The Kargil Girl:क्या आप जानते हैं कारगिल की 'शेरनी' गुंजन सक्सेना की असली कहानी?

कारगिल विजय दिवस पर जानिए भारतीय वायुसेना की बहादुर फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना की प्रेरणादायक कहानी। 1999 के कारगिल युद्ध में उन्होंने गोलियों और बमबारी के बीच चीता हेलीकॉप्टर उड़ाकर घायल भारतीय सैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला।
Follow on Google News
क्या आप जानते हैं कारगिल की 'शेरनी' गुंजन सक्सेना की असली कहानी?

साल 1999... भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल की पहाड़ियों में भीषण युद्ध चल रहा था। चारों ओर गोलियों की आवाज, रॉकेट हमले और बम धमाकों से पूरा इलाका दहल रहा था। ऐसे मुश्किल समय में भारतीय सेना के कई जवान दुश्मन की गोलाबारी के बीच घायल होकर फंस गए थे। उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।

इसी दौरान भारतीय वायुसेना की एक युवा महिला अधिकारी ने ऐसा साहस दिखाया, जिसने इतिहास रच दिया। उनका नाम था फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन के बेहद करीब जाकर घायल सैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला और जरूरी सामान भी पहुंचाया। यही वजह है कि आज उनका नाम भारतीय वीरांगनाओं की सूची में सम्मान के साथ लिया जाता है।

कौन हैं फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना?

गुंजन सक्सेना भारतीय वायुसेना की पहली महिला हेलीकॉप्टर पायलटों में शामिल हैं। उन्हें कारगिल युद्ध के दौरान युद्ध क्षेत्र में उड़ान भरने का मौका मिला। उस दौर में सेना में महिलाओं की संख्या बहुत कम थी और युद्ध क्षेत्र में महिला अधिकारी भेजना भी बड़ी बात मानी जाती थी। उन्होंने अपने साहस, आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा से यह साबित कर दिया कि देश की रक्षा करने का जज्बा किसी एक लिंग का नहीं होता।

/img/99/1784981176010

गुंजन सक्सेना ने कारगिल की बर्फीली पहाड़ियों के ऊपर 'चीता' हेलीकॉप्टर उड़ाया।

बचपन से था आसमान में उड़ने का सपना

गुंजन सक्सेना का जन्म उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ। बचपन से ही उन्हें हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर बहुत पसंद थे। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी थे और भाई भी सेना से जुड़े थे। घर का माहौल देशभक्ति से भरा हुआ था। जब उनकी उम्र की दूसरी लड़कियां खिलौनों से खेलती थीं, तब गुंजन अपने भविष्य में पायलट बनने का सपना देख रही थीं। परिवार ने भी उनके सपनों को पूरा करने में पूरा साथ दिया।

Kargil Vijay Diwas 2026 : शेरशाह से लेकर LOC:Kargil तक... कारगिल युद्ध पर बनीं ये फिल्में हर भारतीय को देखनी चाहिए

दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई, फिर एयरफोर्स में एंट्री

गुंजन सक्सेना ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना की परीक्षा पास की। साल 1994 में भारतीय वायुसेना ने पहली बार महिला पायलटों की भर्ती शुरू की। इस पहले बैच में सिर्फ 25 महिला प्रशिक्षु पायलट थीं और गुंजन सक्सेना उनमें से एक थीं। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ था।

जब कारगिल युद्ध शुरू हुआ

साल 1999 में पाकिस्तान ने कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर घुसपैठ कर कब्जा करने की कोशिश की। भारतीय सेना ने दुश्मन को जवाब देने के लिए 'ऑपरेशन विजय' शुरू किया। युद्ध बेहद कठिन था क्योंकि लड़ाई लगभग 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ी जा रही थी। ऐसे समय में भारतीय सेना को वायुसेना की मदद की जरूरत पड़ी। गुंजन सक्सेना और उनकी साथी श्री विद्या राजन को युद्ध क्षेत्र में भेजा गया। यह उनके लिए पहली बार था जब उन्हें असली युद्ध के बीच उड़ान भरनी थी।

