CG NEWS: आदर्श ग्राम कोट में महिला कमांडो का एक्शन: कच्ची शराब और अवैध गतिविधियों पर महिलाओं का सख्त पहरा

CHANDAN JAISWAL, KASHDOL। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड स्थित आदर्श ग्राम कोट में महिला सशक्तिकरण की मिसाल देखने को मिल रही है। ग्राम पंचायत की महिलाओं ने 'महिला कमांडो' टीम बनाकर गांव की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली है। यह टीम हर शाम गांव की गलियों में गश्त कर अवैध गतिविधियों, विशेषकर कच्ची शराब के निर्माण और बिक्री पर नजर रख रही है। इस पहल से ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है और गांव में सामाजिक अनुशासन का नया माहौल बन रहा है।
महिला कमांडो बनी गांव की नई सुरक्षा शक्ति
आदर्श ग्राम कोट में ग्राम पंचायत और महिलाओं की पहल पर गठित महिला कमांडो टीम अब गांव की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी है। महिलाओं ने स्वयं आगे आकर सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का निर्णय लिया है, जिससे गांव में अपराध और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण की दिशा में सकारात्मक प्रयास शुरू हुए हैं।
शाम होते ही गलियों में शुरू होती है गश्त
महिला कमांडो टीम प्रतिदिन शाम के समय समूह बनाकर गांव की गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर भ्रमण करती है। गश्त के दौरान टीम संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखती है और जरूरत पड़ने पर संबंधित जिम्मेदार लोगों को सूचना भी देती है। महिलाओं की सक्रियता से गांव में अनुशासन और सुरक्षा का माहौल मजबूत हुआ है।
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कच्ची शराब के खिलाफ महिलाओं का अभियान
ग्रामीणों के अनुसार महिला कमांडो टीम का सबसे बड़ा उद्देश्य गांव में कच्ची शराब के निर्माण और बिक्री जैसी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है। महिलाओं का कहना है कि नशे के कारण सामाजिक और पारिवारिक समस्याएं बढ़ रही थीं, इसलिए गांव को नशामुक्त बनाने के लिए यह कदम उठाया गया।

ग्रामीणों का बढ़ा भरोसा, असामाजिक तत्वों में डर
महिला कमांडो की नियमित गश्त से गांव में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि महिलाओं की सक्रिय मौजूदगी से असामाजिक तत्वों के हौसले कमजोर पड़े हैं। बुजुर्गों, युवाओं और पंचायत प्रतिनिधियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक बताया है।
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महिला सशक्तिकरण का बन रहा नया मॉडल
ग्राम कोट की यह पहल केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला नेतृत्व, सामाजिक सहभागिता और सामुदायिक जिम्मेदारी का भी मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है। यदि इस मॉडल को अन्य गांवों में भी अपनाया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता को नई दिशा मिल सकती है।












