PU Special :भोपाल फैमिली कोर्ट में पति-पत्नी का विवाद, पत्नी ने लगाए जासूसी और दहेज प्रताड़ना के आरोप

पल्लवी वाघेला, भोपाल। दूसरी ओर, पति ने पत्नी पर शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करने और परिवार के सदस्यों से दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की है। मामले में अपनी 11 माह की बच्ची की मौत के लिए भी दोनों एक-दूसरे को जिम्मेदार मानते हैं। मामला अब फैमिली कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन पत्नी किसी कीमत पर तलाक को राजी नहीं है। उसने कहा कि बेटी की मौत के बाद से वह डिप्रेशन में थी और अब उससे उबर रही है, उसे पति के साथ की जरूरत है।
पत्नी बोली- चाहिए थी नई शुरुआत
पत्नी का कहना है कि बेटी की मौत के बाद वह डिप्रेशन में चली गई थी। इस दौरान रिश्ते में दूरियां और बढ़ती गईं। फिलहाल वह मायके में रहकर इलाज करा रही है। इसके बावजूद वह वैवाहिक रिश्ता खत्म नहीं करना चाहती। पत्नी ने कहा कि पति उसकी तरफ से नीरस हो गए थे और इसलिए दूसरी महिलाओं के संपर्क में आए, लेकिन अब वह सब ठीक करना चाहती है। पत्नी ने अदालत में गुहार लगाई कि उसका दूसरा कोई आसरा नहीं है। पति को समझाया जाए कि दोनों पुराने विवादों को पीछे छोड़कर रिश्ते की नई शुरुआत कर सकते हैं।
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पति ने पत्नी पर लगाए गंभीर आरोप
पत्नी का कहना है कि बेटी की मौत के बाद वह अवसाद में चली गई थी। इस दौरान रिश्ते में दूरियां और बढ़ती गईं। फिलहाल वह मायके में रहकर इलाज करा रही है। इसके बावजूद वह वैवाहिक रिश्ता खत्म नहीं करना चाहती। पत्नी ने कहा कि पति उसकी तरफ से नीरस हो गए थे और इसलिए दूसरी महिलाओं के संपर्क में आए, लेकिन अब वह सब ठीक करना चाहती है। पत्नी ने अदालत में गुहार लगाई कि उसका दूसरा कोई आसरा नहीं है। पति को समझाया जाए कि दोनों पुराने विवादों को पीछे छोड़कर रिश्ते की नई शुरुआत कर सकते हैं।
जासूसी बढ़ा रही विवाद
रिश्तों में संदेह होने पर जासूसी और स्पाई एप की घटनाएं लगातार सामने आ रही है। बता दें कि मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों की फैमिली कोर्ट में हर माह औसत छह मामले पार्टनर द्वारा जासूसी की शिकायत संबंधी पहुंचते हैं। अकेले भोपाल में वर्तमान में ऐसे एक दर्जन से ज्यादा मामले विचाराधीन हैं।
निगरानी नहीं भरोसा जरूरी
साइकोलॉजिस्ट डॉ. दीप्ति सिंघल ने बताया कि वैवाहिक रिश्ते में संदेह बढ़ने पर साथी की गतिविधियों पर नजर रखना, निजी जानकारियां साझा करना या एक-दूसरे पर दबाव बनाना विवाद को और गंभीर कर सकता है। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों की बात सुनना और उनकी भावनात्मक स्थिति को समझना जरूरी है। बच्चे की मौत जैसी दुखद घटना के बाद व्यक्ति गहरे मानसिक तनाव से गुजर सकता है। ऐसे में जीवनसाथी का भावनात्मक सहयोग और जरूरत पड़ने पर ट्रीटमेंट से बचना नहीं चाहिए।




















