श्रीनगर। कश्मीर घाटी में इन दिनों एक ऐसी लहर चल रही है जिसने देश की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर डाल दिया है। पिछले महज 20 दिनों के भीतर कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों से ईरान की मदद के नाम पर लगभग 17.91 करोड़ रुपये का भारी-भरकम चंदा जुटाया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस चंदे का सबसे बड़ा हिस्सा करीब 9.5 करोड़ रुपये अकेले बड़गाम जिले से आया है। दावा किया जा रहा है कि यह पैसा संघर्ष से प्रभावित ईरानी नागरिकों की मदद के लिए है लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि इतनी बड़ी रकम का इस्तेमाल 'टेरर फंडिंग' या अन्य संदिग्ध गतिविधियों में किया जा सकता है।
घाटी में यह फंडरेजिंग अभियान बेहद संगठित तरीके से चलाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक जुटाए गए कुल फंड का 85% हिस्सा शिया समुदाय की ओर से आया है। दान देने वालों में केवल अमीर तबका ही नहीं बल्कि आम ग्रामीण और महिलाएं भी शामिल हैं। लोग केवल नकद ही नहीं बल्कि अपनी मेहनत की कमाई से बचाए गए सोने-चांदी के गहने और कीमती बर्तन तक दान कर रहे हैं। बड़गाम के गांवों से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जहां छोटे बच्चे अपने गुल्लक तोड़ रहे हैं और महिलाएं अपनी शादी के गहने सौंप रही हैं।
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इस अभियान को हाई-टेक बनाने के लिए बकायदा QR कोड और UPI का सहारा लिया जा रहा है। खुफिया सूत्रों के अनुसार भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने इस काम के लिए एक विशेष बैंक अकाउंट भी साझा किया है। अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक माध्यमों का ही प्रयोग करें। बिना किसी जांच के बिचौलियों को पैसा देना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि पहले भी चैरिटी के नाम पर जुटाए गए धन के दुरुपयोग के मामले सामने आ चुके हैं।
घाटी में इतनी बड़ी राशि का अचानक जमा होना सामान्य नहीं माना जा रहा है। खुफिया एजेंसियों ने इस पूरे फंड फ्लो की निगरानी बढ़ा दी है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं। जिनमें पहला कारण है बिचौलियों की भूमिका, इसमें एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या इस पैसे का कुछ हिस्सा स्थानीय स्तर पर असामाजिक तत्वों के पास तो नहीं रुक रहा? दूसरा कारण है विदेशी प्रभाव , इसमें कुछ रिपोर्टों से संकेत मिले हैं कि कश्मीर के कुछ धार्मिक संगठन और नेता ईरान से आर्थिक मदद प्राप्त करते हैं। एजेंसियों को डर है कि इस चंदे का इस्तेमाल भविष्य में राजनीतिक या कट्टरपंथी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा तीसरा कारण है पारदर्शिता का अभाव, जिसमें नकद में लिए जा रहे चंदे का कोई पुख्ता रिकॉर्ड नहीं है जिससे इसके गलत हाथों में जाने की आशंका प्रबल हो जाती है।
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बड़गाम जिला इस अभियान का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। यहां की धार्मिक एकजुटता और ईरान के प्रति भावनात्मक लगाव ने दान के आंकड़ों को करोड़ों में पहुंचा दिया है। स्थानीय मस्जिदों और धार्मिक सभाओं में ईरान की स्थिति का हवाला देकर लोगों से खुलकर मदद की अपील की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियां अब उन खातों और ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच कर रही हैं जहां यह पैसा जमा हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की भावनाएं सही हो सकती हैं, लेकिन कानून और पारदर्शिता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।