कुल मिलाकर सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर पारदर्शिता और चर्चा की मांग कर रहा है। ग्लोबल टेंशन के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तर पर बहस जारी है।
सोमवार 16 मार्च को राज्यसभा में एलपीजी गैस की किल्लत को लेकर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए कि देश में गैस की उपलब्धता की स्थिति क्या है। इस बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें बीच में टोका, जिसके बाद सदन में कुछ देर तक हंगामा भी हुआ। विपक्ष का कहना था कि जनता को गैस की उपलब्धता को लेकर भरोसा दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है।
केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कहा कि देश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सामान्य है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार के अनुसार घरेलू एलपीजी रिफिल बुकिंग में हाल के दिनों में कमी आई है। आंकड़ों के मुताबिक 13 मार्च को जहां रिफिल बुकिंग करीब 88 लाख 8 हजार थी, वहीं अब यह घटकर लगभग 77 लाख रह गई है। सरकार का कहना है कि यह गिरावट मांग में सामान्य उतार-चढ़ाव की वजह से है और इसका सप्लाई संकट से कोई संबंध नहीं है।
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सदन में चर्चा के दौरान बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर संकट के समय भी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति भारत की वजह से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण बनी है।
नड्डा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के एक नेता सिलेंडरों की जमाखोरी करते हुए पकड़े गए हैं और विपक्ष लोगों को उकसाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पांबदी कड़ा कर दी है। यह समुद्री मार्ग भारत सहित कई देशों के लिए तेल और गैस आपूर्ति का अहम रास्ता है। हालांकि हाल ही में ईरान ने दो भारतीय जहाजों को इस मार्ग से निकलने की अनुमति दे दी है और उम्मीद है कि वे जल्द भारत पहुंच जाएंगे।