देश का अनोखा शिव मंदिर!जहां लेटी मुद्रा में विराजमान हैं महादेव, हर साल बढ़ता है शिवलिंग का आकार

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पवित्र महीने में देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। भारत में भगवान शिव के कई प्राचीन और चमत्कारी मंदिर हैं, लेकिन उत्तराखंड का कोटेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी मान्यता और रहस्यमयी शिवलिंग के कारण विशेष पहचान रखता है। इस मंदिर में भगवान शिव का शिवलिंग सामान्य मंदिरों की तरह खड़ा नहीं, बल्कि विश्राम मुद्रा यानी लेटी हुई अवस्था में स्थापित है।
भागीरथी नदी के तट पर स्थित है कोटेश्वर महादेव मंदिर
कोटेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है। यह मंदिर नरेंद्रनगर ब्लॉक के पट्टी क्वीली क्षेत्र में भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। प्राकृतिक सुंदरता से घिरा यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी शांत और दिव्य वातावरण के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के साथ-साथ प्रकृति की खूबसूरती का भी आनंद लेते हैं। सावन के महीने में इस मंदिर में भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। दूर-दूर से शिव भक्त यहां पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।
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लेटी हुई मुद्रा में विराजमान हैं भगवान शिव
आमतौर पर देशभर के शिव मंदिरों में शिवलिंग खड़े आकार में देखने को मिलते हैं, लेकिन कोटेश्वर महादेव मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां मौजूद विश्राम मुद्रा वाला शिवलिंग है मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान शिव लेटी हुई अवस्था में विराजमान हैं। यही अनोखी विशेषता इस मंदिर को अन्य शिव मंदिरों से अलग बनाती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह शिवलिंग स्वयंभू है और इसमें भगवान शिव की दिव्य शक्ति मौजूद है।
हर साल जौ के दाने के बराबर बढ़ता है शिवलिंग!
कोटेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध मान्यता शिवलिंग के आकार को लेकर है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के अनुसार, यहां मौजूद शिवलिंग का आकार हर साल एक जौ के दाने के बराबर बढ़ता है। भक्त इसे भगवान शिव की दिव्य शक्ति और चमत्कार का प्रतीक मानते हैं। हालांकि यह धार्मिक मान्यता है, लेकिन इसी विश्वास के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन करने पहुंचते हैं।
भस्मासुर से जुड़ी है मंदिर की पौराणिक कथा
कोटेश्वर महादेव मंदिर को लेकर कई धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि जब भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव ने इस स्थान पर शरण ली थी, तब उन्होंने इसी गुफा में विश्राम किया था। कहा जाता है कि भगवान शिव ने यहां कुछ समय बिताया था, जिसके कारण यह स्थान शिव भक्तों के लिए बेहद पवित्र माना जाता है।
कोटेश्वर नाम का है खास महत्व
कोटेश्वर महादेव मंदिर के नाम का भी धार्मिक महत्व है। मान्यता के अनुसार, ‘कोटेश्वर’ का अर्थ होता है एक करोड़ देवताओं का निवास। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस पवित्र स्थान पर देवी-देवताओं का वास है और यहां पूजा करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मंदिर परिसर में कई पवित्र स्थान भी मौजूद हैं, जिनमें शिव कुंड, पार्वती कुंड और सूर्य कुंड प्रमुख हैं।
जलाभिषेक से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, ऐसी है मान्यता
भक्तों का मानना है कि कोटेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु गंगाजल और पवित्र जल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।