/img/99/1784981180578

भारतीय सेना ने दुश्मन को जवाब देने के लिए 'ऑपरेशन विजय' शुरू किया।

मौत के साए में उड़ाया 'चीता' हेलीकॉप्टर

गुंजन सक्सेना ने कारगिल की बर्फीली पहाड़ियों के ऊपर 'चीता' हेलीकॉप्टर उड़ाया। यह हेलीकॉप्टर छोटा जरूर था, लेकिन बेहद मुश्किल इलाकों में उड़ान भरने के लिए जाना जाता है। उनका सबसे बड़ा काम था  घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालना। जवानों तक दवाइयां और जरूरी सामान पहुंचाना। दुश्मन की गतिविधियों की जानकारी जुटाना। सेना को सही समय पर खुफिया जानकारी देना। हर उड़ान उनके लिए जान जोखिम में डालने जैसी थी।

दुश्मन की गोलियों के बीच पूरा किया मिशन

कारगिल युद्ध के दौरान कई बार ऐसा हुआ जब गुंजन सक्सेना का हेलीकॉप्टर पाकिस्तान की फायरिंग की जद में आ गया। उन्हें लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के बेहद करीब उड़ान भरनी पड़ती थी। कई बार गोलियां और तोप के गोले उनके हेलीकॉप्टर के पास से गुजरे, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।

घायल जवानों की बनीं उम्मीद

कारगिल की चोटियों पर कई भारतीय सैनिक घायल होकर फंस गए थे। उन तक सड़क के रास्ते पहुंचना लगभग नामुमकिन था। ऐसे समय में गुंजन सक्सेना अपने हेलीकॉप्टर से वहां पहुंचतीं, घायल जवानों को उठाकर मेडिकल कैंप तक लातीं और फिर दोबारा नए मिशन पर निकल जातीं। उनकी इन उड़ानों ने कई सैनिकों की जान बचाई।

Kargil Vijay Diwas : CM शिवराज ने करगिल के शहीदों को अर्पित की श्रद्धांजलि, बोले- वो सीमा पर थे, इसलिए आज हम हैं

देश की पहली महिला, जिसने वॉर जोन में उड़ान भरी

गुंजन सक्सेना भारतीय वायुसेना की पहली महिला अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने सक्रिय युद्ध क्षेत्र में उड़ान भरी। उन्होंने उस समय यह उपलब्धि हासिल की, जब सेना में महिलाओं की भूमिका सीमित मानी जाती थी। उनकी सफलता ने आने वाली हजारों लड़कियों के लिए रास्ता खोल दिया।

/img/99/1784981178406

18 हजार फीट की ऊंचाई पर भारत की बेटी ने रचा था इतिहास

सम्मान और पहचान

कारगिल युद्ध में उनके साहस और सेवा को पूरे देश ने सराहा। उन्हें बहादुरी के लिए सम्मानित किया गया और उनका नाम भारतीय सैन्य इतिहास में दर्ज हो गया। आज भी गुंजन सक्सेना युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने यह साबित किया कि मेहनत, आत्मविश्वास और देशभक्ति के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

उनकी कहानी पर बनी फिल्म

गुंजन सक्सेना के जीवन पर साल 2020 में गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल फिल्म रिलीज हुई। इस फिल्म में अभिनेत्री जान्हवी कपूर ने गुंजन सक्सेना की भूमिका निभाई, जबकि पंकज त्रिपाठी ने उनके पिता का किरदार निभाया। फिल्म में दिखाया गया कि कैसे एक साधारण लड़की अपने सपनों को पूरा करने के लिए समाज की सोच, कठिन प्रशिक्षण और चुनौतियों का सामना करती है।

/img/99/1784981183068

गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल फिल्म में अभिनेत्री जान्हवी कपूर ने गुंजन सक्सेना की भूमिका निभाई

क्यों खास है गुंजन सक्सेना की कहानी?

गुंजन सक्सेना सिर्फ एक पायलट नहीं हैं, बल्कि साहस, समर्पण और देशभक्ति की मिसाल हैं। उन्होंने ऐसे समय में इतिहास रचा, जब महिलाओं के लिए सेना में अवसर सीमित थे। उन्होंने यह साबित किया कि देश की रक्षा करने के लिए केवल हौसले की जरूरत होती है। आज भारतीय वायुसेना, थलसेना और नौसेना में बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी सेवाएं दे रही हैं। इसमें गुंजन जैसी अधिकारियों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts