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सरेंडर नहीं, मौत चुनी :कांकेर एनकाउंटर में महिला नक्सली ‘रूपी’ ढेर, पति भी में मुठभेड़ मारा गया था

छत्तीसगढ़ के कांकेर में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में महिला नक्सली कमांडर रूपी मारी गई। वह लंबे समय से वांटेड थी और सरेंडर से इनकार कर रही थी। जानिए पूरा एनकाउंटर, बरामद हथियार, नक्सल नेटवर्क पर असर और हाल के सरेंडर व आंकड़ों के साथ पूरा एक्सप्लेनर।
कांकेर एनकाउंटर में महिला नक्सली ‘रूपी’ ढेर, पति भी में मुठभेड़ मारा गया था
फाइल फोटो
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    कांकेर। छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके से एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है, जहां सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक बड़ा नाम खत्म हो गया। कांकेर जिले के घने जंगलों में हुई इस कार्रवाई में महिला नक्सली कमांडर ‘रूपी’ को मार गिराया गया है। यह वही रूपी थी, जो लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर थी और इलाके में सक्रिय नक्सली नेटवर्क को संभाल रही थी। इस मुठभेड़ को बस्तर में कमजोर पड़ते नक्सल नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

    कहां और कैसे हुआ एनकाउंटर?

    यह मुठभेड़ छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के माचपल्ली, आरामझोरा और हिडूर के जंगलों में हुई। पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि, इस इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी है। इसके बाद सुरक्षाबलों ने तड़के सुबह सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

    जैसे ही जवान जंगल के अंदर पहुंचे, नक्सलियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। इसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाला और दोनों तरफ से तेज गोलीबारी हुई। कुछ देर चली इस मुठभेड़ के बाद जब हालात शांत हुए, तो इलाके की तलाशी ली गई, जिसमें एक महिला नक्सली का शव बरामद हुआ।

    कौन थी ‘रूपी’?

    मुठभेड़ में मारी गई महिला नक्सली की पहचान रूपी के रूप में हुई है, जो एसीएम (एरिया कमेटी मेंबर) रैंक की कमांडर थी। वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की वांटेड सूची में शामिल थी और बस्तर क्षेत्र में सक्रिय आखिरी तेलुगू महिला नक्सली कैडर मानी जा रही थी।

    रूपी न केवल नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थी, बल्कि अन्य नक्सलियों को सरेंडर करने से रोकने में भी अहम भूमिका निभा रही थी। यही कारण था कि सुरक्षा एजेंसियां उसे पकड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं।

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    मौके से क्या बरामद हुआ?

    मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके की सघन तलाशी ली। इस दौरान रूपी के पास से एक पिस्टल, भारी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य नक्सली सामग्री बरामद की गई। यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि, नक्सली अब भी इस इलाके में सक्रिय हैं, हालांकि उनकी ताकत लगातार कमजोर हो रही है।

    नक्सली लीडर विजय रेड्डी से था संबंध

    रूपी का संबंध एक बड़े नक्सली नेता से भी था। वह स्टेट कमेटी मेंबर विजय रेड्डी की पत्नी थी, जो पहले ही मुठभेड़ में मारा जा चुका है। विजय रेड्डी बस्तर के कई इलाकों में सक्रिय रहा था और उसकी मौत के बाद रूपी ने ही कुछ हद तक नेटवर्क संभाला था। जानकारी के अनुसार. रूपी ही उत्तर बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने से रोक रही थी, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई थी।

    पुलिस और अधिकारियों का बयान

    कांकेर के पुलिस अधीक्षक ने इस मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि, यह ऑपरेशन पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर चलाया गया था। मुठभेड़ के बाद एक महिला नक्सली का शव बरामद हुआ है और उसकी पहचान रूपी के रूप में की गई है। बस्तर रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कहा कि, नक्सलियों को लगातार आत्मसमर्पण के लिए कहा जा रहा है, लेकिन जो लोग हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ते, उनका यही अंजाम होता है।

    यह भी पढ़ें: CG Naxali Encounter : सुकमा में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 5 लाख का इनामी नक्सली ढेर

    सरेंडर की अपील नहीं मानी रूपी

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, रूपी को कई बार सरेंडर करने के लिए कहा गया था। सरकार की ओर से नक्सलियों के लिए पुनर्वास योजना भी चलाई जा रही है, जिसके तहत उन्हें मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया जाता है। लेकिन रूपी ने इस रास्ते को नहीं चुना और सक्रिय रूप से नक्सली गतिविधियों में शामिल रही। अंततः मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई।

    कांकेर में अब कितने नक्सली बचे?

    सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि कांकेर जिले में अब केवल कुछ ही नक्सली सक्रिय बचे हैं। अनुमान के मुताबिक, यहां लगभग 10 के आसपास नक्सली ही बचे हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है। यह आंकड़ा बताता है कि, बस्तर में नक्सलियों का नेटवर्क तेजी से कमजोर हो रहा है।

    2025 के आंकड़े- नक्सल ऑपरेशन का असर

    श्रेणी

    आंकड़े

    पुलिस-नक्सली मुठभेड़

    99

    मारे गए नक्सली

    256

    गिरफ्तार नक्सली

    884

    सरेंडर करने वाले नक्सली

    1562

    बरामद हथियार

    645

    बरामद IED

    875

    शहीद जवान

    23

    आम नागरिकों की हत्या

    46

    इन आंकड़ों से साफ है कि, सुरक्षाबलों का अभियान लगातार तेज हो रहा है और इसका असर भी दिखने लगा है।

    लगातार बढ़ रहे सरेंडर के मामले

    पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। अलग-अलग जिलों में दर्जनों नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया है। कई मामलों में इन नक्सलियों पर लाखों रुपये का इनाम भी घोषित था, लेकिन सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया।

    Naxal Encounter

    नक्सल नेटवर्क पर बड़ा असर

    रूपी जैसे बड़े कैडर का मारा जाना केवल एक एनकाउंटर नहीं, बल्कि नक्सली नेटवर्क पर एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि अब नक्सली संगठन के पास अनुभवी और मजबूत नेतृत्व की कमी हो रही है। सुरक्षाबलों के लगातार ऑपरेशन और नक्सलियों के सरेंडर करने से यह नेटवर्क धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जा रहा है।

    सरकार का दावा- नक्सलवाद खत्म होने की ओर

    केंद्र सरकार की ओर से भी यह दावा किया गया है कि देश में नक्सलवाद का प्रभाव तेजी से कम हो रहा है। सरकार का कहना है कि अब अधिकांश क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियां समाप्त हो चुकी हैं और बचे हुए इलाकों में भी जल्द ही पूरी तरह नियंत्रण पा लिया जाएगा।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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