पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ तीनों आरोप साबित, जांच समिति ने लोकसभा में पेश की रिपोर्ट

नई दिल्ली। जांच समिति ने जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास 30, तुगलक क्रेसेंट, नई दिल्ली में आग लगने के बाद स्टोररूम से बड़ी मात्रा में जले हुए 500 रुपये के नोट मिलने के मामले की जांच की। समिति के मुताबिक नकदी के स्रोत और स्वामित्व को लेकर जस्टिस वर्मा संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। रिपोर्ट में साक्ष्यों के संरक्षण में भी लापरवाही पाए जाने की बात कही गई है। वहीं, उनके स्पष्टीकरण को असंतोषजनक और टालमटोल वाला बताया गया। अब समिति की रिपोर्ट के आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संसद में पेश हुई जांच समिति की रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई। तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपने के कई महीनों बाद इसे संसद के पटल पर रखा। रिपोर्ट दोनों सदनों में संबंधित महासचिवों ने पेश की। दो खंडों में तैयार रिपोर्ट में जांच के दौरान जुटाए गए मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य शामिल हैं। जस्टिस वर्मा पर उनके आधिकारिक आवास में आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी मिलने के आरोप लगे थे।
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नकदी के स्रोत और स्वामित्व पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला
समिति ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए पहले आरोप को सही माना है। रिपोर्ट के मुताबिक आधिकारिक आवास के स्टोररूम में मिली बड़ी मात्रा में नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत और स्वामित्व को लेकर जस्टिस वर्मा संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसी आधार पर समिति ने इस आरोप को प्रमाणित माना। मामले में दमकल कर्मियों को आग बुझाने के दौरान स्टोररूम से जले हुए 500 रुपये के नोट मिले थे। नकदी मिलने के बाद इस पूरे मामले की न्यायपालिका और राजनीतिक गलियारों में चर्चा हुई थी।
करेंसी नोटों के गायब होने का भी जवाब नहीं मिला
दूसरे आरोप में समिति ने मामले से जुड़े भौतिक साक्ष्यों के उचित संरक्षण पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव किया गया था। कुछ करेंसी नोटों के गायब होने को लेकर भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला। हालांकि, समिति ने यह नहीं कहा कि गायब नोटों को खुद जस्टिस वर्मा ने हटाया था। इसके बावजूद साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में लापरवाही को आरोप के समर्थन में माना गया।
स्पष्टीकरण को बताया असंतोषजनक
तीसरे आरोप को भी जांच समिति ने सही माना है। समिति के अनुसार 22 मार्च 2025 सहित जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं थे। रिपोर्ट में इन जवाबों को टालमटोल वाला बताया गया है। स्वतंत्र गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर समिति ने इस आरोप को भी प्रमाणित माना। इस तरह जांच समिति ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों Articles of Charge I, II और III को सिद्ध पाया है।
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अब कानून के अनुसार होगी आगे की कार्रवाई
जांच समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट, कार्यवाही का रिकॉर्ड और सभी संबंधित दस्तावेज सक्षम प्राधिकारी को सौंप दिए हैं। अब रिपोर्ट के आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा से जुड़े जले हुए नोट मामले में एफआईआर और एसआईटी जांच की मांग वाली एक याचिका खारिज कर दी। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक आराधे की पीठ ने याचिका को सस्ती पब्लिसिटी के लिए दायर बताया। याचिकाकर्ता ने कहा था कि पद से इस्तीफा देने के बावजूद कथित बेहिसाब धन को लेकर आपराधिक दायित्व खत्म नहीं होता।












