Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

पुलिस का मुखबिर तंत्र फेल या बदमाशों पर भरोसा? 11 साल पुराने हत्याकांड में आरोपी पकड़ने के तरीके पर उठे सवाल

खजराना पुलिस ने कृष्णा हत्याकांड का खुलासा कर थपथपाई पीठ, आरोप है- उज्जैन से आरोपी को बुलाने में हिस्ट्रीशीटर की ली मदद; तीन अन्य लोगों को पकड़कर छोड़ने की भी चर्चा
11 साल पुराने हत्याकांड में आरोपी पकड़ने के तरीके पर उठे सवाल

इंदौर। पुलिस का काम अपराधियों को तलाशना और कानून के शिकंजे में लाना है, लेकिन जब किसी गंभीर हत्या के आरोपी तक पहुंचने के लिए एक बदमाश की मदद लेने की बात सामने आए तो पुलिस के मुखबिर तंत्र और कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खजराना पुलिस के वर्ष 2015 के कृष्णा हत्याकांड के खुलासे को लेकर अब ऐसी ही कहानी चर्चा में है। पुलिस ने 12 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 17 वर्षीय कृष्णा के अंधे कत्ल की गुत्थी 11 साल बाद सुलझाने का दावा किया। वरिष्ठ अधिकारियों ने टीम की पीठ भी थपथपाई, लेकिन अब पर्दे के पीछे आरोपी तक पहुंचने के तरीके को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

/img/67/1786939570520

 

पुलिस का आधिकारिक दावा है कि मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी आरिफ तक पहुंच बनाई गई। वहीं सामने आई जानकारी में दावा किया जा रहा है कि उज्जैन में रह रहे आरिफ को इंदौर तक लाने में पुलिस से जुड़े एक कथित खुफिया सूत्र और शहर के एक हिस्ट्रीशीटर की भूमिका रही। यदि यह आरोप सही है तो सवाल सीधा है। जिस आरोपी का पता पुलिस को लग चुका था, उसे पकड़ने के लिए पुलिस को खुद उज्जैन जाने के बजाय बदमाश की मदद क्यों लेनी पड़ी?

ये भी पढ़ें: ‘वंदे मातरम’ के अपमान पर भाजपा का आक्रोश: गांधी हॉल से गांधी प्रतिमा तक निकला कैंडल मार्च

बदमाश से संपर्क, फिर उज्जैन से आरोपी को बुलाने की ‘पटकथा’

इस पूरे घटनाक्रम में खजराना थाने में पदस्थ बताए जा रहे पंकज सांवरिया का नाम चर्चा में है। आरोप है कि उन्होंने शहर के चर्चित बदमाश भय्यू सुरीला से संपर्क किया। इसके बाद अगस्त के पहले सप्ताह में दोनों के बीच मुलाकात हुई और उज्जैन में रह रहे आरिफ को किसी भी तरह इंदौर लाने की योजना बनाई गई। बताया जा रहा है कि भय्यू सुरीला उज्जैन पहुंचा और आरिफ से संपर्क किया। कथित तौर पर उसने कार खराब होने का बहाना बनाया और आरिफ से मदद मांगी। इसके बाद आरिफ इंदौर आने के लिए तैयार हो गया। यहीं से पुलिस की कार्रवाई को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। अगर आरोपी की पहचान और ठिकाना पुलिस के पास था तो उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम उज्जैन क्यों नहीं गई? क्या 11 साल पुराने हत्या के आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस को अपने ही इलाके के हिस्ट्रीशीटर का सहारा लेना पड़ा?

ये भी पढ़ें: बुजुर्ग कर्मचारी की चाकू से हत्या: रेलवे ट्रैक के पास फेंका शव,श्वान नोचते मिले

इंदौर पहुंचा तो अकेला नहीं था, तीन और लोग भी पकड़े गए

मामला यहीं खत्म नहीं होता। आरोप है कि आरिफ जब इंदौर पहुंचा तो पुलिस से जुड़े कथित खुफिया कर्मचारी ने उसे तीन अन्य लोगों के साथ पकड़ लिया। इसके बाद इन लोगों को करीब 72 घंटे तक अलग-अलग स्थानों पर रखने की बात सामने आ रही है। आरोप यह भी है कि पूछताछ के बाद तीन लोगों को कथित रूप से ‘शुभ-लाभ’ के बाद छोड़ दिया गया। हालांकि इस आरोप की पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है। यदि ऐसा हुआ है तो सवाल उठता है कि इन लोगों को किस आधार पर हिरासत में लिया गया और बाद में किस प्रक्रिया के तहत छोड़ा गया?

