हरसूद में 50 से ज्यादा आंगनबाड़ी भवन जर्जर :25 स्कूलों के किचन शेड भी खस्ताहाल, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल

हरसूद विकासखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों के जर्जर किचन शेड चिंता का विषय बने हुए हैं। जिम्मेदार विभागों की अनदेखी के कारण बच्चों और मिड-डे मील बनाने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। कई बार प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

50 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर
जानकारी के अनुसार ब्लॉक में 50 से अधिक आंगनबाड़ी भवन जर्जर हो चुके हैं। कई केंद्रों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जबकि कई आंगनबाड़ियां किराए के कमरों में संचालित हो रही हैं। यहां बच्चों के बैठने की उचित व्यवस्था, खेल मैदान और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इसका असर बच्चों की उपस्थिति पर भी पड़ रहा है।

बारिश में टपकती छत, गिरता प्लास्टर
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के कई आंगनबाड़ी भवनों की छतों से सरिए बाहर आ चुके हैं। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है और कई जगह प्लास्टर गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। दीवारों में सीलन और जर्जर हालत के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

25 से ज्यादा स्कूलों के किचन शेड भी खस्ताहाल
ब्लॉक के 25 से अधिक सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के किचन शेड भी जर्जर हो चुके हैं। ऐसे हालात में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जान जोखिम में डालकर बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन तैयार कर रही हैं।

सडियापानी सरकार और प्रतापपुरा जैसे स्कूलों में किचन शेड खराब होने के कारण अतिरिक्त कमरों में भोजन बनाया जा रहा है। वहीं प्रतापपुरा में आंगनबाड़ी भवन का निर्माण वर्षों से अधूरा पड़ा है।
प्रस्ताव भेजे, लेकिन निर्माण शुरू नहीं
महिला एवं बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग की ओर से आंगनबाड़ी भवनों और किचन शेड के निर्माण के लिए जनपद पंचायत और जिला पंचायत को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है, जिससे लोगों में नाराजगी है।

अधिकारियों ने क्या कहा?
जनपद पंचायत हरसूद के सीईओ जितेंद्र ठाकुर ने बताया कि आंगनबाड़ी भवनों और किचन शेड निर्माण के प्रस्ताव जिला पंचायत को भेजे गए हैं। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
वहीं बीआरसी तरुण कुमार झिझौरे ने कहा कि ब्लॉक के 25 से अधिक जर्जर किचन शेड के निर्माण के लिए जनपद और जिला पंचायत को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। अब स्वीकृति मिलने का इंतजार है।












