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घी-तेल नहीं, नदी के पानी से जलती है ज्योत! क्या है मध्य प्रदेश के गड़ियाघाट वाली माताजी के मंदिर की अनसुनी कहानी?

मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में एक ऐसा मंदिर है, जहां नदी के पानी से दीपक जलने की मान्यता लोगों को हैरान करती है। कालीसिंध नदी के किनारे बसे गड़ियाघाट वाली माताजी के मंदिर से जुड़ी कहानी एक पुजारी के सपने से शुरू होती है। नवरात्रि के दौरान इस अनोखी परंपरा को लेकर लोगों की जिज्ञासा और बढ़ जाती है।
घी-तेल नहीं, नदी के पानी से जलती है ज्योत! क्या है मध्य प्रदेश के गड़ियाघाट वाली माताजी के मंदिर की अनसुनी कहानी?
कालीसिंध किनारे माता की अनोखी ज्योत

आगर-मालवा, मध्य प्रदेश। देशभर में कई मंदिर अपनी अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं के लिए जाने जाते हैं। कुछ जगहों से जुड़ी कहानियां ऐसी हैं, जिन्हें सुनकर लोग उनके पीछे का कारण जानना चाहते हैं। मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले का गड़ियाघाट वाली माताजी का मंदिर भी ऐसी ही एक जगह है। नलखेड़ा से करीब 15 किलोमीटर दूर गाड़िया गांव के पास कालीसिंध नदी के किनारे स्थित इस मंदिर में एक खास ज्योत की चर्चा होती है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, यहां घी या तेल के बजाय नदी के पानी से दीपक जलाया जाता है। इस परंपरा की कहानी लोगों का ध्यान खींचती है।

पानी से दीपक जलने की मान्यता ने दिलाई पहचान

गड़ियाघाट वाली माताजी का मंदिर केवल धार्मिक आस्था के लिए ही नहीं, बल्कि यहां की अनोखी मान्यता के कारण भी जाना जाता है। आमतौर पर दीपक जलाने के लिए तेल या घी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यहां कालीसिंध नदी के पानी से ज्योत जलाई जाती है। यही बात इस मंदिर को चर्चा में रखती है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मान्यता आस्था से जुड़ी है। वहीं, इस कहानी के बारे में पहली बार सुनने वाले लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इस परंपरा की शुरुआत कैसे हुई।

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जब पुजारी को सपने में हुए माता के दर्शन

स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित कहानी के अनुसार, मंदिर में पहले सामान्य तरीके से तेल का दीपक जलाया जाता था। फिर एक रात पुजारी को सपने में माता के दर्शन हुए। मान्यता है कि माता ने उन्हें कालीसिंध नदी के पानी से दीपक जलाने का संकेत दिया। इस सपने के बाद पुजारी ने अगली सुबह नदी से पानी लिया और उसे दीपक में डाल दिया। कहानी के मुताबिक, जब पुजारी ने बाती जलाई, तो दीपक जल उठा। इस घटना को देखकर वह खुद भी हैरान रह गए। धीरे-धीरे यह बात आसपास के गांवों में फैलने लगी। इसके बाद मंदिर की पहचान पानी से ज्योत जलने की मान्यता से जुड़ गई। हालांकि, यह विवरण स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित कहानी पर आधारित है।

बारिश के दिनों में बढ़ जाती है मुश्किल

इस मंदिर की एक और खास बात इसकी जगह से जुड़ी है। कालीसिंध नदी के किनारे होने के कारण बरसात में यहां पानी का स्तर बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में मंदिर परिसर में पानी भरने की आशंका रहती है और श्रद्धालुओं को पूजा करने में परेशानी हो सकती है। नदी का बढ़ता जलस्तर मंदिर तक पहुंचने के रास्ते को भी प्रभावित कर सकता है। इस तरह यहां की प्राकृतिक स्थिति भी मंदिर से जुड़ी चर्चा का हिस्सा बनी रहती है।

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आस्था के साथ बरकरार है रहस्य

गड़ियाघाट वाली माताजी के मंदिर की कहानी लोगों के बीच आस्था और जिज्ञासा, दोनों को बढ़ाती है। कुछ श्रद्धालु इसे माता का आशीर्वाद मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसके पीछे का कारण जानना चाहते हैं। पानी से दीपक जलने की मान्यता को प्रमाणित तथ्य मानने से पहले इसकी वैज्ञानिक पुष्टि जरूरी है। फिलहाल, यह मंदिर अपनी अनोखी कहानी और धार्मिक महत्व के कारण लोगों का ध्यान खींचता है। नवरात्रि के अवसर पर ऐसी मान्यताओं की चर्चा और भी बढ़ जाती है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...

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