MP की राज्यसभा सीट पर सस्पेंस, हरदीप पुरी से आदिवासी चेहरों तक दावेदारी

भोपाल। केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर दिल्ली से भोपाल तक राजनीतिक लॉबिंग तेज हो गई है। भाजपा में इस सीट के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष वानती श्रीनिवासन और मध्यप्रदेश के आदिवासी नेताओं के नाम चर्चा में हैं। पार्टी के सामने उम्मीदवार के चयन में राजनीतिक समीकरणों के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व का सवाल भी अहम हो सकता है। प्रदेश के मौजूदा राज्यसभा सदस्यों में अनुसूचित जनजाति (अजजा) वर्ग का कोई प्रतिनिधि नहीं है। ऐसे में इस बार किसी स्थानीय आदिवासी चेहरे को मौका दिए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है। प्रदेश की आबादी में अनुसूचित जनजाति वर्ग की हिस्सेदारी 21 फीसदी से अधिक बताई जाती है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए आदिवासी प्रतिनिधित्व का मुद्दा महत्वपूर्ण हो सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस सीट पर उम्मीदवार के नाम को लेकर अगले कुछ दिनों में केंद्रीय चुनाव समिति निर्णय ले सकती है। प्रदेश भाजपा संगठन की ओर से भी किसी स्थानीय आदिवासी नेता को राज्यसभा भेजने की मांग उठने की बात कही जा रही है।
हरदीप सिंह पुरी का नाम क्यों है चर्चा में?
मध्यप्रदेश की खाली हुई राज्यसभा सीट के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम प्रमुख दावेदारों में लिया जा रहा है। उनका मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इस बार भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में नामित नहीं किया है। ऐसे में मध्यप्रदेश की खाली सीट से उनकी उच्च सदन में वापसी की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इससे पहले जून में भाजपा नेतृत्व ने मध्यप्रदेश की एक राज्यसभा सीट से पंजाब के नेता तरुण चुघ को उच्च सदन में भेजा था। अब एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर पार्टी किसे मौका देती है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर है।
आदिवासी प्रतिनिधित्व बन सकता है चयन का बड़ा फैक्टर
मध्यप्रदेश में आदिवासी मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए राज्यसभा सीट के लिए आदिवासी चेहरे की दावेदारी भी चर्चा में है। प्रदेश में विधानसभा की 47 सीटें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं जबकि लोकसभा की छह सीटें इस वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इसके बावजूद मौजूदा राज्यसभा सदस्यों में अनुसूचित जनजाति वर्ग का कोई प्रतिनिधि नहीं है। जून 2026 तक डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी मध्यप्रदेश से इस वर्ग के राज्यसभा सदस्य थे। उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह प्रतिनिधित्व खत्म हो गया। भाजपा और प्रदेश संगठन के स्तर पर किसी स्थानीय आदिवासी नेता को मौका देने की मांग उठने की बात कही जा रही है। राजनीतिक चर्चाओं में यह भी माना जा रहा है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा आदिवासी मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए इस वर्ग के किसी नेता को राज्यसभा भेजने पर विचार कर सकती है। खबर के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से भी इस संबंध में लगातार फीडबैक दिए जाने की बात कही जा रही है।
सुमेर सिंह सोलंकी से रंजना बघेल तक संभावित दावेदार
राज्यसभा सीट के लिए कई स्थानीय नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। इनमें पूर्व सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी, पूर्व मंत्री रंजना बघेल और रामलाल रोतेल शामिल हैं। कर्नाटक के राज्यपाल रहे थावरचंद गेहलोत का नाम भी संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है। डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी बरेला जनजाति से आते हैं और मध्यप्रदेश से भाजपा के राज्यसभा सदस्यों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के इकलौते प्रतिनिधि रहे हैं। उनका कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हुआ था। ऐसे में उनके नाम की चर्चा आदिवासी प्रतिनिधित्व के संदर्भ में भी हो रही है। हालांकि इन नामों को लेकर अभी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। उम्मीदवार के चयन पर पार्टी नेतृत्व और केंद्रीय चुनाव समिति का फैसला महत्वपूर्ण होगा।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई सीट
मध्यप्रदेश की यह राज्यसभा सीट केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। उन्होंने 14 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल और राज्यसभा से इस्तीफा दिया था। इससे पहले 21 जून 2026 को डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हुआ था। एल. मुरुगन की सीट खाली होने के बाद इस पर उपचुनाव की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 12 नवंबर को उपचुनाव से जुड़ा कार्यक्रम निर्धारित है। ऐसे में उम्मीदवार के चयन को लेकर भाजपा के पास समय सीमित माना जा रहा है।
मध्यप्रदेश से भाजपा के मौजूदा राज्यसभा सदस्य
मध्यप्रदेश से भाजपा के राज्यसभा सदस्यों में अलग-अलग सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व है। उपलब्ध सूची के मुताबिक अनुसूचित जाति वर्ग से सुमित्रा बाल्मीक और बालयोगी उमेश नाथ के नाम शामिल हैं। ओबीसी वर्ग से कविता पाटीदार, बंशीलाल गुर्जर, माया नरोलिया और महेश केवट के नाम बताए गए हैं। वहीं सामान्य वर्ग से रजनीश अग्रवाल और तरुण चुघ का उल्लेख है। इस सूची में अनुसूचित जनजाति वर्ग का कोई मौजूदा सदस्य शामिल नहीं है। यही वजह है कि खाली हुई सीट पर आदिवासी चेहरे को मौका दिए जाने की संभावना को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि हरदीप सिंह पुरी और वानती श्रीनिवासन जैसे नाम भी दावेदारों की चर्चा में हैं। अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व को करना है।
केंद्रीय चुनाव समिति के फैसले पर नजर
मध्यप्रदेश की खाली राज्यसभा सीट को लेकर अब भाजपा की रणनीति और केंद्रीय चुनाव समिति के निर्णय का इंतजार है। एक ओर हरदीप सिंह पुरी जैसे राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के नाम चर्चा में हैं, तो दूसरी ओर प्रदेश के आदिवासी नेताओं को प्रतिनिधित्व देने की मांग भी सामने आ रही है। ऐसे में उम्मीदवार का चयन केवल एक खाली सीट भरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें पार्टी की राष्ट्रीय रणनीति, प्रदेश संगठन की पसंद और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।




















