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LPG vs Induction :आपके किचन को किसमें फायदा, LPG सिलेंडर या इंडक्शन, कौन महंगा- कौन सस्ता, जानें सारे जवाब

इसके अलावा कमर्शियल इंडक्शन सेटअप लगाने में करीब साढ़े तीन लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है। यदि बिजली चली जाए तो इतने बड़े लोड के लिए जनरेटर चलाना भी काफी महंगा पड़ता है। यही कारण है कि बड़े होटल और रेस्टोरेंट फिलहाल गैस पर ही ज्यादा निर्भर हैं।
आपके किचन को किसमें फायदा, LPG सिलेंडर या इंडक्शन, कौन महंगा- कौन सस्ता, जानें सारे जवाब
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब भारत के लिए दिन पर दिन बड़ी मुसीबत खड़ी कर रहा है। जहां पहले देश में तेल संकट खड़ा हुआ था वहीं अब देशभर में लोगों के किचन की संजीवनी यानि कि LPG सिलेंडर के रूप में नया संकट खड़ा हुआ है। जिसने लोगों की नींदे उड़ा दी है। लोग अपन ऑफिस से छुट्टी लेकर लंबी लाइनों में खड़े होकर सिलेंडर भरवा रहे हैं।

    रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच अब कई घरों में यह सवाल उठने लगा है कि खाना बनाना गैस सिलेंडर से सस्ता पड़ता है या इंडक्शन चूल्हे पर। हाल के समय में मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव और ऊर्जा बाजार पर उसके असर ने इस बहस को और तेज कर दिया है। ऐसे में लोग अब खर्च और सुविधा दोनों को ध्यान में रखकर विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

    मिडिल ईस्ट से 57 प्रतिशत गैस की आपूर्ति होती है पूरी

    भारत में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। आंकड़ों के अनुसार देश अपनी जरूरत का करीब 57 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। अगर उस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो गैस की आपूर्ति धीमी या महंगी हो सकती है। इसी वजह से कुछ जगहों पर गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें भी देखने को मिली हैं। होटल, ढाबे और छोटे रेस्टोरेंट भी डिलीवरी में देरी की समस्या से जूझ रहे हैं।

    गैस चूल्हा या इंडक्शन कौनसा ऑप्शन किफायती 

    अगर खर्च की बात करें तो कई मामलों में इंडक्शन चूल्हा गैस से सस्ता साबित हो सकता है। एक सामान्य 14.2 किलो का गैस सिलेंडर करीब 913 रुपये का आता है, जो आमतौर पर एक महीने तक चलता है। दूसरी तरफ, उतना ही खाना इंडक्शन पर पकाने के लिए लगभग 78 यूनिट बिजली की जरूरत पड़ती है। यदि बिजली का दाम 8 रुपये प्रति यूनिट माना जाए, तो कुल खर्च लगभग 624 रुपये होगा।

    इस हिसाब से एक महीने में करीब 289 रुपये तक की बचत संभव हो सकती है। इसकी एक बड़ी वजह इंडक्शन की अधिक ऊर्जा दक्षता है, जिसमें गर्मी सीधे बर्तन तक पहुंचती है और ऊर्जा की बर्बादी कम होती है।

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    दोनों तकनीकों में क्या है अंतर

    • ऊर्जा क्षमता: गैस की ऊर्जा क्षमता लगभग 40 प्रतिशत मानी जाती है, जबकि इंडक्शन में यह करीब 90 फीसदी तक होती है।

    • ईंधन: गैस चूल्हा एलपीजी सिलेंडर से चलता है, जबकि इंडक्शन बिजली पर निर्भर करता है।

    • बर्तन: गैस पर लगभग हर तरह के बर्तन इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन इंडक्शन में विशेष बर्तनों की जरूरत होती है।

    • बिजली कटौती: बिजली न होने पर इंडक्शन काम नहीं करता, जबकि गैस चूल्हा सामान्य रूप से चलता रहता है।

    रेस्टोरेंट में क्यों नहीं बढ़ रहा इंडक्शन का इस्तेमाल

    घरों के लिए इंडक्शन अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन बड़े होटल और रेस्टोरेंट अभी भी गैस को प्राथमिकता देते हैं। इसकी वजह यह है कि बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली लोड की जरूरत होती है। इसके लिए महंगा हाई टेंशन कनेक्शन लेना पड़ता है।

    इसके अलावा कमर्शियल इंडक्शन सेटअप लगाने में करीब साढ़े तीन लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है। यदि बिजली चली जाए तो इतने बड़े लोड के लिए जनरेटर चलाना भी काफी महंगा पड़ता है। यही कारण है कि बड़े होटल और रेस्टोरेंट फिलहाल गैस पर ही ज्यादा निर्भर हैं।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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