ये भी पढ़ें: सावन सोमवार पर अशोकधाम मंदिर में मची भगदड़, 50 हजार की भीड़ के बीच कई श्रद्धालुओं की मौत

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपलब्धि, पर्दे के पीछे की कहानी में सवाल

12 अगस्त को खजराना पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कृष्णा हत्याकांड का खुलासा किया था। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने कृष्णा को लिफ्ट देने के बहाने अपने साथ लिया और सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ नशा किया। इसके बाद लूट का विरोध करने पर चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के बाद बाइक सहित अन्य साक्ष्यों को जलाकर और छिपाकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई। पुलिस ने अकील और आरिफ को गिरफ्तार किया, जबकि तीसरे आरोपी परवेज की मौत हो चुकी है। आरोपियों से लूट का सामान और अन्य सामग्री बरामद करने का भी पुलिस ने दावा किया। हत्याकांड का खुलासा निश्चित तौर पर पुलिस की उपलब्धि है, लेकिन अब सवाल खुलासे से ज्यादा उस तरीके पर है, जिसके जरिए आरोपी तक पहुंचने की बात सामने आ रही है।

ये भी पढ़ें: नागपंचमी पर साल में सिर्फ एक बार खुलता है ये मंदिर, आधी रात पट खुलते ही उज्जैन में उमड़ा भक्तों का सैलाब

मुखबिर तंत्र जरूरी, लेकिन बदमाश को ही ‘ऑपरेशन पार्टनर’ बनाना कितना सही?

अपराधियों की धरपकड़ में मुखबिर तंत्र हमेशा से पुलिस की ताकत रहा है। कई बार अपराधी ही दूसरे अपराधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। लेकिन किसी हिस्ट्रीशीटर के जरिए हत्या के आरोपी को दूसरे शहर से बुलाने का आरोप पुलिस की पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करता है। आज पुलिस के पास साइबर सेल, मोबाइल लोकेशन, तकनीकी निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग जैसे संसाधन हैं। ऐसे में यदि आरोपी वर्षों से उज्जैन में रहकर ऑटो चला रहा था तो पुलिस टीम उसके ठिकाने तक सीधे क्यों नहीं पहुंच सकी? सवाल यह भी है कि क्या पुलिस का आधिकारिक नेटवर्क कमजोर था या बदमाश का नेटवर्क ज्यादा मजबूत?

ये भी पढ़ें: Bilaspur News: खूंटाघाट वेस्टवियर में खतरनाक सेल्फी का खेल, पुलिस ने रोका हादसा तेज बहाव के करीब पहुंचकर बना रहे थे रील, सुरक्षा गेट लांघकर खतरनाक इलाके में पहुंचे लोग

बदमाश के हाथ में वर्दी होती तो क्या वह भी केस सुलझा देता?

मुद्दा यह नहीं है कि आरिफ अपराधी है या नहीं। उसके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज होने की बात पुलिस रिकॉर्ड में है। भय्यू सुरीला का भी आपराधिक रिकॉर्ड बताया जाता है। अपराधी के खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि पुलिस का काम अपराधियों को पकड़ना है, अपराधियों को पुलिस की भूमिका में खड़ा करना नहीं। यदि किसी हिस्ट्रीशीटर ने पुलिस की मदद की, तो उसकी भूमिका क्या थी? क्या वह अधिकृत मुखबिर था? उसे आरोपी को बुलाने के लिए किसने कहा? क्या पूरी प्रक्रिया की कोई रिकॉर्डिंग या आधिकारिक दस्तावेज मौजूद है? और सबसे अहम—तीन अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया था तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई और उन्हें क्यों छोड़ा गया?

खबर के संबंध में जब थाना प्रभारी मनोज सेंधव और प्रधान आरक्षक पंकज से उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। 

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

Latest Posts