दमोह में सड़क के लिए सड़क पर उतरे छात्र, परेशान छात्रों ने रोका रास्ता, प्रशासन ने किया निरीक्षण

दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हटा-पटेरा मार्ग के पास ग्राम मझगांव पतोल में सड़क की खराब हालत से परेशान हाईस्कूल के विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। उनका कहना था कि सड़क लंबे समय से खराब है, जिससे स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों के साथ ग्रामीणों को भी काफी परेशानी होती है।
लंबे समय से सड़क बनाने की मांग
छात्रों के मुताबिक गांव की सड़क की हालत लंबे समय से खराब है। बारिश के मौसम में परेशानी और बढ़ जाती है। स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को रोज इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का भी इसी सड़क से आना-जाना होता है। कई बार सड़क निर्माण की मांग उठाए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। आखिरकार विद्यार्थियों को विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे अधिकारी
छात्रों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने विद्यार्थियों से बातचीत की और उनकी समस्या को विस्तार से सुना। इसके बाद अधिकारियों ने मौके पर जाकर सड़क का निरीक्षण किया। उन्होंने सड़क की मौजूदा स्थिति देखी और निर्माण की जरूरत को लेकर जानकारी जुटाई। इस दौरान पटवारी भी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को उनकी समस्या पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। प्रशासन की समझाइश के बाद विद्यार्थियों ने चक्काजाम खत्म कर दिया। इसके बाद सड़क पर वाहनों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई।
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सड़क पर उतरने के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?
मझगांव पतोल की यह घटना सिर्फ एक सड़क की समस्या तक सीमित नहीं है। जिले में पहले भी कई बार बुनियादी सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों और विद्यार्थियों को विरोध प्रदर्शन करना पड़ा है। कहीं स्कूल भवन की खराब हालत चिंता बढ़ा रही है तो कहीं स्कूल तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क नहीं है। कई जगह ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर अधिकारियों के दफ्तरों और कलेक्ट्रेट तक पहुंचते हैं, तब जाकर उनकी समस्याओं पर ध्यान जाता है।
समय पर समाधान हो तो प्रदर्शन की जरूरत ही क्यों पड़े?
सवाल यह है कि आखिर लोगों को अपनी जरूरी समस्याओं के समाधान के लिए सड़क पर उतरने या चक्काजाम करने की जरूरत क्यों पड़ती है? अगर गांवों में सड़क, स्कूल भवन और दूसरी जरूरी सुविधाओं की नियमित जांच होती रहे और छोटी समस्याओं का समय रहते समाधान कर दिया जाए, तो लोगों को आंदोलन या चक्काजाम का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मझगांव पतोल के विद्यार्थियों का प्रदर्शन एक बार फिर यही सवाल खड़ा करता है कि क्या अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए आवाज उठाने के बाद ही प्रशासन तक लोगों की बात पहुंचती है?





















