मंगल से धरती पर आया महंगा रहस्यमई पत्थर का टुकड़ा, न्यूयॉर्क में होने जा रही है ऐतिहासिक नीलामी

पृथ्वी पर अब तक मिला सबसे बड़ा मंगल ग्रह का उल्कापिंड अब नीलामी के लिए तैयार है। न्यूयॉर्क स्थित विश्वविख्यात नीलामी संस्था सोथबीज (Sotheby’s) इस अद्भुत चट्टान को 16 जुलाई को नीलाम करने जा रही है। इसका नाम है NWA 16788, और इसका वजन करीब 24.6 किलोग्राम (54 पाउंड) है। यह टुकड़ा एक बैग के आकार जितना है, लेकिन वैज्ञानिक और अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए यह अनमोल धरोहर है।
क्या है NWA 16788 उल्कापिंड की खासियत?
यह टुकड़ा मंगल ग्रह पर एक बड़े विस्फोट या उल्कापिंड की टक्कर के बाद अंतरिक्ष में पहुंचा और हजारों किलोमीटर की यात्रा कर सहारा रेगिस्तान में गिरा।
- यह चट्टान शेरगोटाइट वर्ग की है, जो केवल मंगल ग्रह पर पाई जाती है।
- धरती पर अब तक लगभग 77,000 उल्कापिंड मिले हैं, जिनमें से मंगल ग्रह से आए सिर्फ 400 ही हैं।
- लेकिन इन 400 में से भी NWA 16788 सबसे बड़ा और बेहतरीन संरक्षित नमूना माना जा रहा है।
क्या है इसकी अनुमानित कीमत?
सोथबीज नीलामी घर ने इसकी कीमत 2 से 4 मिलियन डॉलर (15 करोड़ से 33 करोड़ रुपए तक) आंकी है। यह नीलामी 16 जुलाई को न्यूयॉर्क में होगी, लेकिन 8 से 15 जुलाई तक इसे आम जनता के लिए प्रदर्शन में रखा गया है। नीलामी में हिस्सा लेने वाले बोलीदाता क्रिप्टोकरेंसी से भी भुगतान कर सकेंगे, जैसे कि Bitcoin, Ethereum या USDC।
नीलामी के दौरान क्या होगा खास
स्थान: सोथबीज, न्यूयॉर्क
तारीख: 16 जुलाई 2025
समय: दोपहर 2 बजे (UTC)
प्रदर्शन: 8–15 जुलाई तक, आम लोगों के लिए ओपन डिस्प्ले
इस मंगल टुकड़े पर वैज्ञानिक क्या कहते हैं ?
कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि इतिहास और विज्ञान के इस दुर्लभ नमूने को संग्रहकर्ताओं के बजाय म्यूजियम या शोध संस्थानों में रखा जाना चाहिए।
प्रो. स्टीव ब्रूसैट (University of Edinburgh) ने कहा: “इतना दुर्लभ टुकड़ा सार्वजनिक अध्ययन और प्रदर्शन के लिए होना चाहिए।”
वहीं दूसरी ओर, प्रो. जूलिया कार्टराइट (University of Central Florida) मानती हैं कि निजी संग्रहकर्ताओं के पास भी यह चट्टान सुरक्षित रह सकती है, बशर्ते वह शोध के लिए खुली हो।
मंगल ग्रह से जुड़े उल्कापिंड इतने अनमोल क्यों?
मंगल ग्रह पर मानव का अब तक सीधा आगमन नहीं हुआ है। ऐसे में वहाँ की मिट्टी, चट्टान या तत्वों को जानने का सबसे बेहतरीन तरीका यही उल्कापिंड होते हैं। इन टुकड़ों के जरिए वैज्ञानिक मंगल की भूगर्भीय संरचना, वायुमंडल और जीवन की संभावनाओं पर शोध करते हैं।




















