिए नामित होने वाले नेताओं की छवि निष्कलंक और विवादरहित होना अपेक्षित है क्योंकि किसी भी विवाद से पार्टी की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। शर्मा का कहना है कि पहले मध्यप्रदेश से राज्यसभा जाने वाले दूसरे राज्यों के नेता विकास कार्यों के लिए जो अनुशंसाएं करते थे, उनका विवरण पार्टी संगठन के पास रखा जाता था। उनके अनुसार, पूर्व के वर्षों में इस तरह का रिकॉर्ड उपलब्ध रहता था। इस संदर्भ में मौजूदा स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रदेश से राज्यसभा पहुंचने वाले नेताओं के विकास कार्यों और सांसद निधि के उपयोग का विवरण व्यवस्थित रूप से रखा जा रहा है। राजनीतिक प्रतिनिधित्व के साथ प्रदेश के प्रति जवाबदेही और विकास कार्यों का पारदर्शी हिसाब भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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प्रदेश को क्या मिला, जवाबदेही का सवाल कायम

मध्यप्रदेश के कोटे से दूसरे राज्यों के नेताओं को राज्यसभा भेजने के फैसलों पर अब उनके योगदान और जवाबदेही के नजरिए से भी चर्चा हो रही है। सांसद निधि के तहत विकास कार्यों का पूरा विवरण सामने आने से यह समझने में मदद मिलेगी कि इन नेताओं ने प्रदेश के लिए किन क्षेत्रों में काम की अनुशंसा की और उसका कितना लाभ मिला।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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