कुलगाम ऑपरेशन का 9वां दिन: दो जवान शहीद, एक आतंकी ढेर; जंगल में अब भी 2-3 आतंकियों के छिपे होने की आशंका

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कुलगाम ऑपरेशन का 9वां दिन: दो जवान शहीद, एक आतंकी ढेर; जंगल में अब भी 2-3 आतंकियों के छिपे होने की आशंका
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    कुलगाम। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के अखल वन क्षेत्र में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ का आज नौवां दिन है। शुक्रवार रात से जारी गोलीबारी और धमाकों की आवाजें पूरे इलाके में गूंजती रहीं। इस दौरान सेना के लांस नायक प्रितपाल सिंह और सिपाही हरमिंदर सिंह शहीद हो गए, जबकि दो अन्य जवान घायल हुए। अब तक इस ऑपरेशन में कुल 10 जवान घायल हो चुके हैं।

    1 अगस्त से जारी ‘ऑपरेशन अखल’

    सुरक्षाबलों ने 1 अगस्त को आतंकियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद ‘ऑपरेशन अखल’ शुरू किया था। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया। माना जा रहा है कि जंगल में 2 से 3 आतंकी अब भी छिपे हुए हैं, जो प्राकृतिक गुफाओं और घने पेड़ों का फायदा उठाकर स्थान बदल रहे हैं।

    अब तक तीन आतंकी मारे जा चुके

    अभियान के पहले ही दिन सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में एक आतंकी को मार गिराया था। 2 अगस्त को दो और आतंकियों को ढेर किया गया। इनमें पुलवामा का हारिस नजीर डार भी शामिल था, जो सी-कैटेगरी का आतंकी था और 14 लोकल आतंकियों की उस सूची में था जिसे पहलगाम हमले के बाद 26 अप्रैल को जारी किया गया था। उसके पास से AK-47 राइफल, मैगजीन, ग्रेनेड और गोला-बारूद बरामद हुआ।

    14 में से 7 आतंकी ढेर

    खुफिया एजेंसियों की सूची में शामिल 14 स्थानीय आतंकियों में से अब तक 7 मारे जा चुके हैं। हारिस नजीर के अलावा शोपियां और पुलवामा में मई महीने के एनकाउंटर में 6 आतंकी मारे गए थे। 28 जुलाई को ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड समेत 3 आतंकियों को भी खत्म किया गया था।

    पहलगाम हमले से जुड़ा था ‘ऑपरेशन महादेव’

    गौरतलब है कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले में 26 टूरिस्ट मारे गए थे। इसके बाद शुरू हुई रणनीतिक कार्रवाई के तहत 28 जुलाई को तीन पाकिस्तानी आतंकियों को मुठभेड़ में ढेर किया गया था। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बताया था कि आतंकियों की पहचान पाकिस्तानी वोटर ID, चॉकलेट और कारतूस से हुई। तीनों आतंकियों के नाम थे- सुलेमान, अफगान और जिब्रान।

    दुर्गम इलाका, ड्रोन और हेलीकॉप्टर से निगरानी

    अखल जंगल क्षेत्र बेहद दुर्गम है और यहां आतंकियों के लिए प्राकृतिक ठिकाने मौजूद हैं। सुरक्षाबल आतंकियों के ठिकानों का पता लगाने के लिए ड्रोन, हेलीकॉप्टर और पैरा कमांडो का इस्तेमाल कर रहे हैं। सेना के वरिष्ठ अधिकारी, जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रमुख नलिन प्रभात और उत्तरी कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा लगातार इस ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं।

    सबसे लंबा चला रहा आतंक विरोधी अभियान

    अखल जंगल का यह अभियान घाटी में पिछले कई दशकों में सबसे लंबे समय तक चला रहा आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन बन गया है। सुरक्षाबलों का कहना है कि वे इलाके को पूरी तरह सुरक्षित करने और बचे हुए आतंकियों को खत्म करने तक ऑपरेशन जारी रखेंगे।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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