नागपंचमी पर साल में सिर्फ एक बार खुलता है ये मंदिर, आधी रात पट खुलते ही उज्जैन में उमड़ा भक्तों का सैलाब

उज्जैन। नागपंचमी के पावन पर्व पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर के पट सोमवार की मध्यरात्रि 12 बजे खोले गए। कपाट खुलने के बाद विधि-विधान से पूजा की गई और श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे दर्शन की व्यवस्था शुरू हुई। महाकाल मंदिर के तीसरे तल पर स्थित इस मंदिर के दर्शन वर्ष में केवल नागपंचमी के अवसर पर होते हैं। इस वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में भक्त उज्जैन पहुंचे हैं। नागपंचमी के साथ सावन का तीसरा सोमवार होने से महाकाल की सवारी भी निकलेगी, जिससे शहर में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
आधी रात में खुला नागचंद्रेश्वर मंदिर
नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर के पट रात 12 बजे खोले गए। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत महाराज ने त्रिकाल पूजा की। पूजा पूरी होने के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू कर दिए गए। मंदिर में लगातार 24 घंटे तक भक्त भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर सकेंगे। पहली बार श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 300 रुपये की स्लॉट टिकट व्यवस्था भी रखी गई है।
नागचंद्रेश्वर की तीन बार होगी पूजा
नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की खास परंपरा है। पहली पूजा 16 अगस्त की रात 12 बजे कपाट खुलने के साथ हुई। दूसरी पूजा 17 अगस्त को दोपहर 12 बजे अखाड़े की ओर से की जाएगी। वहीं तीसरी विशेष पूजा शाम को भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद मंदिर के पुजारी और पुरोहित करेंगे। इस दौरान भगवान नागचंद्रेश्वर का विशेष श्रृंगार और पूजा-अर्चना की जाएगी।
तीसरे तल पर विराजते हैं भगवान नागचंद्रेश्वर
महाकालेश्वर मंदिर के तीसरे तल पर भगवान नागचंद्रेश्वर का मंदिर है। यहां भगवान शिव माता पार्वती और भगवान गणेश के साथ नाग के ऊपर विराजमान हैं। प्रतिमा में नाग भगवान शिव के गले और भुजाओं पर भी दिखाई देते हैं। साथ में नंदी और सिंह की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं। यही अनोखा स्वरूप नागपंचमी पर भक्तों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहता है।
हजारों नहीं, लाखों भक्तों की आस्था
नागपंचमी और सावन सोमवार एक साथ पड़ने से उज्जैन में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। श्रद्धालु बाबा महाकाल, कालभैरव और शहर के दूसरे प्रमुख मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। महाकाल की सवारी भी सोमवार को नगर भ्रमण पर निकलेगी। ऐसे में मंदिर क्षेत्र और शहर के प्रमुख रास्तों पर दिनभर काफी भीड़ रहने की संभावना है।
2400 पुलिसकर्मी संभाल रहे सुरक्षा
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए करीब 2,400 पुलिसकर्मियों को 36 घंटे तक ड्यूटी पर लगाया गया है। इसके साथ ही 200 से ज्यादा CCTV कैमरों से प्रमुख रास्तों, प्रवेश और निकासी स्थानों पर नजर रखी जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी, तहसीलदार, पटवारी और पुलिस अधिकारी भी व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस का प्रयास है कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और आसान दर्शन मिल सकें।
सामान्य दर्शन के लिए तय किया गया रास्ता
सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए कर्कराज पार्किंग के पास से प्रवेश की व्यवस्था की गई है। यहां से भक्त भील समाज धर्मशाला, गोंड मोहल्ला, चारधाम, हरसिद्धि चौराहा और बड़ा गणेश मार्ग से आगे बढ़ेंगे। प्रवेश द्वार नंबर 4 से मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद विश्रामधाम के रास्ते नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन होंगे। दर्शन के बाद प्रीपेड बूथ से बाहर निकलकर 24 खंबा रोड के रास्ते कर्कराज की ओर जाना होगा।
शीघ्र दर्शन के लिए अलग मार्ग
शीघ्र दर्शन की सुविधा लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए हरसिद्धि पाल की तरफ से प्रवेश रखा गया है। भक्त बड़ा गणेश मार्ग से होते हुए प्रवेश द्वार नंबर 5 से मंदिर परिसर में जाएंगे। इसके बाद विश्रामधाम से नागचंद्रेश्वर मंदिर पहुंचकर दर्शन कर सकेंगे। दर्शन के बाद प्रीपेड बूथ से निकासी होगी और 24 खंबा रोड से होते हुए श्रद्धालु वापस हरसिद्धि पाल की ओर जा सकेंगे।
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मंदिर से जुड़ी है पुरानी मान्यता
नागचंद्रेश्वर मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसका निर्माण परमार राजा भोज ने करीब 1050 ईस्वी में करवाया था। बाद में 1732 में सिंधिया शासन के समय इसका जीर्णोद्धार हुआ। यह भी कहा जाता है कि मंदिर में स्थापित नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी। महाकाल मंदिर का शिखर तीन हिस्सों में बंटा है, जिसमें नीचे महाकालेश्वर, दूसरे हिस्से में ओंकारेश्वर और सबसे ऊपर नागचंद्रेश्वर भगवान विराजमान हैं।












