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BSP निजीकरण विवाद,मैनेजमेंट का बड़ा बयान,‘प्लांट बिकने की खबरें झूठी और भ्रामक’

भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव ने उठाए थे सवाल, भाजपा विधायक रिकेश सेन ने मांगे सबूत,अडानी समूह के साथ गैस सप्लाई समझौते से जुड़ी चर्चाओं के बीच BSP प्रबंधन ने किया खंडन,भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के निजीकरण की चर्चाओं पर प्रबंधन ने स्पष्टीकरण जारी कर प्लांट बेचने से जुड़ी खबरों को झूठा और भ्रामक बताया है।
BSP निजीकरण विवाद,मैनेजमेंट का बड़ा बयान,‘प्लांट बिकने की खबरें झूठी और भ्रामक’

दुर्ग-भिलाई: भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के निजीकरण और अडानी समूह द्वारा इसे खरीदे जाने की चर्चाओं के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है। BSP प्रबंधन ने संयंत्र को बेचने की योजना से जुड़ी खबरों को झूठा और भ्रामक बताया है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने निजीकरण की आशंका पर सवाल उठाए थे। वहीं, भाजपा विधायक रिकेश सेन ने कांग्रेस नेताओं को अपने दावों के सबूत सार्वजनिक करने की चुनौती दी थी। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

BSP निजीकरण विवाद: प्रबंधन ने क्या कहा?

भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने सोशल मीडिया और कुछ प्रिंट मीडिया में चल रही निजीकरण संबंधी खबरों को खारिज किया है। प्रबंधन के मुताबिक, संयंत्र को बेचने की योजना से जुड़ी खबरें झूठी और भ्रामक हैं। बयान में इस्पात मंत्रालय के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर किए गए खंडन और प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक टीम की जानकारी का भी उल्लेख किया गया है। प्रबंधन के इस स्पष्टीकरण के बाद BSP के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है।

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भूपेश बघेल ने 14 अक्टूबर को उठाए थे सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 14 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर भिलाई इस्पात संयंत्र को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने दावा किया था कि अडानी समूह के प्रतिनिधि BSP का दौरा करने आ रहे हैं और केंद्र सरकार की नजर अब इस सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग पर है। बघेल ने BSP को छत्तीसगढ़ की पहचान और आत्मा बताते हुए कहा था कि इसे किसी भी कीमत पर बिकने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने भाजपा नेताओं से भी संयंत्र को बचाने के लिए आगे आने की अपील की थी।

देवेंद्र यादव का ऐलान—BSP को बचाने आखिरी दम तक लड़ेंगे

भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने भी संयंत्र के निजीकरण की आशंका का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि अंबानी-अडानी को BSP खरीदने नहीं दिया जाएगा। यादव के मुताबिक, भिलाई इस्पात संयंत्र केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, रोजगार और लोगों की भावनाओं से जुड़ा संस्थान है। उन्होंने कहा था कि संयंत्र को बचाने के लिए आखिरी समय तक लड़ाई जारी रखेंगे।

रिकेश सेन की चुनौती—दावे हैं तो सार्वजनिक करें सबूत

वैशाली नगर से भाजपा विधायक रिकेश सेन ने कांग्रेस नेताओं के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि उनके पास BSP को अडानी समूह या किसी अन्य निजी कंपनी को बेचने से जुड़े दस्तावेज हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। सेन ने कांग्रेस नेताओं पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि संयंत्र को निजी कंपनी को बेचने की कोशिश हुई, तो वे खुद विरोध में धरने पर बैठेंगे। उन्होंने भूपेश बघेल और देवेंद्र यादव के घरों के सामने धरना देने की बात भी कही थी।

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अडानी टोटल गैस से समझौता बना चर्चा की वजह

BSP और अडानी टोटल गैस लिमिटेड (ATGL) के बीच पाइप के जरिए प्राकृतिक गैस (PNG) की आपूर्ति को लेकर समझौता हुआ है। इसका उद्देश्य संयंत्र और टाउनशिप तक गैस पहुंचाना बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों कंपनियों के बीच 16 जुलाई 2026 को समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ था। इसी समझौते के सिलसिले में अधिकारियों के दौरे की चर्चा सामने आई। हालांकि, गैस आपूर्ति के लिए हुआ समझौता अपने आप में संयंत्र के निजीकरण या बिक्री का प्रमाण नहीं है।

भूपेश बघेल का पलटवार—प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने प्रदर्शन करें

भूपेश बघेल ने भाजपा विधायक रिकेश सेन के धरने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि उन्हें विरोध करना है, तो प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने जाकर प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस नेताओं के घरों के सामने धरना देने से क्या हासिल होगा। बघेल ने आरोप लगाया कि राज्य में पहले कोयला खदानों और पावर प्लांट को लेकर चिंताएं सामने आईं और अब लौह अयस्क की खदानों तथा BSP के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भिलाई के लोगों को संयंत्र की सुरक्षा के लिए अभी से तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने रिकेश सेन से केंद्र सरकार की सूची में नगरनार और भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थिति की जानकारी लेने की भी बात कही।

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BSP को लेकर अब आगे क्या?

फिलहाल BSP प्रबंधन ने निजीकरण संबंधी खबरों को भ्रामक बताया है। दूसरी ओर, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अडानी टोटल गैस के साथ प्राकृतिक गैस आपूर्ति समझौते और संभावित अधिकारियों के दौरे को लेकर उठे सवालों के बीच संयंत्र के भविष्य पर चर्चा बनी हुई है। महत्वपूर्ण बात: गैस आपूर्ति समझौते, अधिकारियों के दौरे और संयंत्र की बिक्री या निजीकरण को अलग-अलग विषयों के रूप में देखना जरूरी है। उपलब्ध विवरण के आधार पर BSP की बिक्री को तय मानना उचित नहीं होगा।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...

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