सीजफायर खत्म!पाकिस्तान-अफगानिस्तान आमने-सामने, सीमा पर भड़की हिंसा

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बना अस्थायी युद्धविराम जैसे ही खत्म हुआ, सीमा पर हालात फिर बिगड़ गए। बीती रात दोनों देशों की सीमा पर अचानक भारी गोलीबारी शुरू हो गई। इस हिंसा में कम से कम दो आम नागरिकों की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल हो गए।
जानकारी के मुताबिक, यह संघर्ष कुनार प्रांत के नाराई और सरकानो जिलों में हुआ। यहां पाकिस्तान की ओर से जबरदस्त गोलाबारी की गई, जिससे स्थानीय लोगों में डर और अफरा-तफरी फैल गई।
तोपों की गूंज, गांवों में दहशत
अफगानिस्तान के सूचना विभाग के अधिकारी जियाउर रहमान स्पींघर ने बताया कि सीमा पार से दर्जनों तोप के गोले दागे गए। इन हमलों का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ा। घरों को नुकसान पहुंचा और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित जगहों की तलाश में भागते नजर आए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अचानक हुए इस हमले ने पूरे इलाके को दहला दिया। बच्चों और महिलाओं में खास तौर पर भय का माहौल बना हुआ है।
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दोनों तरफ से जवाबी कार्रवाई
स्थिति को देखते हुए अफगान सीमा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। अफगान अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तान की तीन सैन्य चौकियों को नष्ट कर दिया और एक व्यक्ति को मार गिराया।
हालांकि, इन दावों की पुष्टि नहीं हो पाई है। दूसरी तरफ पाकिस्तान का कहना है कि गोलीबारी की शुरुआत अफगान बलों ने की थी, जिसके बाद उन्हें जवाब देना पड़ा।
इस तरह दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला फिर तेज हो गया है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
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ईद से पहले हुआ था समझौता
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच यह अस्थायी युद्धविराम ईद-उल-फितर से पहले लागू किया गया था। इस समझौते के पीछे सऊदी अरब, तुर्की और कतर जैसे देशों की मध्यस्थता थी।
दरअसल, इससे पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले किए थे। अफगान सरकार का दावा था कि इन हमलों में सैकड़ों लोगों की जान गई थी, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। इसके बाद ही दोनों देशों ने कुछ समय के लिए संघर्ष रोकने पर सहमति जताई थी।
TTP ने फिर बढ़ाया खतरा
इसी बीच तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने भी हालात को और गंभीर बना दिया है। इस संगठन ने ऐलान किया है कि उसने पाकिस्तान में अपने हमले फिर से शुरू कर दिए हैं।
TTP को अफगान तालिबान का करीबी माना जाता है। साल 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद से इस संगठन की गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं।
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। वहीं, काबुल सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है।











