श्रावण मास में आस्था का महासंगम :23वीं जटाशंकर कांवड़ यात्रा आज से शुरू, 10 अगस्त को होगा जलाभिषेक

सोहागपुर से निकलने वाली 23वीं ऐतिहासिक श्री जटाशंकर कांवड़ यात्रा का शुभारंभ 2 अगस्त को नर्मदापुरम के सेठानी घाट से होगा। 3 अगस्त को श्रद्धालु मां नर्मदा का जल लेकर पचमढ़ी स्थित जटाशंकर महादेव के लिए रवाना होंगे। यात्रा का समापन 10 अगस्त को जलाभिषेक के साथ होगा।
23वीं जटाशंकर कांवड़ यात्रा आज से शुरू, 10 अगस्त को होगा जलाभिषेक
23वीं जटाशंकर कांवड़ यात्रा आज से शुरू

श्रावण मास के पावन अवसर पर एक बार फिर आस्था का विराट संगम देखने को मिलेगा। पिछले 23 वर्षों से आयोजित होने वाली ऐतिहासिक श्री जटाशंकर कांवड़ यात्रा का शुभारंभ शनिवार, 2 अगस्त को नर्मदापुरम के सेठानी घाट से होगा।

यात्रा की शुरुआत मां नर्मदा चुनरी महोत्सव और दीपदान कार्यक्रम के साथ की जाएगी। इसके बाद 3 अगस्त की सुबह श्रद्धालु मां नर्मदा का पवित्र जल कांवड़ में भरकर पचमढ़ी स्थित भगवान जटाशंकर महादेव के दर्शन के लिए पदयात्रा शुरू करेंगे।

हजारों श्रद्धालु होते हैं शामिल

सोहागपुर की सुश्री राजो मालवीय के नेतृत्व में आयोजित होने वाली इस कांवड़ यात्रा में हर साल हजारों शिवभक्त, महिलाएं और युवा शामिल होते हैं। यात्रा का समापन 10 अगस्त को पचमढ़ी स्थित जटाशंकर महादेव मंदिर में जलाभिषेक के साथ होगा। इस दौरान श्रद्धालु विश्व कल्याण, देश की समृद्धि और सुख-शांति की कामना करेंगे।

2 अगस्त को होगा चुनरी महोत्सव और दीपदान

कांवड़ यात्रा का पहला कार्यक्रम 2 अगस्त को नर्मदापुरम के प्रसिद्ध सेठानी घाट पर आयोजित किया जाएगा। यहां मां नर्मदा की पूजा-अर्चना के साथ चुनरी महोत्सव और दीपदान किया जाएगा। इसके अगले दिन, 3 अगस्त को श्रद्धालु कांवड़ में नर्मदा जल भरकर यात्रा शुरू करेंगे।

Breaking News

जानिए यात्रा का पूरा कार्यक्रम

2 अगस्त

सेठानी घाट, नर्मदापुरम

चुनरी महोत्सव और दीपदान

3 अगस्त

आंचलखेड़ा (रात्रि विश्राम)

4 अगस्त

माखननगर गायत्री मंदिर में भोजन

सेमरी हरचंद में रात्रि विश्राम

5 अगस्त

सेमरी हरचंद से सोहागपुर

रात्रि विश्राम

6 अगस्त

पिपरिया में रात्रि विश्राम

7 अगस्त

मटकुली में रात्रि विश्राम

8 अगस्त

पगारा में रात्रि विश्राम

9 अगस्त

कतिया धर्मशाला में रात्रि विश्राम

10 अगस्त

पचमढ़ी स्थित जटाशंकर महादेव मंदिर में जलाभिषेक

आस्था और भक्ति का अनूठा संगम

श्रावण मास में निकलने वाली यह कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होकर भगवान शिव की आराधना करते हैं और नर्मदा जल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...Read More

Latest Posts